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हाल चाल ठीक ठाक है.........(एक और गीत)
पता नहीं कैसे पुरानी फिल्मो में आज के हिसाब के गीत लिखे जाते थे!आज फिर एक गीत आपके समक्ष परस्तुत कर रहा हूँ!है तो काफी पुराना पर गुलज़ार साहब का लिखा,किशोर दा और मुकेश जी का गाया ये गीत आज भी एकदम ताज़ा सा महसूस होता है!
'मेरे अपने' फिल्म का ये गीत आपके लिए,,,,,
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हाल चाल ठीक ठाक है , सब कुछ ठीक ठाक है
काम नही है वरना यहाँ आप की दूआ इस सब ठीक ठाक है
आब \-ओ \-हवा देश की बहुत साफ़ है
कायदा है , कानून है , इनसाफ है
अल्लाह मियाँ जाने कोई जिए या मरे
आदमी को खून वून सब माफ़ है
और क्या कहूँ , छोटी मोटी चोरी
रिश्वत खोरी देती है अपना गुज़ारा यहाँ
आप की दुआ से बाक़ी ठीक ठाक है
गोल मोल रोटी का पहिया चला \- 2
पीछे पीछे चांदी का रुपैया चला
रोटी को बेचारी को चील ले गयी (ओह तेरी )
चांदी ले के मुंह काला कौवा चला
और क्या कहूँ , मौत का तमाशा
चला है बेतहाशा ,
जीने की फुरसत नहीं है यहाँ
आप की दुआ से बाक़ी ठीक ठाक है ##(वैरी गुड )##
u -tube पर देखने के लिए यहाँ क्लिक करें..
http://www.youtube.com/watch?v=NykVp7qG_Ss&feature=player_embedded
कुंवर जी,
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