खामोशियों की जुबाँ समझे
तो मायने बदल जाते है बातो के,
असमंजस में है कि बातों के मायने बदले
या बात पुरानी रहने दे....
जिस्मानी जुबाँ का अंदाज-ए-बयाँ तो
कुछ और ही अफसाना कह रहा,
अच्छा लगे तो मान ले वरना
अफसानात रूहानी रहने दे,
हौंसले अपने तो पस्त है
हाल-ए-दिल कहने में सुनने में,
ज्यादा परेशानी ना उठा
आँखों को ही सब कहानी कहने दे,
मेरा और तुम्हारा आजकल,
जो फिर कभी मिलने-मिलाने वाली
यें बातें आसमानी रहने दे.....
जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,







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