गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

एक क्षणिका

हर कोई

अनजान सा

यहाँ जीये जाता है,

न जाने

कौन सा पल

ठहर जाए पलकों पर!



जय हिंद,जय श्रीराम
कुंवर जी,

7 टिप्‍पणियां:

  1. @Aadarniya Apanatv ji-aapka swaagat hai ji, utsaahvardhan ke liye aabhaar...

    kunwar ji,

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  2. न जाने कौन-सा पल ठहर जाए पलकों पर......... बहुत ही उत्तम।

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  3. @संगीता जी,@राजपूत जी- आपके उत्साहवर्धन के लिये आभार,आपका स्वागत है!

    कुँवर जी,

    उत्तर देंहटाएं

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