कल ही महिला आरक्षण बिल पारित हुआ और आज मेरे पास ये सन्देश कई बार कई लोगो ने भेजा!
मुझे लगा आपको भी ये बताना चाहिए...
let,s celebrate men,s day...
बेचारा मर्द.....
अगर औरत पर हाथ उठाए तो ज़ालिम,
अगर पिट जाए तो बुजदिल,
औरत को किसी और के साथ देख कर लड़ाई करे तो
जलता है,
चुप रहे तो बेगैरत.
घर से बहार रहे तो आवारा और
घर में रहे तो नाकारा,
बच्चो को डांटे तो ज़ालिम,
ना डांटे तो लापरवाह,
औरत को सर्विस से रोके तो
शक्की-मिजाज़,
ना रोके तो औरत की कमाई खाने वाला,
आखिर नादाँ मर्द जाए तो जाए कहाँ...?
जनहित में जारी...
नारी है अत्याचारी!
मुझे इसके वास्तविक रचनाकार का नहीं पता!पर जिसने भी इसकी रचना की है उसने अपना पूरा अनुभव पूरी इमानदारी से उड़ेल दिया है!
कुंवर जी,
कैसे न भागे सबकुछ छोड़...
-
गोविन्द जो खींचे अपनी ओर
कैसे न भागे सब कुछ छोड़.
न दिखे फिर निशा और न भोर
दिखे तो बस एक कोमल डोर.
कभी शून्य चेतन,कभी भावविभोर
उनसे रिश्ता निभाने चली,बाक...
6 दिन पहले






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