अरे!बस थोड़े से दिनों की तो ओर बात है,
देखो साल बदला है.....
तो हाल क्यों नहीं बदलेगा!
जब सुख तक चला गया तो इस दुःख की तो क्या औकात है!
रोशनिया तक खो जाती है तो
परछाइयों की क्या बिसात है!
सच मे;आँखे खोलो,
वो निशा तो गुजर चुकी,
हो गयी नव प्रभात है!
आओ हम सब मिल कर इस सूर्य-गति-आधारित नव वर्ष का अभिनन्दन करे....
जो कुछ भी हम अपने लिए अच्छा सोच सकते है वो ही सबके लिए सोचे....
जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,