उसका भी है
कुछ कहने का मन!
कुछ कहने का मन!
अभी चल रही थी
तैयारी उसके आने की,
अभी विचारो में तुम्हारे
पनप रहा है उसका दमन,
तब नहीं सोचा था
अब सोच रहे हो...
तब के अवसर को समस्या जान,
अब हल खोज रहे हो!
स्वयं तैयार किया हुआ चमन!
और तुमने कर लिया अपने मन का,
जब भी किया था,
अब भी कर लिया अपने मन का,
तुम पर शायद कोई असर नहीं पड़ा
इस दमन का,
निष्फल रहा तुम पर प्रहार
उस मौन क्रंदन का...
देख नहीं पाये तुम वो आंसू
जो बहा नहीं,
सुन नहीं पाये वो विलाप
जो किसी ने खुल कर कहा नहीं...
वह जो आया भी नहीं था..
वह भी सह गया..
अब तो बस करो...
मानव से कह गया...
जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,








24 टिप्पणियाँ: