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शनिवार, 27 नवंबर 2010

किस रंज के सायें में उल्लास है!



क्यों आज  आस ही   उदास है,
किस रंज के सायें में उल्लास है!

कर के मंथन कोई खुद ही,
कालकूट पीने का सा भास है!

दिल का दर्द यही  था बस,
या उसे छिपाने का ही ये प्रयास है!

बात छोटी हो या बड़ी,
भला क्यों ये अकेलेपन का एहसास है!

जय हिन्द,जय श्री राम,
कुंवर जी,

लिखिए अपनी भाषा में