मंगलवार, 2 मार्च 2010

एक और गीत.....धंधे की कुछ बात करो कुछ पैसे जोड़ो(नवरंग)


नवरंग फिल्म का नाम तो आपने सुना ही होगा!मेरी पसंदीदा फिल्मो में से एक ये भी है!
इसका संगीत कालजयी है!
हर एक गीत अपने आप में एक मिसाल है सर्वश्रेष्ठ लेखन-संगीत और गायकी का!
होली के आस-पास दूरदर्शन और आकाशवाणी पर इसका गीत ना आये तो होली भी झूठी सी जान पड़ती है!
लेकिन मै जो गीत आज आपके समक्ष प्रस्तुत करने जा रहा हूँ वो 'तू है नार नखरेदार..." नहीं है!
जब ये गीत देखा-सुना था तब हम स्कूल में पढ़ते थे!गीत की प्रस्तुती ही पहला कारण बनी थी इसके अच्छा लगने का!
तब नहीं पता था के इसकी एक-एक पंक्ति कभी हम पर एक दम सही बैठेगी!
पढ़िए "नवरंग" में से एक रंग...... 
 
 
कवी राजा अब  कविता  के  ना  कान  मरोड़ो, 
धंधे  की  कुछ  बात  करो  कुछ  पैसे  जोड़ो, 
 
शेर-शायरी  कवी   रजा  ना  काम  आएगी, 
कविता  की  पोथी  को  दीमक  खा  जाएगी, 
भाव  चढ़  रहे  अनाज  महँगा  हो  रहा  दिन-दिन, 
भूखे  मरोगे  रात  कटेगी  तारे  गिन-गिन; 
इसीलिए  यह  कहता  हूँ  यह  सब  छोड़ो, 
धंधे  की  कुछ  बात  करो  कुछ  पैसे  जोड़ो! 
 
अरे  छोड़ो  कलम  मत  चलो  कविता  की  चाकी, 
घर  की  रोकड़  देखो  कितने  पैसे  बाकी, 
अरे  कितना  घर  में  घी  है  कितना  गरम  मसाला, 
कितने  पापड़  मोंग्बड़ी  मिर्च  मसाला; 
कितना  तेल-नून-मिर्च  हल्दी  और  धनिया, 
कवी  रजा  चुपके  से  तुम  बन  जाओ  बनिया, 
 
अरे  पैसे  पे  रचो  काव्य  भूख  पर  गीत  बनाओ, 
अरे  गेहूं  पर हो  ग़जल  धान  के  शेर  सुनाओ, 
नून  मिर्च  पर  चोपाई  चावल  पर  हो  दोहे, 
सुगल  कोयले  पर  कविता  लिखो  तो  सोहे; 
कम  भाड़े  की   खोली  पर  लिखो  कव्वाली, 
जन  जन  करती  कहो  रुबाई  पैसे  वाली! 
 
सब्दो  का  जंजाल  बड़ा  लफड़ा  होता  है,
कवी  सम्मलेन  दोस्त  बड़ा  झगडा  होता  है, 
मुशायेरे  के  शेरो  पर  रगडा  होता, 
पैसे  वाला  शेर  बड़ा  तगड़ा  होता  है, 
इसीलिए  कहता  हूँ  ना  इससे  सर  फोड़ो, 
धंधे  की  कुछ  बात  करो  कुछ  पैसे  जोड़ो, 
धंधे की कुछ बात करो कुछ पैसे जोड़ो.........
 
कुंवर जी, 



5 टिप्‍पणियां:

  1. Waah ji ...to apaki aur hamari pasand ek nikali bahut bahut dhanywaad ise padane ke liye itana pahale likhi ye kavita magar aaj bhi mahatva jas ka tas hai! Navrang film ki tarif to jitani kare kam hai...punh dhanywaad!!
    http://kavyamanjusha.blogspot.com/

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  2. भाई मैंने ये फिल्म देखी तो नहीं है लेकिन लगता है कि अब देखना पड़ेगा ।

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  4. धन्यवाद रानी जी आपका भी!और मिथिलेश भाई आप ये देख ही ले अब तो....

    धन्यवाद इधर नज़र-ए-करम के लिए...
    कुंवर जी,

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  5. yar ye film maine 1997 me doordarshan par dekhi thi or tab se is film ko hi life me jee raha hun .

    pata nahi ab aisi film kyu nahi banti

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