गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

जिन्दगी दौड़ रही है,तेज बहुत तेज...

जिन्दगी दौड़ रही है,तेज बहुत तेज...
हमको वही दूर कहीं छोड़...तेज बहुत तेज दौड़ रही है ये!


भाव सारे है यहाँ,कुछ कम कुछ ज्यादा....
बस कुछ को कुछ के ऊपर ओढ़...तेज बहुत तेज दौड़ रही है ये....


सपने दिखाती है,आँखे खुल भी जाती है कभी,
कभी सपनो को कभी हमें तोड़...तेज बहुत तेज दौड़ रही है ये....


मै साथ तो हूँ इसके,यही सोचता हूँ अधिकतर मै,
पर उसी पल मुझे झिंझोड़... तेज बहुत तेज दौड़ रही है ये...

8 टिप्‍पणियां:

  1. दौडती इस जिन्दगी में, साथ बना रहे हिम्मत का
    क़दमों तले कामयाबी हो सिक्का चले किस्मत का

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  2. बहुत बढ़िया चित्रण किया है आपने इस सुपरसोनिक विमान सी दौडती जिन्दगी का. बस इसमें तो आत्मबल से ही कामयाबी पायी जा सकती है, और अपनी किस्मत का सिक्का चलाया जा सकता है .

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  3. धन्यवाद है जी लगातार समर्थन और उत्साहवर्धन के लिए..
    कुंवर जी

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  4. सपने दिखाती है,आँखे खुल भी जाती है कभी,
    कभी सपनो को कभी हमें तोड़...तेज बहुत तेज दौड़ रही है ये....

    सच है ये जिंदगी समय की साथ नहीं चलती .. कभी तेज़ कभी सुस्त ...
    तभी तो कुछ क कुछ हो जाता है ... लाजवाब रचना कुंवर जी ...

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  5. बहुत बढ़िया चित्रण किया है आपने

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  6. वसंत पंचमी की ढेरो शुभकामनाए

    कुछ दिनों से बाहर होने के कारण ब्लॉग पर नहीं आ सका
    माफ़ी चाहता हूँ

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  7. zindagi aise daudti hai ki jab saans lene ke liye rukenge tab pata chalega sadiyon ke faasle tay kar liye...

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