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मंगलवार, 28 मई 2013

ये इमानदारी बढ़ाने वाली दवाई सच में कही मिलती है क्या...?(कुँवर जी)



आज जहा देखो वही भ्रष्टाचार, कपट, झूठ और बेईमानी.... बस सब यही दिखता है! कहते है पहले ये सब गुण "किसी अज्ञात डर" से कही कोने छुप कर रहते थे! यदा-कदा ही समाज में दिखने को मिलते थे!कही दिख गए जिसके संग तो उसे शर्मिंदगी भी महसूस होती दिखती थी!
परन्तु आजकल स्थिति इसके उलट होती जा रही है!ये सब गुण ही आजकल ज्यादा दिखाई दे रहे है!वो "अज्ञात" अज्ञात सा ही हो गया है!उसका डर भी अज्ञात ही बताया जा रहा है!
 

इमानदारी जैसे गुण लुप्त प्राय दिखने लगे है!लुप्त नहीं हुए है, ऐसा दिखने लगा है! एक तो  इमानदारी बेचारी अकेली पड़ गयी और वो दुसरे गुण कई सारे इक्कठे हो गए!
 

अब वो अज्ञात तो मानो गया! पर समस्या अभी भी ज्यू की त्यू खड़ी दिखाई देती है! ये सारे गुण जो कि समाज में अव्यवस्था पैदा करते है,असंतुलन पैदा करते  बढ़ते हुए ही दिख रहे है!
 

आज के शरीर विग्नानीयो ने कोई ऐसी दवाई तो बनाई ही होगी जो ऐसे गुणों को कम करके इमानदारी,सद्भावना और भाईचारे जैसी भावनाओं को बढ़ा दे!

कोई ऐसी मशीन अथवा कुछ भी चीज खोज ली गयी होगी जो प्राणी  स्वभाव या तो मानव स्वभाव को समझ के नियंत्रित कर दे!उसे समाज के हित के हिसाब से ही व्यवहार करने दे!

हो सकता हो कि  ये सब चीज़े (दवाई,मशीन) बहुत महँगी होगी जो अब तक मार्किट में नहीं दिखी! या फिर ये भी हो सकता है कि सरकार ने  ही रोक लगा दी हो इन पर…. सत्ता का सवाल है भई !
कोई दवाई या मशीन नहीं तो क्या हुआ….!क़ानून तो बना ही रखा है, जनता पर लागू  भी है!

 क़ानून..... नहीं; 
ये तो होने के बाद वाली वयवस्था है! और फिर वही बात अब ज्ञात का डर दिखाया जा रहा है! कोई ऐसा इलाज जिसमे डर  वाली भावना ही ख़त्म हो जाए !
होगा तो जरूर!

ये इमानदारी बढ़ाने वाली दवाई सच में कही मिलती है क्या...?
जय हिन्द, जय श्रीराम,
कुँवर जी,

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