ये जो दुनिया है
ये तो दुनिया है!
कभी उलट दिशा में चल कर भी साथ होती है,
कभी हम पर हंसती कभी गम में हमारे रोती है,
कभी जागते है हम और ये आराम से सोती है,
कभी हमारी एक शिकन पे चैन अपना खोती है!
ये जो दुनिया है
ये तो दुनिया है!
कभी अपनों में पराये नजर आते है,
कभी परायो में हमसायें उतर आते है,
बारिशों में कई चेहरे और निखर जाते है,
कुछ के कई और रंग उभर आते है!
ये जो दुनिया है
ये तो दुनिया है!
माना ये जो दुनिया है ये तो दुनिया है,
मगर देखो तो आखिर हम क्या है,
सोचते है ये जानकर भी आखिर मिलना क्या है,
न ये बदलेगी कभी और अपना.....
...अरे!अपना तो ख़ैर क्या है....!
ये जो दुनिया है
ये तो दुनिया है!
जय हिंद,जय श्रीराम,
कुँवर जी,