बुधवार, 12 मई 2010

भाई जान;क्षमा करना,मै तो बस आपसे बात करना चाहता था और आपने तो अपने पूरे समाज की जिम्मेवारी अपने सर पर ले ली!और उसी समाज ने आपको अकेला छोड़ दिया!लेकिन मै आपके साथ हूँ-कुंवर जी,

वैसे मै ऐसे मुद्दों को एक दिन से ज्यादा घसीटने में विश्वाश नहीं रखता!लेकिन भाई जान इस से महीने भर से चिपटे हुए है तो क्या मै दो दिन भी नहीं खेल सकता !

सलीम भाई जान;क्षमा करना,मै तो बस आपसे बात करना चाहता था और आपने तो अपने पूरे समाज की जिम्मेवारी अपने सर पर ले ली!और उसी समाज ने आपको अकेला छोड़ दिया!लेकिन मै आपके साथ हूँ!इसके लिए मुझे अपने कई भाइयो की नाराजगी भी जायज लग रही है!
पर सवाल तो ये है कि आपके समाज से क्यों कोई आपके साथ नहीं आया!सभी ने आपको अकेला छोड़ दिया!आप तो हर बार उनकी कही हर बात(गलत या ठीक ये मायने नहीं रखता) का खुला समर्थन करते थे!फिर क्यों कोई नहीं आया आपके लिए दो बोल भी लिखने!मुझे लगता है कोई भौतिक मज़बूरी रही होगी उनकी!या बात कुछ और है.....?

मैआपकी इस भावना कि "इस्लाम में पुनर्जन्म सम्भव नहीं" का पूरा सम्मान करने लगा हूँ!
पर ये नादाँ पता नहीं कौन है जो ये

"وَرَبُّكَ الْغَنِيُّ ذُو الرَّحْمَةِ إِن يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ وَيَسْتَخْلِفْ مِن بَعْدِكُم مَّا يَشَاء كَمَآ أَنشَأَكُم مِّن ذُرِّيَّةِ قَوْمٍ آخَرِينَ 133 إِنَّ مَا تُوعَدُونَ لآتٍ وَمَا أَنتُم بِمُعْجِزِينَ 134

अनुवाद:
और तुम्हारा अल्लाह बेनियाज़ और रहमत वाला है। (इसलिये उसे ज़ुल्म करने की कोई ज़रूरत नही है) अगर वह चाहे तो तुम सबको मार कर तुम्हारी जगह जिसको चाहे पैदा कर सकता है, उसी तरह से जिस तरह से उसने तुम्हे एक दूसरी क़ौम से पैदा किया था।"

लिख रहा है!भाई इसको समझाओ आप,मुझे तो ज्यादा जानकारी नहीं है इस बारे में!
मैंने इसे यहाँ  पढ़ा.....

और ये अनजान राणा साहब क्या कह रहे है......
"भाई जान मे आप लोगो के इस झगडे मे नही पड़ने वाला, पर एक बात जो मेरे जहाँ मे आ रही हैं वो आपसे जरुर कहना चाहूँगा, और कुंवर जी से निवेदन हैं की वो ऐसी व्यवस्था करे की उनका जवाब मेरे तक भी पहुँच जाए

"भाई जान चलो ठीक हैं आप लोग पुनर्जनम मे विश्वाश नही रखते हो तो मेरे एक शक का समाधान जरुर कर दो


आपने कुछ ऐसा कहा हैं=-" की जो जहा जनम लेकर वही पे दबा दिया जाता हैं तो कयामत के दिन उसको वही से सीधे उठाया जाता हैं तो मुसलमान जयादा रास्ट्रवादी हुआ क्योंकि वो अपने देश मे ही दुबारा जनम लेता हैं मतलब था ये आपका
1. - तो भाई जान इसमें रास्ट्रवादी वाली कौन सी बात हुई . पहले तो आप ये बताइए की क्या एक मुसलमान जो इस देश मे आतंकवादी हैं तो मरने के बाद तो वो भी आतंकवादी ही बनेगा इसी देश मे, इसकी क्या गारंटी हैं की वो देशभक्त ही बनेगा. और अगर वो आतंकवादी ही बनता है तो "तो क्या पाकिस्तान और अफगानिस्तान का आज ये हश्र इसी कारण से हैं "
2.- और एक बात अगर जो दबा हैं वो कयामत के दिन वही से उठा लिया जायेगा तो फिर ये मुस्लिम आबादी कैसे बढ़ रही हैं क्योंकि आप तो ऐसा मानते हो की जो दबा हैं वो ही उठेगा, तो बाकी लोग कहा से आये ?
और एक बात आप सब से आपको मनुष्य जनम मिला हैं उसे ऐसे धार्मिक झगडो मे जिनका कोई और हैं ना कोई छोर हैं मे मत गवावो.
किसीके भी धरम से अच्छी बातें उठाओ सिरफ .
मेरे अपने मन मे ये सवाल आये हैं और ये किसी के धरम को नीचा दिखाने या अपने धरम का प्रचार करने के लिए नही हैं .
मे तो ये सिर्फ अपने मन मे आये चंद सवालों को संतुस्ट करने के लिए पूछ रहा हूँ
सलीम भाईजान से आग्रह हैं की अगर वो जवाब न देना चाहे तो कोई बात नही मगर अगर वो जवाब दे देते हैं तो मुझे अपने मुस्लिम भाइयो के धरम को समझने मे और मदद मिल जायेगी .
- संजीव राणा
हिन्दुस्तानी"


राणा जी ने यहाँ कही अपनी बात 

चलो मेरी ना सही इनकी सद्भावना की कद्र कर के ही कोई इन्हें संतुष्ट कर दे!

जय हिंद,जय श्रीराम,
कुंवर जी,

9 टिप्‍पणियां:

  1. wo to pagal ho gaya hai,aap kyon apna time kharaab kar rahe ho?

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  2. @बेनामी जी-बस वैसे ही!हालांकि इसका किसी भी धर्म से कोई सम्बन्ध नहीं है!बस मै और भाई जान!दोनों के एहम!

    @धर्मेन्द्र जी-आपका स्वागत है जी!हम भी ऐसे ही मुसुक्र भर रहे थे अभी तक!



    @और जो पोस्ट से हट कर टिप्पणी कर रहे है कृप्या वो साफ़ भाषा और विचारों का प्रयोग करे!

    कुंवर जी,

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  3. kunvar ji
    aap ki baten tarkik hai ..ye log dharmik nahi dharmandh hai isliye inhe acchaii buraai ka fark nahi pata chalta
    insan ka netik farj ye hi banta hai ki dharm se upar uthkar insaniyat ki baat karen jo sahi h vo sahi h or jo galat h vo galat h ..chahe vo kisi bhi dharm ya sampraday se juDii hui ho

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  4. आपका ब्लाग अच्छा है...

    _______________
    पाखी की दुनिया में 'मुंडा पहाड़ बीच पर मस्ती'

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  5. @संजय जी,नीर जी-आपका सहयोग मिला,मुझे बहुत अच्छा लगा!लेकिन मै इस बात को अब ख़त्म ही मान रहा हूँ!

    @अक्षिता जी-ब्लॉग तो आपका बहुत प्यारा है!

    कुंवर जी,

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  6. सलीम की कोई प्रतिक्रिया का न आना,आपकी पोस्ट की सफलता दर्शाता है। बधाई!!!

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