सोमवार, 5 अप्रैल 2010

कैसे बताऊँ मै........(कविता),

खेलता हूँ मै भी दुखो से,ये कैसे बताऊँ मै,

जिसको अब तक रहा छिपाता,कैसे जताऊँ मै!

भगवान् जो लिख चुका सो लिख चुका,

अब क्या उसको दोहराऊं मै,

मुझे खुद से जुदा करने वाला वो ही तो था,

अब बिन बुलाएं भला क्यों उसके पास जाऊं मै,

हूँ ही क्या मै उस से अलग हो कर,

फिर क्यूँ खुद को "कुछ" दिखाऊं मै,


कुंवर जी,

6 टिप्‍पणियां:

  1. अब बिन बुलाए भला क्यों उसके पास जाऊं मैं आशावादी संदेश , बेहत्रीन रचना के लिए बधाई

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  2. हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

    बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।


    sanjay bhaskar

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  3. wow !!!!!!!!!!!!!

    bahut khub

    shekhar kumawat

    http://kavyawani.blogspot.com/

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  4. ab bachha sahi direction me ja raha hai.

    khuda ki batein karne laga hai wo bhi pahle ulahna dekar aur baad me usi ko sab kuch bata ke. (Nusrat style ??????)

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