गुरुवार, 10 जून 2010

खामोशियों की जुबाँ समझे तो मायने बदल जाते है बातो के.....(कुंवर जी)

खामोशियों की जुबाँ समझे
तो मायने बदल जाते है बातो के,
असमंजस में है कि बातों के मायने बदले
या बात पुरानी रहने दे....

जिस्मानी जुबाँ का अंदाज-ए-बयाँ तो
कुछ और ही अफसाना कह रहा,
अच्छा लगे तो मान ले वरना
अफसानात रूहानी रहने दे,

हौंसले अपने तो पस्त है
हाल-ए-दिल कहने में सुनने में,
ज्यादा परेशानी ना उठा
आँखों को ही सब कहानी कहने दे,

वैसे भी चुप रहना ही भला है
मेरा और तुम्हारा आजकल,
जो फिर कभी मिलने-मिलाने वाली
यें बातें आसमानी रहने दे.....

जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,

15 टिप्‍पणियां:

  1. मौन ही सही हैं हैं जब ज्यादा गहरा सन्देश हो और जिसको भेजना हो वो आपका निकटतम साथी हो .
    वैसे बड़ी बात यही हैं की कविता समझ में आ गयी क्योंकि इस बार उर्दू का "डोज़ " कुछ ज्यादा था इसीलिए ज़ाहिर हैं बन्दे को खासी मशक्कत करनी पड़ी शायर के असल मजमून को समझने के वास्ते . अल्लाह सलामत रखे हरदीप भाई जान !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!11

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  2. बहुत बढ़िया , अंतिम दो छंद ज्यादा अच्छे लगे !

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  3. वैसे भी चुप रहना ही भला है
    मेरा और तुम्हारा आजकल,
    जो फिर कभी मिलने-मिलाने वाली
    यें बातें आसमानी रहने दे.....
    waah kunwar ji waah bahut badhiya....

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  4. वैसे भी चुप रहना ही भला है
    मेरा और तुम्हारा आजकल,
    जो फिर कभी मिलने-मिलाने वाली
    यें बातें आसमानी रहने दे.....
    बहुत खूब्!....

    सलाह:-यदि हो सके तो अपना ब्लाग टैम्पलेट बदल लें..

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  5. @पण्डित जी-राम राम जी,सम्भवतः इस टेम्पलेट में ब्लॉग देरी से खुलता हो....पहले भी इसकी सूचनाये मुझे मिलती रही है और मै लगाए गजेट्स हटाता भी रहा हूँ!सलाह के लिए धन्यवाद है जी....अभी बदल रहा हूँ....

    कुंवर जी,

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  6. वैसे भी चुप रहना ही भला है
    मेरा और तुम्हारा आजकल,
    जो फिर कभी मिलने-मिलाने वाली
    यें बातें आसमानी रहने दे.....

    इन पन्क्त्यिओन ने दिल को छू लिया.... ग़ज़ब की शानदार पोस्ट....

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  7. हौंसले अपने तो पस्त है
    हाल-ए-दिल कहने में सुनने में,
    ज्यादा परेशानी ना उठा
    आँखों को ही सब कहानी कहने दे..
    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ! लाजवाब और भावपूर्ण रचना लिखा है आपने जो प्रशंग्सनीय है! बधाई!

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  8. काफी सुन्दर शब्दों का प्रयोग किया है आपने अपनी कविताओ में सुन्दर अति सुन्दर

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  9. भावो को समझने के लिए आप सब का आभार है जी...

    कुंवर जी,

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  10. आभार इस कविता को प्रस्तुत करने का..अच्छी पोस्ट!

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