बुधवार, 21 अप्रैल 2010

देखना एक बार क्या ये सच्ची बात है?(वयंग्य),

देखना एक बार ये आँखों की चमक
ये हाथो की पकड़
ये होंठो पर मुस्कान
क्या सच्ची बात है!
या फिर
महज़ औपचारिकताओं की
करामात है!

ये फोटो अभी कुछ दिन पहले दैनिक  जागरण  में  छपा  था!देख कर कुछ अटपटा सा तो लगा,पर सोचा काश ये सब सच्चा होता!आप क्या सोचते है इस बारे में.....?

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब काश की ये सब सही होता |

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  2. काश ये सब सच हो जाता तो आज इतनी मुसीबत में न होते वो और हम भी

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  3. mahaj ek dikhawa hain ye sab
    ye sab rajniti se prerit aur apne baap america ko khush karne ke liye hi hain
    lok dekhawa hain ye sab
    sale sare nikkamme hain

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  4. ना नज़र मिली ना दिल मिले , झूंठी हसी लबों पे खिली थी
    मिलते हाथ भी दिखे थे पर "अमित" राहें अमन नदारत थी

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  5. shukriya amit bhai ye shaayari pahunchaane ka!

    rana sahaab,rachna ji,or shri ji aapka bhi bahut-bahut shukriya yaha padharaane ka!

    kunwar ji,

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