सितम्बर-06 ,तिथि सम्भवतः 29 या 30 ! दिन के १२ बजे के लघभग का समय!कुंवर जी कक्ष में शान्त,अकेले ओर गहन चिन्तन में!अधिकतर ऐसी स्थिति बहुत कम ही आती है जिनमे कुंवर जी इन तीनो के संग दिखाई दे!बात ही ऐसी हो गयी थी थोड़ी देर पहले!एक लम्बे अन्तराल के पश्चात जुलाई में जो नौकरी मिली थी वो छूट गयी थी,दूसरी का कोई इन्तजाम उस समय तो था नहीं!घर वालो को भी इस बात का अभी पता नहीं!
पता नहीं क्या हो रहा है,क्या होने जा रहा है?
इसी उधेड़-बुन में, जो कुंवर जी अक्सर करते है, आज फिर करने वाले थे! कलम और कागज़ के मिलन भर कि देर थी बस! और जो किया या हुआ वो आज आपके समक्ष है......
जारी है संघर्ष मेरा मुझको "मैं" बताने का,
बस में नहीं हैं कुछ मेरे इस बात को झुठलाने का!
हाड-मांस का भरा पूरा शारीर हूँ मैं,
मजबूरिओं और नाकामियो की तहरीर हूँ मैं,
बावजूद इसके बिना फूल चढी तस्वीर हूँ मैं,
जो बस अब खुलने वाली हैं वो ही तकदीर हूँ मैं,
अब भी कोई तर्क बचा हैं मुझे खुद को छुपाने का;
टूटा तारा तो नहीं हूँ इतना तो मुझे पता हैं,
बस कही पहुँच नहीं पता हूँ ये ही मेरी खता हैं,
कर सकता हूँ पर करता नहीं हूँ एक ये विपत्ता हैं,
उसे तो उठना ही पड़ता हैं जो एक बार कही गिरता हैं,
इसीलिए ढूंढ़ रहा हूँ मैं बहाना एक बार कहीं गिर जाने का;
मुझ पर हंसती हैं ये दुनिया तो हंसती रहे,
मुझे क्या हैं अपने वहम में लाख फसती रहे,
मै अभी हारा नहीं हूँ चाहे नाकामी मुझे यूं ही डसती रहे,
बनूँगा वो मशाल जो अनंत तक अथक जलती रहे,
बची राख सुनाएगी किस्सा मेरे इस तरह जल जाने का!
जारी है संघर्ष मेरा मुझको "मैं" बताने का,
बस में नहीं हैं कुछ मेरे इस बात को झुठलाने का!
ये वो कविता भी है जिसे पढ़ कर मै कभी-भी उस समय में छलांग लगा जाता हूँ जिसमे मै असल में कुछ भी तो नहीं था!हूँ तो अब भी नहीं,पर थोडा सा परिवर्तन आ गया है तब में और अब में!
इसी कविता ने मुझे एक पहचान दिलाने में अहम् भूमिका भी निभाई है!एक ऐसे वयक्तित्व कि नजरो में जिनको एक 'आदर्श मार्गदर्शक' कहे तो अधिक समीप होंगे हम उनका परिचय पाने के!
मुझे नहीं पता था कि मै क्या लिखे जा रहा हूँ,बस जो लिखा गया सो लिखा गया!या यूँ कहिये कि जैसा मुझे लग रहा था वैसा मै लिखे जा रहा था!और जो लिखा गया वो आप पढ़ ही चुके है!
कुंवर जी,
कैसे न भागे सबकुछ छोड़...
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गोविन्द जो खींचे अपनी ओर
कैसे न भागे सब कुछ छोड़.
न दिखे फिर निशा और न भोर
दिखे तो बस एक कोमल डोर.
कभी शून्य चेतन,कभी भावविभोर
उनसे रिश्ता निभाने चली,बाक...
6 दिन पहले






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