सोमवार, 29 मार्च 2010

समंदर भी बह जाता होगा ये तो ना सोचा था....(कविता)

समंदर भी बह जाता होगा ये तो ना सोचा था,
नदियों ने देखा तो रो पड़ी,
पहाड़ का बिखरना कोई आम बात नहीं,
रेत के टीलों को हैरानी तो होगी ही,
आसमान को सहारा तलाशते तो ना देखा था,
हवाओं ने देखा तो घबरा गयीं!
हवा बेखबर,रेत के टीले अनजान और नदियाँ बेचारी मासूम,
वो क्या जाने समंदर भी बहना चाहता है कभी,
पहाड़ कि बिखरने कि तमन्ना बे बुनियाद नहीं,
आसमान अकेला कब तक देखे सभी को सहारे मिलते हुए!
मगर वो जानते भी है कि उनको ऐसी कोई जरुरत नहीं,
ऐसे रहना उनकी कोई मजबूरी भी नहीं,


फिर भी.....

समंदर बहना  चाह  रहा  है,
बिखरना चाहता है पहाड़,
आसमान झुक गया है सहारे की खोज में!
और!
नदियाँ व्याकुल बही जा रही है
समंदर की और
उसे समझाने!
कही वो बह ना जाए!
रेट के टीले स्तब्ध है,
नहीं पता उन्हें वो क्या करे?
पहाड़ को बिखरने से रोकने के लिए!
हवा तो घबराई सी भटक रही है,
जिधर आसमान झुकता दिखाई दिखा,
दौड़ ली,
उसे सहारा देने......
कुंवर जी,

17 टिप्‍पणियां:

  1. किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

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  2. आज तो "वाह" भी "आह" का एहसास करा रही है जी!
    फिर भी शुक्रिया......

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  3. ...बेहतरीन अभिव्यक्ति,प्रसंशनीय!!!

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  4. Pehli baar padha hai aapko!
    Rachna pasand aayee!
    Yaar, lagta hai peer ka samundar samet ke rakha bheetar! Baha do.....

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  5. सादर वन्दे!
    विशालता भी एक प्रकार का बंधन है, और उन्मुक्त होना सबका गुण और यही कारण सबको अपनी सीमाएं तोड़ने को बाध्य करता है.
    अच्छी कविता
    रत्नेश त्रिपाठी

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  6. बहुत बढ़िया कुंवर जी .....आपने तो कल्पनाओ और वास्तिवकता को बहुत अच्छे से शब्दों का रूप दे दिया ,

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  7. बहुते ही बढ़िया लिख दिया ये तो रे

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  8. समुंदर तुझको बताने आया था या फिर हवा ने आहिस्ता से कानो में कहा था ये सब .

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  9. वैसे कुछ भी हो अच्छा लिखा हैं.
    जारी रख

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  10. बहुत ख़ूबसूरत भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने शानदार रचना लिखा है जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!

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  11. thanks hardeep ,
    due to personal reasons i cant comment much. rest of things my poem and its reply will be able to clear you .

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  12. जय श्री कृष्ण..आपको बधाई ....आपने बेहद खुबसूरत कवितायेँ लिखी हैं....मन को छू देने वाली....सरल और सहज.....हांजी हमने बधाई देने में बहुत देर कर दी...और आपका आभार...बस इसी प्रकार अपनी दुआएं साथ रखियेगा.....हम और ज्यादा अच्छा और दिल से लिखने का प्रयास करते रहेंगे....!!!!
    ---डिम्पल

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  13. देर आया हूँ, पर बहुत कुछ पाया हूँ।

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  14. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  15. bhai saab

    main to kuch bolne layak bahca hi nahi.

    sahi bol raha tha tu, gazab likha hai

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