ज़ख्म देख कर भी कोई सहलाता नहीं है,
नमक डालते है,इलाज़ कोई बताता नहीं है!
आँखों में आंसूं देख आँखे झुकाते मिले सब,
हौसला बढाने को भी तो कोई मुस्कुराता नहीं है!
चौराहे तक तो खूब साथ निभाया गया,
अब गलत-ठीक ही सही,राह कोई बताता नहीं है!
उनकी जरुरत के हिसाब से तो रिश्ते बहुत बने,
अपनी बारी आई,नया-पुराना कोई रिश्ता निभाता नहीं है!
चलो किसी का अच्छा किया ही नहीं हमने,
फिर सोचा,हँसे;बुरा किया हो ये भी तो याद आता नहीं है!
जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुँवर जी,