मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

हिन्दुओ की ये भावना के "कुत्ता भौंक कर अपने आप चुप हो जाएगा" काफी हद तक जिम्मेवार है कुत्ते की भों-भों सुनने के लिए!

आजकल जो ब्लोग्युद्ध सा छिड़ा हुआ है ब्लॉगजगत में हिन्दू-मुस्लिम संस्कृतियों को लेकर अपने-आप में दुर्भाग्यपूर्ण है!और जो वास्तव है में वो तो अति-घृणित भी! लेकिन जब कोई हमारे बारे में कुछ गलत कह रहा है तो उसे उसका जवाब भी तो मिलना चाहिए!जो सक्षम है जवाब देने में वो तो जवाब जरुर देंगे,देना भी चाहिए!हिन्दुओ की ये भावना के "कुत्ता भौंक कर अपने आप चुप हो जाएगा" काफी हद तक जिम्मेवार है कुत्ते की भों-भों सुनने के लिए!



असल में ये पोस्ट लिखी गयी है एक नीचे दिए गिये लिंक पर लिखे गए एक लेख पर टिप्पणी करते हुए!विस्तार से जानने के लिए नीचे क्लिक करें!  

 http://samrastamunch.blogspot.com/2010/04/blog-post_3276.html  इस तरह के कुत्ते सिर्फ मुस्लिम ही नहीं बल्कि इसाई जगत में भी पाए जाते है!और तो और हिन्दू धर्म से जो उप-धर्म निकले है उनमे भी और जो अभी तक भी खुद को हिन्दू मान रहे है वो भी इन कुत्तानुमा वयवहार ही कर रहे है!




कुत्ते से एक बात याद आ गयी,कवी सुरेंदर शर्मा जी की!अपने शब्दों का प्रयोग कर रहा हूँ,जो गलती होगी वो मेरी ही होगी!

एक फौजी की शादी हो गयी जी,बन्दे के पास अपनी दोनाली बन्दुक!नयी-नयी दुल्हन घर में!फौजी साहब खाना खा रहे है जी,बन्दूक पास में रखी है!
एक कुत्ता वही बैठा था,जब उसे काफी देर तक टुकड़ा नहीं मिला तो बेचारा आदतन भौंकने लगा!जब काफी देर हो गयी तो फौजी बोला "कुत्ते चुप"!अब बिना टुकड़े वो कहाँ चुप होने वाला था!वो भौंकता रह जी!फौजी बोला "कुत्ते चुप,मेरी बन्दूक नहीं देखी क्या?"अब कुत्ता कोई पढ़ा-लिखा डॉक्टर तो था नहीं!वो बेचारा बन्दूक क्या देखता,वो तो रोटी देख रहा था!रोटी मिली नहीं तो वो भौंकता रहा!
अब हो गयी जी हद!फौजी साहब अपने वास्तविक रूप में आते हुए बोले कुत्ते मै तीन तक गिनूंगा,चुप हो गया तो ठीक नहीं तो फिर देख लेना!
कुत्ता अब भी नहीं समझ पाया बेचारा!कुत्ता जो था!उधर गिनती शुरू!कुत्ते चुप हो जा एक...कुत्ते चुप हो जा दो...कुत्ते चुप होजा तीन....!


कुता बेचारा सच में अनपढ़ था!गिनती का महत्त्व नहीं जानता था,भौंकता रहा गिनती के दौरान भी और बाद भी!
गिनती पूरी और बस एक फायर ही काफी था उस कुत्ते के लिए तो!सदा के लिए चुप!फौजी अपनी जीत पर अति प्रसन्न!अब आराम से खाना खाया उसने!लेकिन उसकी पत्नी थोड़ी जागरूक नारी थी!वो ये अत्याचार सहन ना कर पायी!उसने आवाज उठायी!


फौजी पतिधर्म के तहत सब सुनने लगा!वो कहे जा रही थी....."ये कोई मानवता है क्या?कुत्ता था भौंक ही तो रहा था,गोली मार दी!ऐसे ही इसी को गोली मार देते है क्या......"
अब फौजी अपने धैर्य को टूटा सा देख कर बोला के बहुत हो चुका अब चुप हो जा!


पर नारी थी,जागरूक थी,"मुझे तो पता ही नहीं था कि आप ऐसे भी हो,पता होता तो कभी शादी नहीं करती......"


अब फौजी से ना रहा गया!वो बोला "देख चुप होजा एक.....चुप होजा दो......
और फिर तीन गिनने कि जरुरत नहीं पड़ी!आज सब ठीक चल रहा है!उसके बाद उस घर में फिर कभी लड़ाई नहीं हुई!


मतलब यही कि,कभी-कभी शान्ति के लिए हमे भी कठोर रूप अख्तियार कर लेना चाहिए!कोई हमे गलत कह रहा है तो कोई कब तक सहे!वो गलत है ये कहने वाला कोई ना कोई तो होना ही चाहिए!और वो कोई मै क्यों नहीं,ये बात सभी हिन्दुओ को सोचनी चाहिए!जब सभी अपने-अपने स्तर पर विरोध दर्ज कर सकते है तो करना चाहिए!क्यों हम गलत को गलत नहीं कह पा रहे है?


सोचो!
जय हिंद,जय श्री राम.....
 कुंवर जी,


17 टिप्‍पणियां:

  1. आज तो भाई साब कमाल कर दिया. यह जमाल जैसे काफ़िर अपनी करतूतों से किसी को इस्लाम की इज्जत करना तो नहीं सिखा पायेगे , उल्टा जो इज्जत करते है उनसे भी कुछ ना कुछ उल्टा-सीधा कहलवा के छोड़ेगे

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  2. बहुत बढ़िया , कभी कभार चुप करवाने के लिए कुत्ते पर पत्थर और लात मारना भी जरूरी है नहीं तो भौंकता ही रहेगा !

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  3. लगता है कि अब कुत्ते को गोली मारनी ही पड़ेगी

    हाहा हा हा
    और जहाँ तक हिन्दुओ के विरोध करने कि बात है तो अब हिंदू वो शेर नहीं रहा जो पहले था अब वो सूअर बन गया है उसे भी से बताना होगा कि वो सूअर नहीं बल्कि शेर है

    प्रणाम

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  4. kitni sahi aur sachchi baat kahi hai aapne ,par vo toek nirih prani tha hamare shashtro me bhi likha gaya hai ki bejubaan v nihatthe par haath nahi uthana chahiye.

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  5. आपने जो भी कहा सही कहा ।इन कुतों को हम अन्जाम तक पहुंचाकर ही छोड़ेंगे। बैसे भी अन्जाम तक पहुंचे विना ये मानने वाले नहीं...

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  6. lekin bhi saheb ye kutta to padha likha hai . aur kanhi pagal ho gaya to.............. kya karna chahiye.

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  7. कुछ कुत्ते ऎसे भी होते हैं जिन्हे कि अगर बोटी दी जाए तो वो तब भी भौंकना नहीं छोडते :-)
    आपके कथन से सहमति!

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  8. जियो प्यारे। टिट फ़ार टैट, यही कहते हैं न? वही है।

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  9. कुंवर जी, कुत्तो को काम है भौकना और हाथी का काम है चलना अभी भौकने दो, बस हाथी का एक दिन ही काफी जिस दिन कुत्‍ते की दुम पर हार्थी पैर रखेगा, फिर देखियेगा कुत्ते की सारी मस्‍ती दुम मे घुस जायेगी।

    जय श्रीराम

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  10. अरे यहाँ तो हर किस्म के कुत्ते इकठठे है

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  11. अरे यहाँ तो हर किस्म के कुत्ते इकठठे है

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  12. आपके व्यंग की शार और इशारा मजबूत है ... पर हिंदू समाज इतना मजबूत नही है ...

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  13. jharokha ji wo to ek nirih prani tha ye to thik h
    par aaj smaj me to unse bhi gye gujre log jo badi badi upadhiya liye huye h sar uthaye bina darr ke jee rahe h
    unka kya kare

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  14. kunwar ji thik kaha
    aapka ishara aur aapka vyangya mere dil tak poori tarah pahuch gya hain
    amit ji ki baat bhi bilkul thik h ki aise kutte bahut h is chaman me

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