बुधवार, 5 मई 2010

अरे उनको देखने के लिए मेरी बहन ही मिली है क्या आज,और भी तो बहुत सी लडकिया है बाज़ार में, (वयंग्य)




कितने बेशर्म है सब,
पागलो की तरह देखते ही जाते है,
कुछ तो कुटिल तरीके से मुस्कुरा भी रहे है,
जैसे जाहिल हो,
अरे उनको देखने के लिए 
मेरी बहन ही मिली है क्या आज,
और भी तो बहुत सी लडकिया है बाज़ार में,

और ये मै क्यूँ गलती महसूस कर रहा हूँ,
आज तो मै किसी और लड़की को भी नहीं देख रहा,
ना नजरो ही नजरो में बहुत कुछ करना चाह रहा हूँ,
रोज की तरह,
उफ़!मेरी आज मेरे बहन साथ है तो क्या,
मुझे वो सब गलत लग रहा है 
जो कल तक ठीक ही नहीं,
अधिकार लगता था लडको का?
ये आज से पहले क्यूँ नहीं आया मेरे विचार में.....

जय हिंद,जय श्रीराम,
कुंवर जी,

19 टिप्‍पणियां:

  1. कुंवर जी
    धन्यवाद ab sab ठीक हैं
    आपने ठीक कहा आज जहा भी देखो घूरती हुई नजरे ही दिखाई देती हैं.

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  2. फिर से प्रशंसनीय रचना - बधाई

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  3. हर आदमी की फितरत यही है, कभी अपनी गलती नहीं मानता है
    बीती खुदपे तो कसमसाते है लोग,जिसका बाप मरता है वही रोता है :>))

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  4. महान पोस्ट
    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारें और मुझे कृतार्थ करें

    इस्लाम का नजारा देखें

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  5. दृष्टिदोष

    इलाज एम एम गु्प्ता अस्पताल
    आदर्श महिला महाविद्यालय के सामणै
    भिवाणी मै करवाणा पड़ैगा।:)

    राम राम

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  6. सही कहा, कलुष तो स्वयं के भीतर ही होता है।

    बुरा जो देखन मैं चला बुरा ना मिलया कोय।
    जो दिल खोजा आपना मुझसा बुरा ना कोय॥

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  7. जबरदस्त पोस्ट , सच में यही तो बन्दों को अकल आती हैं कि मैं कितना गलत हूँ जो दोहरे मानदंड रखता हूँ . और यही से व्यक्ति परिपक्वता कि तरफ बढ़ता हैं . नहीं तो बस लगता हैं कि मेरा खून तो खून हैं पर औरो का खून पानी .

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  8. @रश्मि जी,@फिरदौस जी- ये सच तो है पर बहुत घिनौना सच है!लोग ऐसा तब ही सोचते है जब वो खुद भुगतते है!

    @शेखर जी,@मनोज जी-आपको अच्छा लगा,धन्यवाद है जी!

    कुंवर जी,

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  9. @शर्मा जी-@सर जी


    -जिनके लिए या जिनके कारण लिखा गया है वो शायद इसे पढेंगे भी नहीं और जो पढ़ रहे है वो ऐसा कुछ करते नहीं!मेरी तो कुछ समझ में नहीं आता जी!

    @प्रतीक जी-आपका स्वागत है जी,

    @अवधिया जी-आपका भी स्वागत है जी,आप बिलकुल सही कह रहे हो जी,

    @शेखर जी,@मनोज जी-आपको अच्छा लगा,धन्यवाद है जी!

    कुंवर जी,

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  10. @गोदियाल जी आपके सहयोग के लिए मै आभारी हूँ जी,

    @अमित भाई साहब-आपकी लेखनी हर बार कत्लेआम मचाती है जी,

    @संजय भाई साहब,@राणा साहब और @पूजा जी-आपका सभी का हार्दिक धन्यवाद है जी!



    आप सब यूँ ही प्यार बरसाते रहना जी,हम यूँ ही भीगते रहेंगे ताउम्र.....

    कुंवर जी,

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  11. आपकी अभिव्यक्तियाँ लाजवाब हैं.

    'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर हम प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती रचनाओं को प्रस्तुत कर रहे हैं. आपकी रचनाओं का भी हमें इंतजार है. hindi.literature@yahoo.com

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  12. सच है ... जब अपने पर बीतती है तो पता चलता है ...

    उत्तर देंहटाएं

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