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बुधवार, 8 दिसंबर 2010

अरे सब-कुछ है; बस ये भ्रम रहे......(कुंवर जी)

मै ये नहीं कहता कि हमारी मुलाक़ात हो,
हर रोज हर पल हमारी ही बात हो,
तमन्ना बस इतनी सी है कि जब दूर हो तो,
थोड़ी सी हमारी याद और थोड़े से ज़ज्बात हो!

किसने कहा कि आँखे नम रहे,
इस ज़िन्दगी से खफा  हरदम रहे,
सब-कुछ हो ये जरुरी तो नहीं यहाँ,
अरे सब-कुछ है; बस ये भ्रम रहे!



 जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,

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