तेरी बेरुखी बेसबब तो ना होगी,
यही सोच कर दिल हल्का हो गया,
इक पल तो रहे इस पल में,
फिर मन अतीत में खो गया,
जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,
कैसे न भागे सबकुछ छोड़...
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गोविन्द जो खींचे अपनी ओर
कैसे न भागे सब कुछ छोड़.
न दिखे फिर निशा और न भोर
दिखे तो बस एक कोमल डोर.
कभी शून्य चेतन,कभी भावविभोर
उनसे रिश्ता निभाने चली,बाक...
6 दिन पहले







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