रातो में,
बातो में,
कभी खयालो में
कभी हालातो में,
कभी जोश में
कभी जज्बातों में,
किसी से बिछुड़ने पर
किसी की मुलाकातों में,
मौत के हमले में,
कभी जिंदगी की घातों में,
बोझ होते रिश्तों में
कहीं नए जुड़ते नातों में
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कमी अपनों की खलती ही है!
जय हिन्द जय श्रीराम,
कुंवर जी,







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