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मंगलवार, 10 सितंबर 2013

इन्सानियत से होता कोसो दूर इन्सान !....(कुँवर जी)

हालातो के हाथो
में खुद को सौंप
दुआ,बददुआ और
किस्मत को भूल,
एक दुसरे को मारने को मजबूर इन्सान !

दया,धर्म और धैर्य
सब गए रसातल में
पथरीली आँखों के
वहशीपन में ये दो पाया
इन्सानियत से होता कोसो दूर इन्सान !

अहम्,स्वार्थ,
और राजनीति के षड्यंत्र,
इनसे आँखे मूंदे,
खुद से ही लड़ता हुआ
भला चल पायेगा कितनी दूर  इन्सान !




जय हिन्द, जय श्रीराम,
कुँवर जी,

रविवार, 13 जनवरी 2013

हमें शान्ति चाहिए...,(कुँवर जी)

हम कहते है हमें शान्ति चाहिए,
वो बोले
हमने इतना बेआबरू  तुमको  किया,
कभी छाती की छलनी
अभी सर धर लिया,
तुम अब भी शान्त हो
अब इस से ज्यादा शान्ति का भी क्या करोगे...
शान्ति नहीं तुम्हे शर्म चाहिए,
हमने कहा
शर्म तो चली गयी बेशर्म हो...
चाहे कुछ भी हो अब शान्ति ही अपना धर्म हो...
तो हमें शान्ति चाहिए...

जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुँवर जी,

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