शुक्रवार, 11 जून 2010

तेरी बेरुखी बेसबब तो ना होगी.....

तेरी बेरुखी बेसबब तो ना होगी,
यही सोच कर दिल हल्का हो गया,
इक पल तो रहे इस पल में,
फिर मन अतीत में खो गया,

जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,

10 टिप्पणियाँ:

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  2. किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।
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  3. दूसरों को समझना आसान नही होता पर आपने समझा ... आपकी रचना अच्छी लगी ....
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  4. अतीत में खोया होगा सबब ढूँढने को... ये मन भी अजीब है. पहले गुस्ताखी करता है और फिर... :)
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  5. तेरी बेरुखी बेसबब तो ना होगी,

    दूसरों को समझना आसान नही होता पर आपने समझा ...
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