बुधवार, 24 फ़रवरी 2010

अब मै क्या बताऊँ...........(कविता)

किसी को ना बताऊँ तो कहाँ जाऊं मै!
भगवान् ने भी जो ना सुनी वो किसको सुनाऊँ मै!

जो हो गया सो तो हो लिया,
कुछ पा लिया कुछ कुछ खो दिया,
एक दुख़ और माला में पिरो लिया,
एक पल और आंसुओ से भिगो दिया;
जिन्दा होने का वहम भी हो तो मर जाऊं मै!
ओरो को तो बहला दू खुद को क्या समझाऊं मै!

काश के हँसना-रोना होता ही नहीं,
काश के यूँ सपने कोई संजोता ही नहीं,
काश के जो हो गया वो होता ही नहीं,
काश के ये 'काश' कभी खोता ही नहीं;
आंसू भी मेरे सूख चुके आँखों को कैसे अब रुलाऊँ मै!
पलकों के अन्दर जो है उसको कैसे वहां से हटाऊँ मै!

साथी बहुत है पर विश्वाश नहीं है,
जिसको पकड़ लूं वो एक आस नहीं है,
किसी को झुठलाने का ये प्रयास नहीं है,
और किसी के भी ऊपर ये कयास नहीं है;
कोई धोखा बचा ही नहीं जिसको अब खाऊं मै!
कोई काँधा जो मिल जाए तो शायद सर रख पाऊं मै!

कमी किसकी रही ये अब किसको सूझे,
कोई सवाल दिखे भी तो कोई बूझे,
किस्मत के अँधेरे में हम सायें को जूझे,
खुद ही जब साथ नहीं तो क्या संभालेंगे दूजे;
मौत जो आकर चली गयी अब उसको ही बुलाऊं मै!
                                           अँधेरे में जो जलाए थे वो हर दीप बुझाऊं मै!

कुंवर जी,

6 टिप्‍पणियां:

  1. bahut khub

    माणिक
    आकाशवाणी ,स्पिक मैके और अध्यापन से सीधा जुड़ाव साथ ही कई गैर सरकारी मंचों से अनौपचारिक जुड़ाव
    http://apnimaati.blogspot.com
    http://maniknaamaa.blogspot.com

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  2. अपने मनोभावों को बहुत सुन्दर शब्द दिए हैं।सुन्दर रचना है बधाई।

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  3. Waah! har ek panki me dher sari bhavanaae chupi hai..bahut hi sundar abhivyakti!! badhai aapko!
    http://kavyamanjusha.blogspot.com/
    aap word verification bhi hata dijiye ..sabko suvidha rahegi!

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत बहेतरीन प्रस्तुति.....मन कि बात को बखूबी से शब्दों का रूप दिया .......बंधाई

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  5. bahut hi sunder kavita hai !!!
    laya taal kuch is kadar bandhi hai ki padhne per kho jaana swatah swabhavik hai :)

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  6. आप सब का बहुत-बहुत धन्यवाद जो आप ने इसे ना सिर्फ पढ़ा बल्कि अपने विचार भी प्रकट किये!एक नवोदित के लिए इस से बढ़ कर इनाम नहीं हो सकता!

    भविष्य में भी ऐसे ही स्नेहाशीष देते रहना!एक बार फिर धन्यवाद आप सब का!

    कुंवर जी,

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