मै हूँ भी या नहीं
इसी असमंजस में
टूट जाता है
भौर वेला में चलता
कोई सुखद सा सपना
रोज!
परिवार सहारे मेरे..
हुह,
और मै भला किसके..?
जो भी हो
जिम्मेवारी तो मेरी ही है,,,
और फिर
सब कुछ भ्रम है,
ऐसा कोई कहे..
तो आत्मा पे अब कैसा ये
बोझ!
जय हिंद,जय श्रीराम,
कुँवर जी,