बुधवार, 7 अप्रैल 2010

मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

हिन्दुओ की ये भावना के "कुत्ता भौंक कर अपने आप चुप हो जाएगा" काफी हद तक जिम्मेवार है कुत्ते की भों-भों सुनने के लिए!

आजकल जो ब्लोग्युद्ध सा छिड़ा हुआ है ब्लॉगजगत में हिन्दू-मुस्लिम संस्कृतियों को लेकर अपने-आप में दुर्भाग्यपूर्ण है!और जो वास्तव है में वो तो अति-घृणित भी! लेकिन जब कोई हमारे बारे में कुछ गलत कह रहा है तो उसे उसका जवाब भी तो मिलना चाहिए!जो सक्षम है जवाब देने में वो तो जवाब जरुर देंगे,देना भी चाहिए!हिन्दुओ की ये भावना के "कुत्ता भौंक कर अपने आप चुप हो जाएगा" काफी हद तक जिम्मेवार है कुत्ते की भों-भों सुनने के लिए!



असल में ये पोस्ट लिखी गयी है एक नीचे दिए गिये लिंक पर लिखे गए एक लेख पर टिप्पणी करते हुए!विस्तार से जानने के लिए नीचे क्लिक करें!  

 http://samrastamunch.blogspot.com/2010/04/blog-post_3276.html  इस तरह के कुत्ते सिर्फ मुस्लिम ही नहीं बल्कि इसाई जगत में भी पाए जाते है!और तो और हिन्दू धर्म से जो उप-धर्म निकले है उनमे भी और जो अभी तक भी खुद को हिन्दू मान रहे है वो भी इन कुत्तानुमा वयवहार ही कर रहे है!




कुत्ते से एक बात याद आ गयी,कवी सुरेंदर शर्मा जी की!अपने शब्दों का प्रयोग कर रहा हूँ,जो गलती होगी वो मेरी ही होगी!

एक फौजी की शादी हो गयी जी,बन्दे के पास अपनी दोनाली बन्दुक!नयी-नयी दुल्हन घर में!फौजी साहब खाना खा रहे है जी,बन्दूक पास में रखी है!
एक कुत्ता वही बैठा था,जब उसे काफी देर तक टुकड़ा नहीं मिला तो बेचारा आदतन भौंकने लगा!जब काफी देर हो गयी तो फौजी बोला "कुत्ते चुप"!अब बिना टुकड़े वो कहाँ चुप होने वाला था!वो भौंकता रह जी!फौजी बोला "कुत्ते चुप,मेरी बन्दूक नहीं देखी क्या?"अब कुत्ता कोई पढ़ा-लिखा डॉक्टर तो था नहीं!वो बेचारा बन्दूक क्या देखता,वो तो रोटी देख रहा था!रोटी मिली नहीं तो वो भौंकता रहा!
अब हो गयी जी हद!फौजी साहब अपने वास्तविक रूप में आते हुए बोले कुत्ते मै तीन तक गिनूंगा,चुप हो गया तो ठीक नहीं तो फिर देख लेना!
कुत्ता अब भी नहीं समझ पाया बेचारा!कुत्ता जो था!उधर गिनती शुरू!कुत्ते चुप हो जा एक...कुत्ते चुप हो जा दो...कुत्ते चुप होजा तीन....!


कुता बेचारा सच में अनपढ़ था!गिनती का महत्त्व नहीं जानता था,भौंकता रहा गिनती के दौरान भी और बाद भी!
गिनती पूरी और बस एक फायर ही काफी था उस कुत्ते के लिए तो!सदा के लिए चुप!फौजी अपनी जीत पर अति प्रसन्न!अब आराम से खाना खाया उसने!लेकिन उसकी पत्नी थोड़ी जागरूक नारी थी!वो ये अत्याचार सहन ना कर पायी!उसने आवाज उठायी!


फौजी पतिधर्म के तहत सब सुनने लगा!वो कहे जा रही थी....."ये कोई मानवता है क्या?कुत्ता था भौंक ही तो रहा था,गोली मार दी!ऐसे ही इसी को गोली मार देते है क्या......"
अब फौजी अपने धैर्य को टूटा सा देख कर बोला के बहुत हो चुका अब चुप हो जा!


पर नारी थी,जागरूक थी,"मुझे तो पता ही नहीं था कि आप ऐसे भी हो,पता होता तो कभी शादी नहीं करती......"


अब फौजी से ना रहा गया!वो बोला "देख चुप होजा एक.....चुप होजा दो......
और फिर तीन गिनने कि जरुरत नहीं पड़ी!आज सब ठीक चल रहा है!उसके बाद उस घर में फिर कभी लड़ाई नहीं हुई!


मतलब यही कि,कभी-कभी शान्ति के लिए हमे भी कठोर रूप अख्तियार कर लेना चाहिए!कोई हमे गलत कह रहा है तो कोई कब तक सहे!वो गलत है ये कहने वाला कोई ना कोई तो होना ही चाहिए!और वो कोई मै क्यों नहीं,ये बात सभी हिन्दुओ को सोचनी चाहिए!जब सभी अपने-अपने स्तर पर विरोध दर्ज कर सकते है तो करना चाहिए!क्यों हम गलत को गलत नहीं कह पा रहे है?


सोचो!
जय हिंद,जय श्री राम.....
 कुंवर जी,


सोमवार, 5 अप्रैल 2010

कैसे बताऊँ मै........(कविता),

खेलता हूँ मै भी दुखो से,ये कैसे बताऊँ मै,

जिसको अब तक रहा छिपाता,कैसे जताऊँ मै!

भगवान् जो लिख चुका सो लिख चुका,

अब क्या उसको दोहराऊं मै,

मुझे खुद से जुदा करने वाला वो ही तो था,

अब बिन बुलाएं भला क्यों उसके पास जाऊं मै,

हूँ ही क्या मै उस से अलग हो कर,

फिर क्यूँ खुद को "कुछ" दिखाऊं मै,


कुंवर जी,

गुरुवार, 1 अप्रैल 2010

तेरे इकरार से जीवन में बस एक मोड़ आएगा मगर.....,(कविता),

तेरे इकरार से जीवन में बस एक मोड़ आएगा,
पर तेरा इन्कार मुझे चौराहे पर ले जाएगा!
फिर खामोशी रास्ता,तन्हाई मंजिल होगी,
फिर सिसकती बिरहन सी रात आई होगी,
सपने आंसूं बन बिखर चुके होंगे,
दिल होगा हवन-कुण्ड,अरमान आहुति!
फिर बुझा दीपक सा कल आएगा,
पर ये कल उस बीते हुए कल को भुला ना पायेगा!
फिर ना जाने कितने ही कल जीवन में आयेंगे,
फिर एक सुबह ऐसी होगी,
जैसे दीपावली की रात से अगली सुबह,
फिर समय विवश करेगा,
वें बुझे दीपक मुझे ही इक्कठे करने होंगे
जो कल रात मै ही प्रदीप्त कर रहा था!
यूँ तो आज भी हरदीप जल रहा होगा,
मगर ख्यालों में,
ख्यालों में ही सही,
मै आज भी उन बुझे दीपकों से रौशनी लेना चाहूँगा,
और शायद रौशनी मिल भी सकती है,
अगर तुम चाहो तो.....!
अगर तुम चाहो तो ये दीप बुझेंगे ही नहीं!

अभी तो तेरा जवाब मिला भी नहीं,
अभी तो हमने सवाल किया ही नहीं,
मगर तेरे जवाब की सोच में हमने,
ना जाने क्या-क्या सोच लिया,
मै तो अब सोच चुका,
अब सोचने की बारी तुम्हारी है,
सोचो....

अगर तुम इकरार करते हो तो जीवन में बस एक मोड़ आएगा,
पर तेरा इन्कार किसी से ना जाने क्या करवा जाएगा!











कुंवर जी,

लिखिए अपनी भाषा में