सोमवार, 22 नवंबर 2010

`अब आंसुओ में कोई रंग आता ही नहीं!..........(Kunwar ji)..

पिछले  कुछ दिन या पिछला एक-दो महीना ब्लॉग से दूर सा ही रहा,कल तक तो इतना अफ़सोस नहीं हो रहा था पर कल रोहतक में जब मै अपने परिवार से पहली बार रूबरू हुआ तो लगा जैसे ये समय कैसे बर्बाद कर दिया मैंने....

लगा जैसे लड़की अपने ससुराल से मैके में आई हो पता नहीं कितने दिनों के बाद....
लेकिन वहा जाने से मन कि उत्कंठा को तो बल मिल गया पर समय का सहारा उन्हें अब भी नहीं मिल पा रहा है!उसी के अभाव में आज बस ये पंक्तियाँ ही आपके लिए....और चेष्टा रहेगी कि निरन्तर अपने परिवार का प्यार मै पाता रहूँ...

 अपने जीवन के सारे रंग
उड़ेल दिए मैंने शब्दों के चित्र बनाने में...

अब आंसुओ में कोई रंग आता ही नहीं!


जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,

11 टिप्‍पणियां:

  1. स्वागत है आपका आपके ही परिवार नें.....

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  2. जितनी उमंग लडकी को मैके आने की होती है, उतना ही उल्हास मैके वालो को भी होता है।
    स्वागत है।

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  3. एक बेहतरीन अश`आर के साथ पुन: आगमन पर आपका हार्दिक स्वागत है.

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  4. बहुत सही ..बहुत खूब ..अविस्मरणीय रहा यह ब्लॉगर मिलन..शुक्रिया

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  5. आपको दुबारा देख कर अच्छा लगा ... कुछ ही लाइनों में दिल का हाल कह दिया है आपने ... लाजवाब ....

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  6. aap sab ke is amulya sahyog ke liye dhanyawaad hai ji.....

    kunwar ji,

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  7. हमें भी आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा
    आगे भी मिलते रहेंगें

    प्रणाम

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  8. अपने जीवन के सारे रंग
    उड़ेल दिए मैंने शब्दों के चित्र बनाने में...

    अब आंसुओ में कोई रंग आता ही नहीं!

    बडी गहरी बात कह दी।

    उत्तर देंहटाएं

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