शुक्रवार, 9 अप्रैल 2010

ओ हिन्दू जाग!क्योंकि सभी को जगाना है!...(कविता),

ओ हिन्दू जाग!क्योंकि सभी को जगाना है!
पहले खुद को जान जो सबको बतलाना है!


शिराओ में बहता  खून जैसे पानी हो गया है,
रबड़ और नालियों में बहने का नाम ही जवानी हो गया है,
हुंकार भरने का विचार अब आसमानी हो गया है,
मन की मानना ही बस अब मनमानी हो गया है!
पुराना इतिहास तो कहानी हो गया है,अब नया बनाना है!




जमीर मर गया है या सो रहा है ये सोचना पड़ेगा,
क्या करना है और क्या हो रहा है सोचना पड़ेगा,
सही भी है या नहीं जो हो रहा है सोचना पड़ेगा,
क्या पाने के लिए क्या खो रहा है सोचना पड़ेगा!
कैसे जीना है सोचना पड़ेगा,नहीं तो मर जाना है!


कल नहीं सोचा था तो आज मजबूर है हम,
जो चल पड़े तो भला मंजिल से कब दूर है हम,
पुष्प कि ज्यूँ  कोमल तो यम की तरह क्रूर है हम,
मृत्य के सम्मुख भी सीना तान ले जो वो ही शूर है हम!
खाली दंभ में नहीं चूर है हम,ये भी तो दिखाना है!
















जय हिन्द,जय  श्री राम!



कुंवर जी,

22 टिप्‍पणियां:

  1. ऐसी ही कवि‍ता एक सि‍ख भी लि‍खे, एक मुसलमान भी, एक ईसाई भी और जब sab jaag jayen to maar-kaat macha kar kisi India naame ke desh ko khatm kar dain.... aur dunia me bhi hinsa ko badhawa de

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    1. युद्ध कभी सुखद नहीं होते मगर शांति के लिए अनिवार्य होते हैं

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    2. आप पढ़े लिखे अनपढ़ निकले

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  2. जाग हिन्दू जाग "हरदीप" करे तेरा आह्वान
    जागे बाद बचा हो तुझमे गर "अमित" अभिमान
    तो कर तू दधिची सा दान
    हो हरीशचंद्र सा सत्यवान
    भर हुंकार राणा प्रताप सी
    कर करनी वीर शिवाजी सी
    ना कहना "क्यों ना जगाया", "समय ने भरमाया"
    ना कही साथी आगे बढ जाये,रहें ना कोई हमराया

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  3. अमित भाई:आपके इसी सहयोग और प्रेरणा की मुझे हमेशा जरुरत रहती है!अपनी इस रचना मुझे भी एक कोना देने के लिए मै आपका आभारी हूँ!आह्वान तो समय का ही है जी!
    कुंवर जी,

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  4. हमें हैरानी होती है ये देखकर कि लोगों को हिन्दू शब्द का अर्थ तो पता नहीं और चल पड़ते हैं टिप्पणी लिखने।आन्नद जी पहले ठण्डे दिमाग से हिन्दू का अर्थ समझिए फिर एसे लेखों पर टिप्पणी कीजियगा। इतनी सुन्दर और सामयिक रचना को आपने बुरा कहकर अपनवी सोच का दिवालियापन जाहिर कर दिया

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  5. आनन्द जैसे ब्न्धुओ को वाकै पहले हिन्दु धर्म को सम्झना चाहिये क्यो कि और तो पहले ही जागे हुये है सो तोबस आप जैसा हिन्दु ही रहा है
    वेद व्यथित

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  6. anand ji aapko pahale hindu tiger aur vedvyathit se hindutva ki paribhasha sikhni chahiye au uske baad hi tippani karni chahiye.

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  7. सुन्दर भावाभिव्यक्ति...बेहतरीन प्रस्तुति..बधाई.

    *********************
    "शब्द-शिखर" के एक साथ दो शतक पूरे !!

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  8. इस रचना में बहुत आग हैं . पर ये बहुत प्रासंगिक भी हैं . जैसे कि तुम्हे पता हैं कि हिन्दू मुस्लिम मुद्दे पर तो मैं कुछ बोलूँगा नहीं पर एक पंक्ति जो मुझे सबसे अच्छी लगी वो ये हैं
    " रबड़ और नालियों में बहने का नाम ही अब जवानी हो गया हैं " सच में जवानी अगर ऐसे ना बहती तो हम हिन्दू मुस्लिम झगड़ो में भी ना पड़ते .
    इसका स्पष्टीकरण तुम्हे व्यक्तिगत दूंगा क्योंकि हिन्दू मुस्लिम एक ऐसा षड्यंत्र हैं जो शब्दों से लेकर खून तक में शामिल हो गया हैं . हम ईश्वर /अल्लाह कि लड़ाई खुद करने पर उतारू हो गए हैं . क्या सच में ईश्वर इतना कमजोर हैं जो मिट सकता हैं ,

    वो अगर परम सत्ता हैं तो फिर खुद अपनी रक्षा क्यों नहीं करती

    हरि शरणम् .

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  9. bahut hi joshili aur bhav pravan kavita laga aise jaise kahi kuchh kho gaya tha use aapki kavita ne punah yaad dila diya.

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  10. बहुत सुन्दर भाव औरअभिव्यक्ति के साथ आपने शानदार रूप से प्रप्रस्तुत किया है! बधाई!

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  11. जबरदस्त अभिव्यक्ति .......बेहतरीन रचना के लिए बंधाई .

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  12. आप ऐसी ही रचनाएं सुनाते रहो ...हम जाग ही जायेंगे

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  13. सच में पुराना इतिहास अब कहानी बन चुका है ... वैसे भी रामायण, महाभारत अब एपिक पब गये हैं ... एतिहासिक दस्तावेज़ नही रह गये ...

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  14. उम्मीद है कि हिंदू से आपका मतलब हिदी या हिंदुस्तानी ही होगा । जोश भरने वाली कविता

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  15. मैं कभी यह नहीं समझ पाया कि क्यों लोग हिन्दुओं से घृणा करते हैं !!
    अब Mrs. Asha Joglekar ने कहा…कि हिन्दू का अर्थ हिन्दुस्तानी ही होगा, क्यों अगर हिन्दू धर्म के मानने वाले ही हों तो क्या यह कविता बुरी हो जायेगी या हिन्दू का उत्थान गलत हो जाएगा.
    जब दलित उद्धार के लिए कोई संगठन बने तो उसकी प्रशंसा की जाती है, पर अगर हिन्दू उत्थान की बात की जाय तो वह बात गलत हो जाती है !!
    आनंद जैसे मूर्खों को छोडिये और जय हिंद जय श्री राम का स्वर बुलंद करिए.

    जय हिंद जय श्री राम

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  16. SAHI HE

    जय हिंद जय श्री राम

    NICE

    http://kavyawani.blogspot.com/

    SHEKHAR KUMAWAT

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  17. चूँकि हमारे देश में सभी एक स्वतंत्र देश के नागरिक है सो सभी अपने हिसाब से हिन्दू कि परिभाषा दे सकते है!मेरे हिसाब से मै हिन्दू हूँ!जो कविता मैंने लिखी थी वो सबसे पहले तो मैंने अपने लिए ही लिखी थी!फिर मुझे लगा कि ये सभी को पढनी चाहिए!कुछ गलत होगा तो कोई तो बतायेगा,मै उनका शुक्रगुजार हूँ कि वो यहाँ आये और उन्होंने अपने अमूल्य विचार यहाँ प्रस्तुत किये!

    kunwar ji,

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