बुधवार, 8 दिसंबर 2010

अरे सब-कुछ है; बस ये भ्रम रहे......(कुंवर जी)

मै ये नहीं कहता कि हमारी मुलाक़ात हो,
हर रोज हर पल हमारी ही बात हो,
तमन्ना बस इतनी सी है कि जब दूर हो तो,
थोड़ी सी हमारी याद और थोड़े से ज़ज्बात हो!

किसने कहा कि आँखे नम रहे,
इस ज़िन्दगी से खफा  हरदम रहे,
सब-कुछ हो ये जरुरी तो नहीं यहाँ,
अरे सब-कुछ है; बस ये भ्रम रहे!



 जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,

11 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय सगीता जी-राम राम जी,आपका स्वागत है जी...

    कुंवर जी,

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  2. बहुत पते की बात कह रहे हैं आप कुंवर जी,

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  3. अरे सब-कुछ है; बस ये भ्रम रहे!
    sahi bat bhram men jeene ki maje hi kuchh aur hai

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  4. aap sabhi ka swaagat hai ji,is utsaahvardhan ke liye aabhaar...

    kunwar ji,

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  5. kunwar jee bhrm na toote to kya baat hai..........
    sunder abhivykti jee....

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  6. @अपनत्व जी,@अमित भाई साहब -राम राम जी,आपका आगमन से ही मन प्रसन्न हो जाता है!

    कुंवर जी,

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  7. अरे सब कुछ है यह भ्रम रहे..... खूब कहा. यही तो जीने के अंदाज है.

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