मंगलवार, 11 मई 2010

ब्लॉग-जगत की शान,आतंकवादी भाई जान,सलीम खान से एक छोटा सवाल अपना भी!पता नहीं वो बताएँगे या नहीं!मर्जी है उनकी आखिर नियत है उनकी!-कुंवर जी,

मै पिछले कई दिनों से अपने आप को इस विषय से बचाए हुए था!पर मन चंचल आखिर चंचलता दिखा ही गया!आतंकवादी भाई जान,मुस्लिम जगत की शान,सलीम खान का प्रेम मुझे खींच ही लाया दुबारा से इस खेल में!हालांकि वो भरे-पूरे मस्तिष्क के स्वामी है,इस पर किसी को भी कोई भी आपत्ति नहीं होगी!फिर पता नहीं क्यों.......?

पता नहीं क्यों वो एक बात पर अटक गए है!अब उनको बताने वाले एक तरह से छक भी चुके है और थक भी चुके है!अब मेरा इरादा भी उनको कुछ बताने का नहीं है!मै तो बस एक छोटी सी बात उन से ही पूछना चाह रहा हूँ!पता नहीं वो बताएँगे या नहीं!मर्जी है उनकी आखिर नियत है उनकी!

वो हर बार,बार-बार ये ही पूछ रहे है कि "अगर सावरकर जी का पुनर्जन्म अफ़गानिस्तान में तालिबान समर्थक में हुआ तो इस बात की गारंटी कौन लेगा कि भारत के ख़िलाफ़ किसी भी आतंकी घटना में वे लिप्त नहीं होंगे??? और अगर ऐसा हुआ तो उस राष्ट्रवाद का क्या होगा जिसे वीर सावरकर अपने कथित खून पसीने से सींचा था !!!??? "

तो भईया,मेरे सारे तर्क आपकी तार्किक  बुद्धि के आगे निष्प्राण है!मुझे अपनी शरण में आया जान,मुझे और सभी को ये बताने का कष्ट करे कि उपरोक्त वाक्य में सावरकर जी कि जगह आप अपने आदरणीय(हमारे लिए भी) पिताश्री को रख दे तो आपका क्या तर्क होगा!क्या ख्याल होगा इस बारे में!

 मान लीजिये आपके पिताश्री या दादा श्री का पुनर्जन्म पाकिस्तान या उस टाइप कि दूसरी जगह हो गया जो भारत के खिलाफ छदम या प्रत्यक्ष युद्ध में रत हो तो आपका कैसा वयवहार रहेगा उनके प्रति!
मुझे पूरा विश्वाश आप इसका सभी को(अपने समेत) संतुष्ट करने वाला उत्तर आज दे ही दोगे,और अपनी तर्कशीलता लोहा एक बार फिर ब्लोगजगत को मनवा के रहोगे!आज इस रहस्य का पटाक्षेप हो ही जाए!
आपका शुभचिंतक ही मानिए मुझे तो आप!

जय हिंद,जय श्रीराम!
कुंवर जी,

30 टिप्‍पणियां:

  1. हम इन्तजार करेंगे ...हम इन्तजार करेंगे उसका जवाब आने तक,
    खुदा करे के जवाब आये और हम कमेन्ट करे .

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  2. राणा जी ये इंतजार तो हमें भी है.....

    कुंवर जी,

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  3. बहुत ही सुन्‍दर प्रत्‍युत्‍तर दिया आप ने ।

    वस्‍तुत: ऐसे कुतर्कियों का मुह कुछ इसी तरह से ही बंद किया जा सकता है । अन्‍यथा तो कल को ये राम और कृष्‍ण को भी आतंकवाद के चपेट में लाने से नहीं चूकेंगे । इनका कोई मजहब या र्इमान नहीं है , बस ये अपने कुतर्कों को ही पुष्‍ट करना चाहते हैं ।


    ईंट का जबाब पत्‍‍थर से देने के लिये शुभकामनाएं व धन्‍यवाद

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  4. पुनर्जन्म के पचड़े से अलग उसके साथ पेश आयेंगे.......

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  5. सलीम ऐसे जगहो पर जाने से बचता है भई ।

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  6. ऐसे लोगों की पोस्टों को पढ़ना ही नही चाहिए .... आप अपनी ऊर्जा क्यों बेकार करते हैं ....

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  7. कुंवर जी,
    इस्लाम तो पुनर्जन्म में यक़ीन ही नहीं करता... हा हा हा

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  8. @नासवा जी-ये सब देख्मे के लिए उनके ब्लॉग पर जाने की जरुरत नहीं है!वो तो टिप्पणी के रूप में भी ये सब लिखते फिरते है जगह-जगह!हर बार हंस कर रह जाते थे,इस बार रुका ना गया!बस!



    @मिथिलेश भाई,@रश्मि जी--उनके तर्कों का इंतज़ार है अभी,वो आप सबको बस झुठलाने ही वाले है!



    @आनंद भाई-उत्तर तो भाई जान को देना है,मैंने तो तंग आकर पूछा है बस!आपके सहयोग के लिए धन्यवाद है जी!

    कुंवर जी,

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  9. atankvaadi chahte hi hain ki har koi atankvaadi ban jaaye ... aur nahi hota hai to naraz ho jaate hain ... phir dharm ka waasta dete hain ... dharmik kitaabon ka waasta dete hain ...
    meri marzi, main dharm ko chahe jaise samjhun ya samjhaoon ...
    darasal dharm ek astra ban chuka hai. aapne suna hoga ki chaku se phal bhi kaat sakte hain aur gala bhi. usi tarah 'nuclear power' se electricity bhi banayi ja sakti hai aur bomb bhi.
    ye to istmaal karne wale par hai ki wah kis tarah istmaal kare, uski mansikta kya hai ... dharm bhi acchhe logon ke hathon mein samaj ke bhalai ke liye istmaal hota hai aur bure logo ke hathon me atankvaad ko janm deta hai .

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  10. फिरदौस जी, जी ये तो आपने ही कह दिया अब भाई जान क्या कहेंगे!

    क्या वो भी हमारी तरह संकीर्ण सोच रखते है!क्या उनका उद्देश्य केवल पुनर्जन्म को संदेहास्पद घोषित करना रहा है!नहीं मुझे उनकी सोच इतनी छोटी नहीं लगती!

    चलो उनके हिसाब से ना सही,हमारे हिसाब से ही सही,पुनर्जन्म हो गया तो..........
    अब?

    कुंवर जी,

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  11. कुंवर जी, वैसे तो मेरे जवाब का ट्रेलर बहन फिरदौस ने दे ही दिया है कि मुस्लिम लोग पुनर्जन्म में विश्वाश ही नहीं रखते हैं. इस्लाम के मुताबिक़ हम जिस जगह मरेंगे (दफनाए जायेंगे) क़यामत के दिन वहीँ से उठाये जायेंगे. अगर बात राष्ट्रवाद की है तो समझ लीजिये मुस्लिम ही राष्ट्रवादी है क्यूंकि उनका पुनर्जन्म ही नहीं होगा. दुसरी तरफ सावरकर आदि (जो पुनर्जन्म में विश्वाश रखते हैं) पर अगले जनम में गद्दार हो जाने का ख़तरा ज़्यादा क्यूंकि वे कहीं भी जन्म ले सकते हैं, कहीं भी.... लेकिन मुसलमान जिस जगह मरेंगे (दफनाए जायेंगे) क़यामत के दिन वहीँ से उठाये जायेंगे.

    अब आप स्वयं बताईये जो जिस मिट्टी में जन्म लेता है और उसी में दफन हो जाता है और वह मरने के बाद किसी गद्दार देश में भाग कर जन्म भी नहीं लेता है (ज़्यादा राष्ट्रभक्त है अथवा राष्ट्रवादी है?) बनिस्बद जो ज़िन्दगी भर.... मैं राष्ट्रवादी हूँ मैं राष्ट्रवादी हूँ, चिल्लाता रहता है लेकिन मरते ही दगा दे जाता है और भाग कर किसी और जगह (ग़द्दार देश आदि) में जन्म ले लेता है (ज़्यादा राष्ट्रभक्त है अथवा राष्ट्रवादी है?)

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  12. क्या हुआ जो सवाल दागा
    सलीम दुम दबा के भागा
    सुई में से निकाल दिया धागा
    कुवंर जी को मिल गया "....."

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  13. भाई जान-आपका स्वागत है!आज तो बस आपसे पूछना है!बताया तो पहले भी गया है आपको पर आप किसी भी तर्क को मान ही नहीं रहे हो!मुझे लगा आप ही इस रहस्य से पर्दा उठा सकोगे सो आप से पूछ लिया!

    लेकिन आप तो बताने की बजाये फिर से पूछ रहे हो!

    जो असल बात मैंने पूछी है वो तो बताओ एक बार!या वो "हम नहीं मानते" वाला बहाना ही पकड कर बैठे रहोगे!

    ऐसा तो ऊपर भी कइयो ने कहा था पर मेरा विश्वाश था आप ऐसा नहीं करोगे!लेकिन.....

    कुंवर जी,

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  14. टिपण्णी को गौर से padhiye कुंवर जी जवाब उसी में है...
    सवाल के मुताबिक आपने पिटा श्री दादाश्री आदि के ज़रिये सवाल किया तो उक्त जवाब में आप मुस्लिम के बजाये पिता श्री या दादाश्री लगा लीजिये जवाब स्वतः बन जायेगा.

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  15. सलीम का जवाब काबिले तारीफ़ है

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  16. @समीउद्दीन भाई-आपका भी स्वागत है जी! और मै आप से भी सहमत हूँ!उनके तर्क काबील-ए-तारीफ़ होते है,पर कोई करता ही नहीं!सभी नासमझ है!

    @भाई जान-सब यही कह रहे थे और सही कह रहे थे!आपने पकड़ ही लिया ये वाला बहाना!



    कुंवर जी,

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  17. "अगर सावरकरजी का जन्म अफगानिस्तान में................"
    यार इसे सीधे ये पूछो न कि कि इस "अगर" की क्या गारंटी है ? और यदि सावरकर के केस में "अगर" की गारंटी नहीं है तो ये जब कह रहे है कि
    "लेकिन मुसलमान जिस जगह मरेंगे (दफनाये जायेंगे ) क़यामत के दिन वहीं से उठाये जायेंगे......." तो "क़यामत के दिन वहीं से उठाये जायेंगे" या वहीं कब्र में सड़ोगे, इसकी भी क्या गारंटी है ?कोई परमाणिक तथ्य है तो बताये? सिर्फ मौलवी के कहने भर से या किताब पढ़ लेने भर से यह बात साबित तो नहीं की जा सकती न !

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  18. @गोदियाल साहब-अर र र र र र ये क्या कह दिया आपने! एक ही झटके में झटक दिया!

    कुंवर जी,

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  19. कुंवर जी जिनकी रग-रग में गद्दारी और नमकहरामी बसी हो भला क्या जबाब देंगे।

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  20. @सुनील जी-सलीम भाई के जवाब तो काबिल-ए-तारीफ़ बताये गए है और आप क्या कह रहे हो?


    @भाई जान-रही बात ये कि मुस्लिम ही असली राष्ट्रवादी है तो....

    भाई जान बताये कि जब भारत-पाकिस्तान अलग नहीं हुए थे,सारे मुसलमान भारत के थे,बटवारे के अगले ही दिन वो पाकिस्तानी हो गए.....

    भारत के खिलाफ उन्होंने युद्ध भी छेड़ा!प्रत्यक्ष और वो भी इसी जन्म में!ये कौन सी राष्ट्रवादिता ?

    कुंवर जी,

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  21. कुंबर जी ऐसे ही जानबरों के लिए तो पाकिस्तान बनाया गया था लेकिन एक योजना के तहत ये गद्दार भारत से नहीं गये क्योंकि अगर चले गए होते तो फिर ये नमकहरामी कैसे करते और विना नमक हरामी के इन्हें जन्नत कैसे मिल सकती है
    हमने भी कई बार एसे जानवरों से ये प्रश्न पूछा है आज फिर पूछ रहे हैं कि जब सेकुलर हिन्दूओं ने इनको पाकिस्तान दे दिया तो फिर ये भारत में किस हैसियत से रह रहे हैं
    हमारे विचार में इनके लिए एक ही शब्द उपयुक्त है
    घुसपैठिए
    जब तक इन्हें खदेड़ा न जायेगा ये अपने कमीनेपन से बाज नहीं आयेंगे

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  22. aisi betuki baton pr aap tippni kyin krte hain
    jise i ke sivay kuchh maloom hi nhi hai ya jo mn mutabik kuchh bhi uljhlool bk rha jis ka mksd hi kttrta failana hai to use aap itna bhv kyon de rhe han jo n to vigyan ko mante hain n hi any dhrm ka smman krte hain ve bhi koi dekhne sunne ki chij hai
    chhodo aii chhijo ko
    meri bhn firdaus vaigyanik soch rkhti hai sb ka smman krti hai un se snvad sthapit krna hi smaj ke hit main hai
    smil jaise jin logo ki aastha h bahr judi hai jo apne poorvjon ko hi nhi mante un ka kya hai kuchh bhi kh skte hai nishchit in ke poorvj bahr se nhi aaye hindoo the un ki aasthaye desh v rashtr ttha dhrm ke prti thi prntu in khan hai aap ko pta hi hai
    is liye aap apna kam aage bdhao
    ishvr aap ko shkti den
    dr. ved vyathit

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  23. सादर वन्दे |
    ये जो शक्श है (माफ़ करें नाम लेकर अपनी लेखनी को गाली नहीं देना चाहता) बहुत बड़ी बड़ी बात करता है इतना तो इसके पैगम्बर साहब ने भी नहीं कहा होगा, वो तो बेचारे इन्हें कबीलों से उठाकर इन्सान बना चाहते थे लेकिन .............|
    और रही बात इनके इतिहास की तो ये कबसे राष्ट्र भक्त हो गए अपने पूर्वजों की ये खाक छाने ये वो हिन्दू है जिन्होंने इस राष्ट्र से गद्दारी करके अपना धर्म बदल लिया ये उन्ही की संताने हैं जिनको नंगा करके मुस्लमान बनाया गया और ये अपनी पीढ़ी को सुधारने की बजाये उसीधर्म के ठेकेदार बने हुए हैं. और क्या कहे ..............बाकी तो इतने बुद्धिमान है कि दूसरे इनको मुर्ख लगते हैं.
    कुवर जी मै तो यही कहूँगा कि यैसे लोगों को उनके हाल पर ही छोड़ देना चाहिए,
    रत्नेश त्रिपाठी

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  24. भई कुंवर जी, आप भी किन लोगों से सिर खपाई कर रहे हैं...आप भली भान्ती जानते हैं कि आपका सवाल होगा खेत के बारे में और ये जवाब देंगें खलिहान का :-)

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  25. देखिये अगर वीर सावरकर पाकिस्तान या अफगानिस्तान में पैदा हुए होते तो अवश्य ही हिंदुस्तान में बम गिराने आते । जी हाँ उनके जैसी पुण्य आत्मा भी यही घिनोना कार्य कर जाती अगर वो उन कबिलियाई लोगों के बीच पैदा हुए होते तो क्योंकि उनका इस्लाम यही शिक्षा देता रहा है की जाओ निरुद्देशय मारकाट और हिंसा फैलाओ। मैं जनता हूँ की सलीम खान वीर सावरकर के द्वारा किये गए अंग्रेजो के विरोध को कासब जैसे लोगो की हिंसा के समकक्ष रखने का प्रयास कर रहे हैं। पर भैय्ये ये ध्यान में रखो की सावरकर जी ने उन अंग्रेजो का विरोध किया था जिन्होंने हमारे देश का शोषण किया पर ये मुस्लिम आतंकवादी तो बेवजह ही हमारे देश के निर्दोष लोगों का कत्लेआम कर रहे हैं। ये प्रश्न पूछकर सलीम खान ने इस्लामी विचारधारा से पर्दा उठाने का कार्य किया है। सलीम ऐसे ही प्रश्न पूछते रहा करो ताकि इस्लामिक आतंकवाद को हम आसानी से नंगा कर सकें।

    उत्तर देंहटाएं
  26. सलीम खान से मेरा एक सवाल


    "भाई जान मे आप लोगो के इस झगडे मे नही पड़ने वाला, पर एक बात जो मेरे जहाँ मे आ रही हैं वो आपसे जरुर कहना चाहूँगा, और कुंवर जी से निवेदन हैं की वो ऐसी व्यवस्था करे की उनका जवाब मेरे तक भी पहुँच जाए

    "भाई जान चलो ठीक हैं आप लोग पुनर्जनम मे विश्वाश नही रखते हो तो मेरे एक शक का समाधान जरुर कर दो
    आपने कुछ ऐसा कहा हैं=-


    " की जो जहा जनम लेकर वही पे दबा दिया जाता हैं तो कयामत के दिन उसको वही से सीधे उठाया जाता हैं तो मुसलमान जयादा रास्ट्रवादी हुआ क्योंकि वो अपने देश मे ही दुबारा जनम लेता हैं मतलब था ये आपका

    1. - तो भाई जान इसमें रास्ट्रवादी वाली कौन सी बात हुई . पहले तो आप ये बताइए की क्या एक मुसलमान जो इस देश मे आतंकवादी हैं तो मरने के बाद तो वो भी आतंकवादी ही बनेगा इसी देश मे, इसकी क्या गारंटी हैं की वो देशभक्त ही बनेगा. और अगर वो आतंकवादी ही बनता है तो "तो क्या पाकिस्तान और अफगानिस्तान का आज ये हश्र इसी कारण से हैं "

    2.- और एक बात अगर जो दबा हैं वो कयामत के दिन वही से उठा लिया जायेगा तो फिर ये मुस्लिम आबादी कैसे बढ़ रही हैं क्योंकि आप तो ऐसा मानते हो की जो दबा हैं वो ही उठेगा, तो बाकी लोग कहा से आये ?

    और एक बात आप सब से आपको मनुष्य जनम मिला हैं उसे ऐसे धार्मिक झगडो मे जिनका कोई और हैं ना कोई छोर हैं मे मत गवावो.
    किसीके भी धरम से अच्छी बातें उठाओ सिरफ .

    मेरे अपने मन मे ये सवाल आये हैं और ये किसी के धरम को नीचा दिखाने या अपने धरम का प्रचार करने के लिए नही हैं .
    मे तो ये सिर्फ अपने मन मे आये चंद सवालों को संतुस्ट करने के लिए पूछ रहा हूँ

    सलीम भाईजान से आग्रह हैं की अगर वो जवाब न देना चाहे तो कोई बात नही मगर अगर वो जवाब दे देते हैं तो मुझे अपने मुस्लिम भाइयो के धरम को समझने मे और मदद मिल जायेगी .

    - संजीव राणा
    हिन्दुस्तानी

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  27. @आर्य जी-सादर वन्दे,छोड तो दिया ही था इनको इनके हाल पर,मगर जहाँ-तहां अपनी ये वाली टिप्पणी टीप जाते थे जनाब! आपने भी देखा ही होगा!वैसे आपने सही कहा!

    @डॉ. वेद व्यथित जी-मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद है जी,

    @वत्स जी-अब तो पक्का आपकी बात ठीक होती दिखाई दे रही है!लेकिन जब बता नहीं सकते तो क्यों एक बात की पूंछ दबा कर बैठ जाते है!वैसे ये भी तो इनकी मानसिकता का ही सबूत है!हम ही थोड़े कम-अक्ल है जो इतने इशारे भी नहीं समझते!

    @भाई साहब विचार शून्य जी-बात तो आप भी ठीक कह रहे है!पर पता नहीं कोई गौर करेगा या नहीं!



    कुंवर जी,

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  28. @राणा साहब-आपके सवालों कोई पहली बार नहीं किये गए है!फिर भी देखते है,शायद आपकी सद्भावना की कद्र करते हुए कोई आपको संतुष्ट करने की कोशिश कर दे!



    @भाई जान-क्षमा करना,मै तो बस आपसे बात करना चाहता था और आपने तो अपने पूरे समाज की जिम्मेवारी अपने सर पर ले ली!अब जब जिम्मेवारी ले ही ली है तो अपने दायित्व भी समझो,उन्हें पूरा करो!इमानदारी से निभाओ!

    अब मुझ से तुलना मत करने लग जाना!मै तो अदना सा,तुच्छ सा धुल-कण से भी हल्का हूँ!

    कुंवर जी,

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  29. गद्दारों (जमाल, असलम, सलीम अयाज, सफत , इदरीसी, जीशान) का क्या? जो जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं. वन्दे मातरम् कहने में जिनकी---------- फटती है

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