मै सोचता हूँ
इस बार तो
धर-दबोचुन्गा,
तैयार भी हो जाता हूँ
तैयार भी हो जाता हूँ
पूरी तरह!
पर पता ही नहीं चलता
कब-कैसे वो
बोनस भी ले जाते है!
और मै खड़ा देखता रह जाता हूँ!
अब मै कसता हूँ लंगोट
एक बार फिर,
हाथो को लगाता हूँ
मिट्टी भरपूर,
मुट्ठियाँ भीन्च,
त्योरिया खींच,
घूरता हूँ मैं शब्दों को....
खिलखिला कर हँसते है
वो मुझ पर....
कहते है
हम थक गए,
अभी खेल ख़त्म....
और मै खड़ा देखता रह जाता हूँ!
जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,
अब मै कसता हूँ लंगोट
एक बार फिर,
हाथो को लगाता हूँ
मिट्टी भरपूर,
मुट्ठियाँ भीन्च,
त्योरिया खींच,
घूरता हूँ मैं शब्दों को....
खिलखिला कर हँसते है
वो मुझ पर....
कहते है
हम थक गए,
अभी खेल ख़त्म....
और मै खड़ा देखता रह जाता हूँ!
जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,







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