बुधवार, 7 अप्रैल 2010

वो लोग.....(क्षणिका)

वो
लोग
जो
सोचते बहुत है,
अपनी
आत्मा
को
नौचते बहुत है!
कुंवर जी,

19 टिप्‍पणियां:

  1. इस पोस्ट के लिए साधुवाद।

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  2. waqay me la jawab

    good

    bahut khub


    shekhar kumawat

    http://kavyawani.blogspot.com/

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  3. ये क्षणिका लाजवाब है....बहुत खूब

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  4. वाह! बहुत बढ़िया! बिल्कुल सही कहा है आपने!

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  5. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  6. यह क्षणिका बने कणिका,कणिका बने कण.
    कणकण होवे मण,तो हो अमित तम हरण

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  7. यह क्षणिका बने कणिका,कणिका बने कण.
    कणकण होवे मण,तो हो अमित तम हरण

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  8. ek din tu hi bol raha tha na : "Main sirf sochta hoon, karna muchhe kam hi pasand hai"

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  9. अच्छी क्षणिका है ! दरअसल चिंता ही चिता है ! यह बात मैं जब स्कूल में पढता था, तभी किसीके लेख में पढ़ा था...आज याद नहीं वो किसने लिखा था, पर जो भी लिखा था सही लिखा था !

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