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शुक्रवार, 11 मई 2012

शब्द गूंगे हुए तो तड्पी कलम...(कुँवर जी)


शब्द गूंगे हुए तो तड्पी कलम...

एक पल के लिए..
फिर सोचा
इसमें मेरा तो कोई दोष  नहीं!


शिथिल हुए हाथ तो रोया मन
एक पल के लिए
फिर सोचा
मैंने तो खोया अपना होश नहीं!

न कुछ कर-कह सके
तो रोई  आत्मा,
पर इस से ही तो 

ख़त्म हुआ उसका रोष नहीं!

जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुँवर जी,

लिखिए अपनी भाषा में