रविवार, 5 अप्रैल 2020

कोरोना के बाद बिना कोई मशीन छुए हाजिरी कैसे लगवाए?

कोरोना महामारी  ने विश्व के आगे अनेको चुनौतियों के पहाड़ खड़े कर दिए है! वर्तमान में तो जीवन ठप्प हो ही गया है, जब कोरोना का असर काम होगा/ख़त्म होगा, उसके बाद भी बहुत दिनों तक कोरोना की गूंज वातावरण में रहेगी ही! अभी कार्यलयो में जो हाजिरी  सिस्टम या अटेन्डेंस सिस्टम चला हुआ था ऊँगली या अंगूठे की पहचान द्वारा उस से लोग स्वाभाविक ही घबराएंगे! क्या पता जिसने मुझ से पहले पांच किया था उसकी अंगुली/अंगूठा बिलकुल साफ़ था या नहीं? जीवाणु/विषाणु रहित था या नहीं?

भले ही हम किसी को कहे या न कहे, लेकिन ये दर हमारे मन में अवश्य बना ही रहेगा  और ये एक हद तक सही भी है! जब केवल सुरक्षा ही बचाव है, ऐसे वातावरण में हमें सावधानी अवश्य ही रखनी चाहिए!

आजकल बाजार इतना प्रतिस्पर्धी व् हर समस्या का हल प्रस्तुत करने का इतना उत्सुक हो गया है कि हर समस्या का हल उसके पहले ही प्रस्तुत कर देता है! इस अंगुली/अंगूठा पंच सिस्टम से बचाने के लिए भी एक हल बाजार ने दे दिया है!
 अब आप इस लिंक में दिए गए वीडियो को ही देखिए!
इसमें दिखाया गया है कि  कैसे हम बिना किसी मशीन को छुए कैसे अपनी अटेन्डेंस लगा सकते है/लगवा सकते है! इस से न तो किसी भी प्रकार के संक्रमण फैलने का खतरा ना किसी भी प्रकार के भय  या वहम में रहने का डर!बेफिक्र होकर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाइये!
यहाँ पर आपको ऐसी मशीने व् इन से सम्बंधित हर प्रकार की समस्या का समाधान आसानी से उपलब्ध होगा!


गुरुवार, 2 अप्रैल 2020

श्री राम जन्मोत्सव की हार्दिक बधाई व् शुभकामनाये

जय श्री राम
 आप सभी को श्री राम जन्मोत्सव की हार्दिक बधाई व् शुभकामनाये!
मंगल भवन अमंगलहारी श्री राम का

शनिवार, 8 जून 2019

क्या कभी......(कुँवर जी)

जब किसी राह पर सब कुछ तपाती हुई इस धूँप से परेशान होते होंगे तो जरूर नजर किसी पेड़ को तलाश करती होगी! जैसे ही कही कोई छोटा मोटा  जैसा भी पेड़ दिखा नहीं कि सुस्ताने के लिए मन करता ही होगा! कही बहुत ज्यादा जल्दी ना हो तो कुछ देर पेड़ के नीचे रुक जाते भी होंगे , किसी शीघ्रता के कारण यदि ना भी रुके तो भी मन में उस छाँव का मोह तो उपजता ही होगा, काश; कुछ देर रुक पाते यहाँ!यदि रुक जाए तो अवश्य ही बहुत शान्ती मिलती होगी, मन से इस पेड़ को लगाने वाले के लिए बहुत आशीष भी निकलते होंगे!

क्या कभी ऐसा पेड़ लगाने की बात भी मन में आती है?

जय हिन्द, जय श्रीराम!
कुँवर जी !

बुधवार, 20 मार्च 2019

प्रोपगेंडा फैलाने की प्रयोगशाला टीवी विज्ञापन के प्रयोग और उसके असर (कुँवर जी)

सिनेमा और टीवी व विज्ञापन की ताकत को वामपंथी कसाई ईसाई पापीये कंगले खूब समझते है, और विज्ञापन जगत में अच्छी पकड़ भी इन्होंने बनाई है। अपने प्रोपगेंडा को जनमानस के मानस में उतारने के लिए इनका बखूबी प्रयोग भी ये करते है। सबसे ताजा उदाहरण आपको #सिर्फ_एक्सेल वाला ध्यान होगा। आजकल एक हॉटस्टार के ऑनलाइन वीडियो सीरीज़ का विज्ञापन आता है, बदलाव की बयार बहाने वाला।

उसमे दिखाया जा रहा है कि अपने यहाँ बाप और बेटा दोस्त नही हो सकते, लेकिन चलो बदलते है, और बाप बेटा साथ दोस्त बन कर दिखते है। आगे दिखाया जाता है कि छोटे शहरों में बड़े बिजनस की शुरुआत अपने यहाँ नही होती, लेकिन बदलते है, और एक छोटे शहर में कार का डिजाइन तैयार होता दिखता है। ऐसे कुछ क्रान्तिकारी बदलाव के बीच दिखाया जाता है कि एक कपल डाँस पार्टी में दो लड़के गले मे बाहें डाले खड़े है, स्लोगन बोला जाता है कि अपने यहाँ ऐसे प्यार की कोई जगह नहीं, लेकिन बदलते है, और दोनों लड़के और अधिक लिपट जाते है और सभी उनको नॉर्मली ले रहे होते है।

आप समझ गए होंगे, कैसे विज्ञापन जगत और ये सिनेमा, बल्कि आजकल का ऑनलाइन शार्ट फ़िल्म जगत कैसे समाज को खोखला कर रहे है। ये विज्ञापन टीवी सीरियल में, मैच के बीच मे किसी भी समय चल जाता है, जब पूरा परिवार टीवी देख रहा होता है, बच्चे भी। बड़े तो चलो बच भी जाए इस विज्ञापन के अस्त्र से, लेकिन ये बच्चो के भोले मन गंद का बीज तो बो ही जाएगा। एक बहुत गन्दी बात, जो सदा ही धिक्कारने के, दुत्कारने के लायक ही रहेगी, उसे बच्चे देख कर ऐसा तो चलता है वाली फिलिंग लेने लग जाएँगे। उफ्फ, कितना बुरा माहौल बनाया जा रहा है।

चूँकि इन सब गन्दी हरकतों को केवल इस्लाम ईसाई और वामपंथी जैसे गलीज पंथों में ही मान्यता है तो उनको इन से कोई दिक्कत नही होगी, लेकिन एक सनातनी परिवार के लिए तो ये एक गम्भीर समस्या ही है। आजकल सनातनी परम्परा की और झुकाव केवल बीजेपी का ही है, अन्य किसी पार्टी का नही है, और इन वामी कामी झामी सभी को इस पार्टी की आम जन में बढ़ती लोकप्रियता गम्भीर समस्या बनी हुई है। आम जन में बीजेपी के और इसकी नीति के प्रति विक्षोभ पैदा करने के लिए पुनः आम विज्ञापन का अस्त्र चलाया गया है।

डेली हंट न्यूज़ पोर्टल है शायद कोई, उसका विज्ञापन देखा। उसमे आदमी को तोता बना दिखाया गया है, और प्रेरणा दी गयी है कि हमे सचेत रहना चाहिए, अपने विवेक का प्रयोग करना चाहिए, किसी के कुछ भी कहने को ऐसे ही नही मान लेना चाहिए। आपको लगेगा इसमे भला गलत है ही क्या? लेकिन इनकी चाल ही ऐसी होती है कि एकदम तो बहुत अच्छी, बल्कि बहुत जरूरी भी लगती है। अब इसमें दिखाया गया है कि किसी ने कह दिया कि GST ने सब बहुत सरल कर दिया है, तोता बना आदमी ये बात मान लेता है, आगे भी बोलता है कि जीएसटी ने तो सब एकदम सरल कर दिया है। फिर आता है एक तत्वज्ञानी, वो बोलता है ऐसे ही किसी के तोते मत बनो कि जीएसटी ने सब सरल कर दिया। देखो डेली हंट और जागरूक बनो। किसी का तोता मत बनो। अब ये विज्ञापन केवल डेली हंट का ही था क्या? जरूरी नही के अपने पक्ष में ही कुछ दिखाओ बोलो, विरोधी के विपक्ष का माहौल बना दो।

कुछ आया समझ मे, सीबीआई को सरकार का तोता कहने का भी एक दौर बड़ा मशहुर हुआ था, आपको ध्यान तो होगा ही।

जय हिन्द जय श्रीराम,
कुँवर जी।।

सोमवार, 1 जनवरी 2018

एक अद्भुत अनोखी फिल्म Curious case of Benzamin Button......(कुँवर जी)

Curious case of Benzamin Button......
एकदम अलग तरह की फिल्म लगी मुझे।विश्व युद्ध का समय दिखाया गया है।
शुरुआती दृश्य मे एक घड़ी का निर्माण दिखाया गया है जो उल्टी चलती है।सभी इसे मजाक मानते है लेकिन घड़ी निर्माता जब इस उल्टी घड़ी बनाने का कारण बताता है तो सभी भावुक होकर इसे स्विकार कर लेते है।वो चाहता है कि काश बीते हुए दिन वापस आ जाये।जो युद्ध मे मर गये है, अपने परिवार से बिछुड़ गये है वो वापस आ जाये।ये घड़ी इसी उम्मीद को दिखा रही थी कि काश समय वापस हो ले।
फिल्म का नायक जिस दिन पैदा होता है उसी दिन विश्व युद्ध के विराम की घोषणा हुई है। सभी बहुत खुश है। इधर Button परिवार भी बहुत खुश है कि आज ही के इतिहासिक दिन औलाद पैदा हो रही है। सभी बहुत नर्वस लेकिन सम्भावित खुशी के लिये रोमांचित भी है।जैसे ही लड़का जन्म लेता है, तभी बाहर से बहुत दूर से भागता हुआ नवजात का पिता लड़के की माँ के पास आता है वो बहुत ही मार्मिक दृश्य है।लड़का जन्म ले चुका है लेकिन किसी भी घरवाले के चेहरे पर खुशी के भाव नही है। जन्मोत्सव पर मरघट का सा मंजर है।नायक का पिता अपनी पत्नी के पास जाता है, वो मरणासन्न है।वो अपने पति को कहती है कि लड़के का ख्याल रखना.... और अन्तिम यात्रा को निकल जाती है। तब नायक का पिता नवजात नायक को देख कर घबरा जाता है। ऐसा लगता है कोई राक्षस हो छोटा सा।एक छोटी सी झलक नायक की तब मिलती है। नायक का पिता अपनी पत्नी की मौत और इस राक्षस जैसे बेटे को देख कर अन्दर से बुरी तरह टूट जाता है और उस नवजात शिशु को एक तौलिये मे लपेट कर बेहताशा दौड़ता जाता है और बहुत दूर एक सुनसान सी जगह मे एक ओल्ड हाउस के मुख्य द्वार के सामने उसे छोड़ आता है। थोड़े से पैसो के साथ।
उसी ओल्ड हाउस मे नायक की परवरिश होती है। नायक सामान्य लड़का नही है। वो बहुत बूढ़ा दिखाई देता है। बहुत ज्यादा बूढ़ा। उसके बचने की किसी को भी उम्मीद नही है फिर भी ओल्ड हाउस चलाने वाली लेडी उसे बहुत प्यार से पालती है।
सभी नायक को बहुत अजीब मानते है, दिखता भी है। उम्र मे बहुत छोटा लेकिन शरीर से बहुत बूढ़ा दिखाई जो देता है। 5-7 साल का होने पर भी वो चल नही पाता। उसके सर पर थोड़े बहुत सफेद बाल है, शरीर और चेहरे पर झुर्रिया है।70-80 साल का लगता है।वो अपने आप का और बाकी दुनिया का गहराई से विश्लेशण करता रहता  है।
एक हुले लुइया की महफिल का दृश्य भी आता है, कटाक्ष है करारा।लेडी उसे एक पादरी के पास लेकर जाती है, कि वो येशू से इसके लिये प्रार्थना करे और ये चल पड़े बिना बैसाखी के। पादरी हुले लुइया करता है जोर जोर से, बेंजामिन को मानसिक हौसला मिलता है और वो दो तीन कदम चल पड़ता है। सभी हुले लुइया हुले लुइया करने लग जाते है, लेकिन वो पादरी जो सबके लिये यीशु से प्रार्थना करता था लोगो के दुख दूर करवाता था, अपनी मृत्यु के लिये उसे प्रार्थना करने का समय भी नही मिलता।वही उसी समय मँच पर ही वो मर जाता है।

आगे सब उम्र मे बड़े होते जाते है लेकिन बेंजामिन उम्र मे बढ़ता तो है लेकिन शरीर से जवान होता जाता है। यही फिल्म की विशेषता है सब बूढ़े होते जाते है नायक जवान होता जाता है। आगे नायक को बस स्त्री भोग करता ज्यादा दिखाया गया है लेकिन वो ये सब देख रहा है कि उसके आस पास के लोग बूढ़े हो रहे है और मर रहे है और जवान होता जा रहा है। जब वो छोटा था तब भी लोग उसकी उम्र का विश्वास नही कर पाते थे अब वो बूढ़ा होता जा रहा तब भी लोग उसकी उम्र का विश्वास नही कर पाते है। अंत मे वो बच्चा हो जाता है और नवजात शिशु की तरह हो कर मर जाता है।
ये पूरी ऐसे आगे बढ़ती है कि फिल्म एक बूढ़ी औरत जो कि मरने वाली है हॉस्पिटल मे बैड पर पड़ी है को उसकी लड़की बेंजामिन की डायरी पढ़ कर सुनाती है। जैसे जैसे फिल्म आगे बढ़ती है बेंजामिन से उनका क्या रिश्ता रहा था पता चलता है।ये फिल्म देख कर ही पता करना आप लोग।
ब्रैंड पिट का अभिनय बाँधे रखता है और बूढ़े पिट का अभिनय बहुत ही जबर्दस्त।
ऐसा तो मुझे लगा था खैर। आप भी देखे और बताए कुछ ज्यादा तो नही कह दिया मैने।
संक्षिप्त मे फिल्म ऐसी है कि
एक बच्चा पैदा होता है जो फिजिकली और मेंटली बूढा होता है  जैसे जैसे उम्र बढ़ती है वह फिजिकली और मेंटली age में घटता जाता है ।
 तो बुढापे मेंऔर जवानी में जो उसकी wife होती है वह बुढ़ापे में उसे बच्चे की तरह मरते देखती है
 मतलब एक अकेला बन्दा जो अपनी age reiwind मे जीता है।जब देखोगे तो लगेगा कि इतनी छोटी छोटी detail कैसे दिखाई गयी है।
मतलब इसके बच्चे तो होते है 30 या 35 साल के और ये 16 साल के टीनेजर की तरह नासमझ रहकर उनसे डरता सा है जैसे...
और यह फ़िल्म रुकती नही। physical age और मेन्टल age का inverse चलता है इसमें ।

अन्ग्रेजी मे तो नही देखा मैने इसको। इस फिल्म को हिन्दी मे आप यहाँ देख सकते है।

जय हिन्द, जय श्री राम
कुँवर जी।।

लिखिए अपनी भाषा में