उसके संग बोल-बतलाने वाले...
उसे अपने संग हंसाने-रुलाने वाले...
एक अरज हमारी भी उसको सुना देना!
शब्दों के अर्थ करने में ही जो उलझा हुआ है...
अपनी नज़रो में ही जो सुलझा हुआ है...
पुष्प खिलने से पहले ही उसका मुरझा हुआ है...
उस मुर्ख को तुम समझा देना...
एक अरज हमारी भी उसको सुना देना!हम-तुम सब एक है क्या होगा ये जान के...
चलना पड़े तुम्हे चाहे विरूद्ध विधान के...
पार पहुंचा ही दो उसे अनुमान के...
तुम उस से जुदा ही कहा हो बस ये दिखा देना...
एक अरज हमारी भी उसको सुना देना!
वो नादान अनजान तुच्छ धूलि-समान सही...
अभी तक भले ही ढोया हो उसने अज्ञान सही....
अभी उसके मन में आया कोई और अरमान नहीं...
धुल से धरती तक का सफ़र उसे करा देना....
एक अरज हमारी भी उसको सुना देना!जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,







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