बुधवार, 31 मार्च 2010

करनाल कोर्ट का एक एतिहासिक फैसला (एक विचार....)(वयंग्य),

कल करनाल कोर्ट में एक एतिहासिक फैसला सुनाया गया!खबर के लिए लिंक दे दिया गया है!पाँच अभियुक्तों को फांसी कि सजा एक साथ सुनाया जाना अपने आप में एक मिसाल है!कहाँ तो भारत में फांसी कि सजा को ही ख़त्म करने पर विचार चल रहा है और कहा  एक साथ पाँच-पाँच को फांसी कि सजा! चूँकि निर्णय माननीय कोर्ट से आया है तो उस पर कोई टिप्पणी करने का मेरा कोई इरादा नहीं है फिलहाल!

ये जाहिर सी बात है कि खाप पंचायतो के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए ये निर्णय शुरुआत मानी जायेगी भविष्य में!

और हाँ! यहाँ ये भी काबिल-ए-तारीफ़ और गौर की बात है कि ये निर्णय एक महिला जज ने सुनाया है!वर्तमान सरकार में महिलाओं का योगदान उल्लेखनीय है!उल्लेख करने के कारण सभी अलग-अलग बता सकते है,पर उल्लेखनीय जरुर है!
अब सवाल ये उठता है कि जो सजा माननीय कोर्ट ने सुना दी है उस पर अमल कब तक हो पायेगा,हो पायेगा या नहीं भी हो पाए?
अनायास ही "सम्माननीय अजमल जी"(भई अतिथि है हमारे) का चेहरा उभर आया स्मृतिपटल पर!वो तो अपने कसाब जी भोले-भाले,नाहक ही कानूनी पचड़ो में फस गए बेचारे,थोडा ठन्डे दिमाग से काम लेते तो कब के राष्ट्रीय अतिथि सार्वजनिक रूप से घोषित हो चुके होते!
मै समझता हूँ कि उन पाँचो को तो सजा मिल जानी चाहिए,मिल भी जायेगी शायद!क्योंकि उनके पास अजमल और कसाब जैसी किस्मत नहीं है!मानवाधिकार वाले तो वैसे ही हिन्दुओ के खिलाफ हुए फैसले में मौन रहते है!उन्हें बस कुछ ख़ास वर्ग ही पीड़ित दिखाई देता है(चाहे वो हो या ना हो)!


उन पाँचो के पास तो अपने पड़ोसियों का समर्थन और सहयोग  नहीं होगा,पडोसी देश कि बात बहुत दूर है!कोई नेता टाइप के लोग भी क्यों उनके पचड़े में पड़े! यार,कोई राजनैतिक लाभ भी तो नहीं दीखता!ना कोई वोट बैंक उन पर आधारित है,ना ही कोई किसी वर्ग के मुखिया है वो!जानता ही कौन है उनको?बस इतना ही कि घर कि लड़ाई में हत्या हो गयी इनसे और फांसी कि सजा मिली है,ओह सॉरी! बुली है!जब मिलेगी तब भी थोडा हिट हो जायेंगे,तभी बोलना ज्यादा हितकर होगा!तो उनको तो सजा मिल ही जायेगी,मिल जानी भी चाहिए!और फिर है भी लड़की वाले वो तो!सब उन्ही को तो सहना पड़ता है सदा!



मै बस ये कहना चाह रहा हूँ कि जब उनको दोषी करार दिया जा चुका है और सजा घोषित हो चुकी है तो सजा मिलनी भी चाहिए!सजा तो हर उस अपराधी को मिल जानी चहिये जो सजा पाकर भी निश्चिन्त ही मजे से जी रहा है!मस्त खा-पी रहा है!कारण चाहे जो भी हो,वो तो एक तरह से न्यायालय के निर्णय  की खिल्ली सी उड़ा रहा है,लो दे लो सजा,मै तो अब भी खुश हूँ और मजे में हूँ!

वास्तविक खबर के लिए नीचे क्लिक करें,विस्तार से पढने को मिलेगा!
http://www.khaskhabar.com/murder-of-love-couple5people-hang-till-death-03201031796046291.html





अन्त में इतना ही कि खाप पंचायतो को स्वयं को देश के क़ानून से ऊपर समझने कि भूल छोडनी चाहिए!वो तो प्रशाशन को भी सुनिश्चित करना चाहिए कि इस समस्या का सर्वसम्मति से कोई शान्तिपूर्ण हल निकाले!बहरहाल करनाल  में एक एतेहासिक शुरुआत हुई है,आशा करते है कि भविष्य में इस फैसले को समय समय पर याद  किये जाता रहेगा!

जय हिंद,जय श्री राम!
कुंवर जी,

13 टिप्‍पणियां:

  1. ये ऐतिहासिक फैसला बस इतिहास ही ना बन जाये...ऐसे अपराधियों को दंड ज़रूर मिलना चाहिए...आज भी लोग अपने ही बच्चों पर जाति गोत्र के नाम पर अत्याचार करते हैं...यहाँ तक कि हत्या भी...पंचायत के फैसले क़ानून के अंतर्गत होने चाहिए....अच्छा आलेख ..

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  2. लेख के अंत में आपका खुद का निष्कर्ष ही सारी बात कह डालता है !

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  4. लेखक की संवेदना गहरी मानवीय संवेदना हैं . aap ने इस पोस्ट में सही विश्लेषण किया जिसमे मुझे कहना पड़ा
    " समर्थ को नहीं दोष गोसाई :

    i have added some contents in my blog related to it. first i had done comment then the comment was very long . So i forced to make a blog post.

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  5. सबसे पहली बात तो ये कि फ़ांसी की सजा का प्रावधान सिर्फ़ rarest of the rare जैसे मुकदमों में ही होता है , रही बात उस सजा के अमलीकरण में होने वाली देरी या फ़ांसी की सजा से जुडी आपकी इसी बात के लिए अब्दुल कलाम जी ने बहुत पहले अपने मन की बात भी सार्वजनिक की थी ..हां इन खाप पंचायतों पर अब अंकुश लगाई जानी चाहिए
    अजय कुमार झा

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  6. मैं आप सब सचे देश भक्तो से ये ही कहुगा की इन सब को फासी मिलनी ही चाहिए थी क्यों की इन्होने गलती की है ऐसे बचो को जन्म दे कर जो हमारे सामज,हमारे धर्म को,इतनी उचाईयो पर ले कर गए है और मैं आप सब की इस बात से भी सहमत हु की कसाब को फासी ना हो क्यों की वो थी तो हमारे हितेषी है जो हमारे लिए इतना नेक काम करता है हमे अहसास करता है की हम कितने खुले दिल के है जो उसे रहने को घर दिया उसका ध्यान रकने के लिए पुलिस दी और फ्री की शोहरत दी फ्री का खाना दिया वो भी उसके मन माफिक मैं आप सब का शुकर गुजार हु...

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  8. भई कुंवर जी
    अगर कोई टाबर गलती कर ज्या
    तो मामला लोग अपणे बिरादरी की इज्जत तैं जोड़ लें सैं।
    इन्ने कोई दुसरा रस्ता लिकाड़ना चाहिए,
    पण मामला तो संगीन था इसका खाप पंचायत समझदारी से निर्णय कर सकै थी। जड़े मेरे मटे सारे ही सरपंच हो ज्यांगे तो फ़ेर उसका रिजल्ट इस तरियां का ही आवैगा।
    अदालत जो करेगी न्याय ही करेगी

    राम राम

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  9. आपका विचार सराहनीय है,कसाब के मामले में इतना कहूँगा की कुछ मजबूरियां होगी हिंदुस्तान की सर्कार की ...

    विकास पाण्डेय
    www.vicharokadarpan.blogspot.com

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  10. हमे दर्द है आराम के साथ !
    जरुरी पोस्ट के लिए बधाई !

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  11. आप सभी का स्वागत है जी!आप सभी सज्जनों ने मुझे अपने अमूल्य विचारों से अवगत करवाया उसके लिए मै आपका आभारी हूँ!इस उत्साहवर्धन के लिए आप सभी का हार्दिक धन्यवाद!
    कुंवर जी,

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