सर्वप्रथम तो सभी को हाथ जोड़ कर प्रणाम !
ब्लॉग्गिंग में मेरा ये पहला अनुभव है,मुझे नहीं पता के इसके क्या-क्या सदुपयोग और क्या-क्या दुरूपयोग हो सकते है!मै अभी तो इसका प्रयोग केवल एक आलोकपुस्तिका कि तरह ही करूँगा जिसको कोई भी पढ़ ले और मै ये चेष्टा भी सदैव करता रहूँगा के इसके द्वारा किसी भी तरह की गलत जानकारी को पोषण मिलने के अवसर न मिले.......
अभी बस यही।
जय हिंद......
कैसे न भागे सबकुछ छोड़...
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गोविन्द जो खींचे अपनी ओर
कैसे न भागे सब कुछ छोड़.
न दिखे फिर निशा और न भोर
दिखे तो बस एक कोमल डोर.
कभी शून्य चेतन,कभी भावविभोर
उनसे रिश्ता निभाने चली,बाक...
6 दिन पहले






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