@शान्वाज भाई-आपने सही कहा...जिन्होंने समझा वो वैसा का वैसा बता नहीं पाते और जिन्होंने बताया हम उसे वैसा का वैसा आत्मसात नहीं कर पाते,अजीब उलझन है........
no life is not a mess, but we people make it mess by our bad deeds, otherwise life is so good. we should thank our God for the world making soooooooo sweet
जीवन के दलदल में बिना फंसे किनारा नहीं मिलता....पर यह अनुभव बहुत कुछ सोचने सीखने पर विवश करता है....
----------------- मेरी रचना 'अगले जनम' पर जो कहा मैं समझती पर मेरा रोष किसी बच्चे से नहीं...समाज की कटुता से है. क्या लडकियां समर्थ होकर अपना वजूद पा सकी हैं? कुछ आज भी गर्त में , कुछ लीक से हटकर तूफ़ान...आज भी लोग चाहते बेटा .... मैं खुद दो लड़कियों और एक बेटे की माँ हूँ , मैंने कोई अंतर नहीं किया , पर क्या सिर्फ मैं हूँ ?
प्रिय हरदीप भाई , कविता तो धमाल हैं पर तस्वीर तो बिलकुल mind blowing हैं . तुम देखो ये सात घेरे माया के सात आवरण हैं . यही सात घेरे तुम्हारे साथ जी रहे सूक्ष्म शरीर हैं . पांच तत्व ओर मन बूढी को मिलकर सात सूक्ष्म तत्व हैं . अब देखो शरीर में सात चक्र होते हैं . मैंने कितनी बार कहा हैं कि ईश्वर लिखवाता हैं और कुछ अपने आस पास प्रेरणा जैसा माहौल बनता हैं पर फिर वही जा कि रही भावना जैसी वाली बात के आधार पर कोई टिपण्णी करके बड़ाई दे जाता हैं . और कोई पढ़कर टिपण्णी खोलकर लिखता हैं कि आपका स्थूल संदेह दलदल वाला तो समाप्त हो जाता हैं पर फिर एक बड़ा भारी सूक्ष्म संदेह हृदय में छोड़ जाता हैं . क्या कहू , मुझे एक पल में समझ में आया कविता पढ़ कर और देखो ना कवि जान पाया ना पाठक कि माया के दलदल में हरदीप फंसा छटपटाता हैं समझाना चाहता हैं पर देखो सात पंक्ति भी नहीं लिख पाया क्योंकि सातवे के बाद ही माया हट जाती और हरदीप पार हो जाता . सिर्फ सात टिप्पणिया ही वास्तविक थी , बाकि मेरे जैसे सब फर्जी टिप्पणीकार थे -
रहस्य खुलेगा तो कुछ समझ में भी नहीं आएगा ..!!!!!!!!!!!!!!!!१ टाइम पास कर रहा हूँ , गंभीरता से मत लेना !! श्री हरि : !! बापूजी की कृपा आप पर सदा बनी रहे
फिल्म- देशप्रेमी गीत-महाकवि आनन्द बख्शी संगीत- लक्ष्मीकांत- प्यारेलाल नफरत की लाठी तोड़ो लालच का खंजर फेंको जिद के पीछे मत दौड़ो तुम देश के पंछी हो देश प्रेमियों आपस में प्रेम करो देश प्रेमियों देखो ये धरती.... हम सबकी माता है सोचो, आपस में क्या अपना नाता है हम आपस में लड़ बैठे तो देश को कौन संभालेगा कोई बाहर वाला अपने घर से हमें निकालेगा दीवानों होश करो..... मेरे देश प्रेमियों आपस में प्रेम करो
मीठे पानी में ये जहर न तुम घोलो जब भी बोलो, ये सोचके तुम बोलो भर जाता है गहरा घाव, जो बनता है गोली से पर वो घाव नहीं भरता, जो बना हो कड़वी बोली से दो मीठे बोल कहो, मेरे देशप्रेमियों....
तोड़ो दीवारें ये चार दिशाओं की रोको मत राहें, इन मस्त हवाओं की पूरब-पश्चिम- उत्तर- दक्षिण का क्या मतलब है इस माटी से पूछो, क्या भाषा क्या इसका मजहब है फिर मुझसे बात करो ब्लागप्रेमियों... आपस में प्रेम करो
उलझन से भरा जीवन एक तो पहले ही दलदल था, इसपर देश में इतने सारे दल और समाज में इतने दल कि जीवन इन्हीं दल्दल में उलझ कर रह गया है... गागर में सागर दिखती है आपकी कविता!
कैसे न भागे सबकुछ छोड़...
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गोविन्द जो खींचे अपनी ओर
कैसे न भागे सब कुछ छोड़.
न दिखे फिर निशा और न भोर
दिखे तो बस एक कोमल डोर.
कभी शून्य चेतन,कभी भावविभोर
उनसे रिश्ता निभाने चली,बाक...
प्रथम निरामिष शाकाहार पहेली "निरामिष" ब्लॉग पर
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*शाकाहार के सभी पक्षों को वैज्ञानिक, स्वास्थ सम्बन्धी, धार्मिक, मानवीय
विश्लेषण करके तथ्यों के प्रकाश में सामने रखने वाले निरामिष ब्लॉग की
वर्षगांठ पर...
मेरे मन के गाँव में...
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जब भी मुँह ढक लेता हूँ,
तेरे जुल्फों के छाँव में,
कितने गीत उतर आते है ,
मेरे मन के गाँव में ........
एक गीत पलकों पे लिखना ,
एक गीत होंठो पे लिखना ,
यान...
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कैसी शय है यार मोहब्बत, बारिश सूखी लगती है...
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आज सारी दुनिया भुखी है प्यासी है यह नही सोचना कि मैं रोटी की बात कर रहा हुं
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वेदों में गूढ़ विज्ञान-सम्बन्धी सामग्री विस्तृत मात्रा में संचित है।
जिसमें से बहुत ही अल्प मात्रा में अबतक जानकारी हो सकी है,कारण यह है कि
वैज्ञ...
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सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू ।
पल पल मुश्किल होती जिंदगी
आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी
जी जी कर भी क्या हासिल करना हैं
बनू रा...
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