जमाल भाई साहब,जमाल भाई साहब,
है बड़े कमाल भाई साहब!
ब्लोगवाणी पर हर पोस्ट उनकी
कर जाती है धमाल भाई साहब!
तर्क भी कुतर्क भी,
वो देते है बेमिसाल भाई साहब!
अधूरा ज्ञान खतरा-ए जान
की है वो मिसाल भाई साहब!
ऊँची दूकान पर नहीं वो फीका पकवान
ज्ञान का है एक जंजाल भाई साहब!
उचित-अनुचित की कौन सोचे
जब हो "पाठक-गिनती" का सवाल भाई साहब!
सच-झूठ,इज्ज़त-बेईज्ज़ती का यहाँ
भला कौन करे ख्याल भाई साहब!
विचारों की दुकान खोल बैठ गए
मुझ जैसे विचारों से कंगाल भाई भाई साहब!
हरदीप मुरख के चक्करों में क्या पड़ना
अपनी-अपनी मस्ती में रहो खुशहाल भाई साहब!
ब्लॉग्गिंग के नए भगवान्
oh sorry !खुदा..
है जमाल भाई साहब!
किसी की भावनाओ को ठेस पहुंचाना मेरा मकसद नहीं,,,
मै सोचता हूँ के विशुद्ध मनोरंजन किया जाए!
अब कोई मुझ से ये पूछे कि मनोरंजन की चीज से मनोरंजन ना करे तो क्या करेंगे?
तो इसका जवाब तो मेरे पास है नहीं साहब!
और हाँ मुझ अज्ञानी से ये पूछ कर कुछ भी
हासिल नहीं होने वाला के जब खुदा मेहरबान हो तो कैसे "गधा भी पहलवान" हो जाता है?
कुंवर जी,






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