गुरुवार, 21 अप्रैल 2016

स्वयं घोषित और स्वयं प्रचारित शुद्रो और इनके हितैषियों से संवाद का एक प्रयास।

आजकल हमारे देश में दलहित भावना बहुत फल फूल रही है।वर्तमान प्रोमोशनल हाई प्रोफाइल शुद्र खूब प्रचार कर रहे है अपना।उन्ही से संवाद का एक प्रयास है।हालांकि उन्हें संवाद नहीं विवाद ही पसन्द आते है फिर भी प्रयास है।जो संवाद पसन्द हिन्दू है वो तो समझेगा ही ऐसा मेरा विश्वास है।                  
आजकल ये हाई प्रोफाइल प्रोमोशनल शुद्र ऐसा माहौल बनाते है जैसे बस अभी अभी इन लोगो के जन्म के बाद ही शुद्रो का, नारियो का उत्थान होना शुरू हुआ है।ये लालिये पैदा हो गए तो बच गए शुद्र और नारी नहीं तो हिन्दू धर्म ने तो ताड़ ही दिया होता और पता नहीं कब तक ताड़ते रहते इनको। हालाँकि ताड़ने को भी ये अपने हिसाब से समझेंगे।जिन्हें अपने सनातन इतिहास पर विश्वास ही नहीं वो खुद को शुद्र-नारी हितैषी दिखाने के लिए उसी का सहारा भी बड़ी बेशर्मी से लेते रहते है। कई युगों, हजारो-लाखो सालो की दो चार घटना को अधूरी और अपने हिसाब से घड़ कर प्रस्तुत करते हुए जरा भी नहीं लजाते। खैर लाज का इन्हें क्या पता होगा छोड़ो वो तो।

लेकिन जब उसी सनातन इतिहास के वर्तमान में खाटू श्याम के भी मन्दिर होने की बात आती है तो वो मुँह फेर लेते है। नारी को इतना सम्मान दिए जाने की बात आती है कि उसे पूज कर ही लोग देवतुल्य हो जाते है तो वो स्वयं क्या रही होगी, तो वर्तमान लालिये बहरे हो जाते है।

चलो ज्यादा पुरानी बात नहीं करते दो ढाई हजार साल की बात करते है। एक चक्रवर्ती  सम्राट एक चमार के चरणों में अपना सर रख देता है उसे अपने से ऊँचे स्थान पर बैठा कर सम्मान देता है।गुरु बनाता है। लालिये बोलेंगे हमे तो नहीं पता। तो बच्चों पढ़ो, जानो इतिहास को अपने। राजा भर्तृहरि और गोरख नाथ के बारे में रिसर्च करो। कितने ही वर्तमान प्रोमोशनल शुद्र रिसर्च कर रहे है उनको बोलो।शुद्र को कुछ ज्ञान की बात भी बताओ या उन्हें अनपढ़ रखने और रोटी-बेटी चिल्लाने की प्रेरणा ही देने का षडयंत्र तुम्हारा ध्येय है।


जय हिन्द,जय श्री राम।
कुँवर जी।

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