मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

लगता है कांग्रेस सरकार ने भगवान् के साथ मुलायम या ममता के जैसे कोई गठबंधन कर लिया है!

लगता है भगवान् ने भी कांग्रेस सरकार को समर्थन दे दिया है या फिर कांग्रेस सरकार ने भगवान् के साथ मुलायम या ममता के जैसे कोई गठबंधन कर लिया है!तभी तो..... जब गेहुओ को पानी की जरुरत थी तब सरकारसही बिजली नहीं दे रही थी और वो भगवान् भी बारिश नहीं कर रहा था! और अब जब फसल कटाई के लिए बिलकुल तैयार है तब बिजली भी पहले से सही है और बारिश.... उसमे परमात्मा ने मौज कर रखी है!रही-सही कसर औलो ने पूरी कर दी!

पिछले कई महीने जिस फसल के लिए किसान दिन-रात एक कर के मेहनत कर रहा था और जब उसका फल मिलने ही वाला था....लगभग मिल भी गया था....क्योकि खेत में सोने के जैसे लहलहाती गेहूं की बैल देख कर उसकी सारी थकान और दिक्कत जो उसने पिछले कुछ महीनो में उठाई थी बहुत छोटी लग रही थी उसे.....पर ....!

नया सूरज उगते ही जो फसल लहलहा रही थी कल तक आज बरसात और औलो की मार से भारत की जनता के जैसे ज़मीन पर बिछी पड़ी थी और देख रही थी किसान की और जो की भगवान् की और टकटकी लगाए हुए था!

भगवान् की ये कांग्रेस नीति..... किसान को कही का नहीं छोड़ा!



जैसे भारत की जनता चुनावों से पहले खूब जोश दिखाती है...कांग्रेस को चुनती है फिर मंहगाई ,भ्रष्टाचार,घपले-घोटाले की बारिश और ओलावृष्टि से ज़मीन पर बिछ जाती और फिर कांग्रेस सरकार की ओर देखती है जो की भगवान् की ओर देख रही होती है....
 
 
जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुँवर जी,

बुधवार, 4 अप्रैल 2012

एक कर्म हमारा पूरा जन्म बिगाड़ देता है और उसका फल न जाने कितने जन्म.........(कुँवर जी)

हम जो भी कर रहे है है या कर चुके है अथवा तो करने वाले है,सबका परिणाम तभी...करते ही पाना चाहते है!कई बार तो उसके गलत परिणाम की आशंका से उसके फल को ही नहीं चाहते!और तब प्रसन्न भी तो होते है जब उसका परिणाम हमें मिलता दिखाई नहीं देता!कई बार कुछ अच्छा परिणाम पाने हेतु जो कर्म हम करते है और जब वैसा ही परिणाम हमें हमारी आवश्यकतानुसार नहीं मिलता तो दुखी भी होते है!

पर कौन जाने कि कोन सा कर्म हम फल पाने के लिए कर रहे है अथवा ये कर्म पिछले किसी कर्म का फल है???अब पिछला कितना...ये भी प्रशन!इसी जन्म का या पिछले किसी और जन्म का..??और फिर कहते है कि हम कुछ कर ही नहीं सकते,सब वो"

अब मै जहा उलझता हूँ वो ये बात है कि यदि उपरोक्त बाते सत्य है तो..... हम कर क्या रहे है?


एक कर्म हमारा पूरा जन्म बिगाड़ देता है और उसका फल न जाने कितने जन्म.......????

बुधवार, 29 फ़रवरी 2012

फिट्टे मुह!फिर घर फोन मिल गया......!!!!(कुँवर जी)



फोन की घंटी बजती है.......बजती रहती है...... और फिर तंग आकर श्रीमती जी को फोन उठाना ही पड़ता है!उधर से बहुत ही प्यार और दुलार भरी आवाज आती है..."जान.... काफी देर से कॉल नहीं की थी...सोचा आप मिस कर रही होंगी सो कॉल कर ली,कैसी हो.!"


श्रीमती जी तनी भृकुटियो को थोडा आराम देते हुए..."मै तो ठीक हूँ, वो पंद्रह मिनट पहले जो गाली-गलौच की जा रही थी उसका क्या.....????

उधर से.."फिट्टे मुह!फिर घर फोन मिल गया......!!!!


राम राम जी,
कुँवर जी, 

गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

कहा है साहस खुद को उघाड़ने का....(कुँवर जी)

सब विषयो,
शीर्षकों,
मुद्दों,शब्दों को
इक्कठा कर
जब
कुछ लिखने  की सोचता हूँ
तो एक-एक कर के
सब दूर जाते दिखते है....
बस
रह जाता हूँ
खड़ा मै अकेला
और
बात मुझ पर आकर
रुक ही जाती है....

और फिर क्या....

सब मौन....

कहा है साहस खुद को उघाड़ने का....????

कुँवर जी,

बुधवार, 8 फ़रवरी 2012

ताकि जो जैसा है वो रहे वैसे ही...

ओस की बूंदे जम गयी थी पलकों पर,
अब झपकते तो मोती झर नहीं जाते,


साँसों में भर ली थी सुगंध जीवन की.
अब उन्हें छोड़ते तो मर नहीं जाते,


सपनो में बदल गयी थी जिंदगी,
जागते तो सपने बिखर नहीं जाते,


तभी तो....

तभी तो
हमने रोक ली थी सांस,
झपकने नहीं दिया पलकों को
और न खुलने दी आँख सो कर एक बार!
ताकि जो जैसा है वो रहे वैसे ही...
वैसा ही...! 


कुँवर जी,
जय हिंद,जय श्रीराम!

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