सोमवार, 19 अप्रैल 2010

कभी-कभी मै मजबूर हो जाता हूँ सोचने को कि,ऐसा भी हो सकता है क्या?(कविता),

मानवीय संवेदनाये कब-कहाँ क्या रूप धर ले इसे समझना अभी तक काफी मुश्किल रहा है,मेरे लिए तो कम से कम!नहीं मालूम खुद का भी तो औरो को तो क्या ख़ाक जान पाऊंगा मै!फिर भी शब्दों के सहारे कभी खुद को कभी किसी और को समझाने निकल पड़ता हूँ जी!या यूँ कहे कि शब्द खुद ही निकल पड़ते है,तो ज्यादा ठीक रहेगा!आज आपके समक्ष प्रस्तुत है शब्दों का ऐसा ही अनजान सा सफ़र.......

कभी-कभी मै मजबूर हो जाता हूँ सोचने को कि,
ऐसा भी हो सकता है क्या?




.सूरज को दर्पण दिखाऊं ऐसी मेरी औकात नहीं,
घडी भर को नभ पे जो छा जाए बादल,हो जाती रात नहीं,
सुख-दुख जो मिलते है कैसे कहूं ये सब उस ही की सौगात नहीं,
निशा बीते और हो प्रभात नहीं,
ऐसा भी हो सकता है क्या?

मन ही तो है,मनमानी कर गया तो भला क्यों विलाप हुआ,
किसी के लिए मुक्ति तो किसी के लिए अभिशाप हुआ,
संवेदना इतनी भी क्यों जगाई प्रभु,जो सुख में भी संताप हुआ,
बिना तेरी मर्जी के मुझ से ये पाप हुआ,
ऐसा भी हो सकता है क्या?


अतीत को वर्तमान पे लाद पता नहीं क्या पाऊंगा?
अतीत का बोझ यूँ ही क्या मै ताउम्र उठाऊंगा?
ना चाहते हुए भी थक जो गया तो कहाँ जाऊँगा?
मै कुछ भी नहीं कर पाऊंगा,
ऐसा भी हो सकता है क्या?


खूब जिया है ऐसे पलो को हमने भी क्या बताना पड़ेगा,
जिन पलो में मृत थे हम वो वक़्त क्या फिर दोहराना पड़ेगा,
विशवास दिलाने की खातिर क्या घाव भी दिखाना पड़ेगा,
मुझे उसे फिर से बुलाना पड़ेगा?
ऐसा भी हो सकता है क्या?


जय हिंद, जय श्री राम


कुंवर जी,

14 टिप्‍पणियां:

  1. bahut khub

    itni achi kavita par ham bhi majbur ho jate he comments ke liye


    shekar kumawat

    http://kavyawani.blogspot.com/\

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  2. आपके शब्दों का सफ़र संवेदनशील है ... भावनाओं का ख़ज़ाना ...

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  3. itni gahrai kha se laate hai aap, har baar kuch sochne ko majboor ho jaata hu.

    apne bhawo me tajgi banaye rakhne ke kiye badhai!

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  4. @हरकीरत जी

    @समीर जी
    आप सब ने मुझ अज्ञानी कि कविता को भी इतना सम्मान दिया,उसके लिए मै आप सब का आभारी हूँ!

    ऐसा होना तो नहीं चाहिए,पर हो रहा है,क्या करे?क्या कर सकते है?

    कुंवर जी,

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  5. अमित भाई,आपकी दुआ से भावो में ताजगी बनी रहेगी,मुझे ऐसा लग रहा है,बस साथ यूँ ही रहिये!

    संजय जी,गोदियाल जी,अनुराधा जी, आप यहाँ पधारे,इस से ही मै बहुत खुश हूँ!होंसला-अफजाई के लिए शुक्रिया जी,

    शेखर भाई ऐसे ही होंसला बढाते रहना,दिगंबर जी आपका भी धन्यवाद,मुझ पर इतना प्यार बरसाने के लिए!


    कुंवर जी,

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  6. bahut badhiya
    thoda busy hu kunwar ji warna ek bahut acha reply jarur karta
    koi baat nhi
    for the next time

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  7. ब्लॉग बुलेटिन की ५५० वीं बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन की 550 वीं पोस्ट = कमाल है न मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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