शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2013

हिन्दू होकर हिन्दू दिखने में जो शर्माता है... (कुँवर जी)

हिन्दू होकर हिन्दू दिखने में जो शर्माता है...
बाप के खून और माँ के दूध को लजाता है...

जय हिन्द, जय श्रीराम,
कुँवर जी,

रविवार, 13 जनवरी 2013

हमें शान्ति चाहिए...,(कुँवर जी)

हम कहते है हमें शान्ति चाहिए,
वो बोले
हमने इतना बेआबरू  तुमको  किया,
कभी छाती की छलनी
अभी सर धर लिया,
तुम अब भी शान्त हो
अब इस से ज्यादा शान्ति का भी क्या करोगे...
शान्ति नहीं तुम्हे शर्म चाहिए,
हमने कहा
शर्म तो चली गयी बेशर्म हो...
चाहे कुछ भी हो अब शान्ति ही अपना धर्म हो...
तो हमें शान्ति चाहिए...

जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुँवर जी,

गुरुवार, 3 जनवरी 2013

इतनी मजबूर तो नहीं जिंदगी....(कुँवर जी)

क्यूँ घुट रहे हो पल-पल,
कोई क़सूर तो नही जिंदगी!

खोलो पलके हाथ बढाओ,
इतनी भी दूर तो नहीं ज़िन्दगी!

माना ज़ख्म है कई तो क्या,
कोई नासूर तो नहीं ज़िन्दगी!

रोते हुए को हँसी ना दे पाए जो,
इतनी मजबूर तो नहीं जिंदगी!

जय हिन्द, जय श्रीराम,
कुँवर जी,

गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

कोई संसद के बहार से हमला करता है... और कोई अन्दर से..!(कुँवर जी)

देश की जो रीढ़ है लोकतंत्र.,(?) वही सबसे बड़ी कमजोरी मुझे दिखाई पड़ती है!कम से कम पिछले कुछ दिनों से तो ऐसा ही दिखाई दे रहा है! कोई घर से बहार का मारे तो दर्द होता है वो तो होगा ही, पर जब कोई घर का ही मारता है तो दुःख भी होता है साथ में!

कल जैसे लोकतंत्र का मज़ाक बना उस से बहुत दुःख हुआ, ना कुछ कहते बन रहा है, ना चुप रहते ही बन रहा!पता नहीं रोटी ही खाते है या क्या खाते है...?

जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुँवर जी,

सोमवार, 15 अक्टूबर 2012

प्रतिक्रिया......(कुँवर जी)

अभी अनामिका जी को यहाँ पढ़ा तो   
सच में बोलती ही बंद हो गयी!कई दिन बाद स्वतः ही कुछ मौन से फूटा!आज वो ही आपके समक्ष!आज हम सब बुत से बन गए है!कोई प्रतिक्रिया कर ही नहीं रहे है है किसी भी कुरीति के विरोध में!बस आज यही....


देशवासियों तुम मूक ही रहना....
जब खुद की बारी आएगी..
तब आत्मा तक चिल्लाएगी,
सब चीख-ओ-पुकार तुम्हारी
सुन कर भी अनसुनी हो जायेगी,
तब तक
देशवासियों तुम मूक ही रहना....
 

तड़पती-तरसती आँखे तुम्हारी
जैसे अब तुम मूक हो,
तब सब को मूक देख पछताएगी!

बिना पछताए कहा 
हमारे बात समझ में आएगी!
तो 
तब तक
देशवासियों तुम मूक ही रहना...!


जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुँवर जी,

लिखिए अपनी भाषा में