खेलता हूँ मै भी दुखो से,ये कैसे बताऊँ मै,
जिसको अब तक रहा छिपाता,कैसे जताऊँ मै!
भगवान् जो लिख चुका सो लिख चुका,
अब क्या उसको दोहराऊं मै,
मुझे खुद से जुदा करने वाला वो ही तो था,
अब बिन बुलाएं भला क्यों उसके पास जाऊं मै,
हूँ ही क्या मै उस से अलग हो कर,
फिर क्यूँ खुद को "कुछ" दिखाऊं मै,
कुंवर जी,