मंगलवार, 7 दिसंबर 2010

बचकानी फ़रियाद......(कुंवर जी)

कुछ

नयी बात
करनी चाही तो
सब पुरानी बातें याद आई,
चलने
लगे तो
ज़ेहन में फिर
मिलने वाली
बचकानी फ़रियाद आई!

जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,

6 टिप्‍पणियां:

  1. अरे वाह ! ये नन्ही सी कविता अच्छी लगी.

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  2. ये नन्ही सी कविता अच्छी लगी, सुंदर रचना बधाई...

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  3. नयी बात
    करनी चाही तो
    सब पुरानी बातें याद आई,
    खूबसूरती से सजाये हैं एहसास

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  4. भाई मेरे,
    शब्द भी ज़ोरदार हैं और भाव भी!!!
    शुभकामनाएँ!

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  5. ये मन तो भोला है जी. संजीदगी वाली चीज़ भी बचकाने से भाव में करता है. ऐसी फरियाद सुनी जानी चहिये.

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