मंगलवार, 22 सितंबर 2026

मोदी एक्ट सुना है आपने ?

 आजकल sc एक्ट  मोदी एक्ट कहने की होड़ सी लगी हुई हुई है, ऐसा क्या हुआ कि हिंदुत्व के नाम पर जो जन सैलाब मोदी जी पर एकमत हुआ था था उसमे आज दरार दिखाई दे रही है! मोदी जी ने हिन्दू हित के लिए काफी माहौल बनाया है, बहुत काम भी किये है! उधर योगी जी ने बहुत बढ़िया काम किये है लेकिन ये दलित ओबीसी सवर्ण वाली खाई बढ़ती सी दिखाई दे रही है! 

एक काम और बीजेपी में हुआ  है, वर्तमान विपक्ष जब सत्ता में था तब वो खुद को केवल मुस्लिम हितैषी दिखाना चाहता था, हिन्दू हित की बात केवल बीजेपी करती थी! लेकिन विपक्ष जनता को जातियों में बाँट कर राजनीती कर रही थी और धर्म के नाम पर वोट बटोरती थी! 

लेकिन आज वो तब तब का सत्ता पक्ष आज विपक्ष में आकर खुद को जनेऊधारी हिन्दू बताता फिर रहा है! दलितों वंचितों की जो राजनीती उस समय कांग्रेस इत्यादि दल करते थे वही आज बीजेपी करती दिखाई दे रही है! मोदी देश के प्रधानमंत्री होकर खुद को दलित घोषित करते है! एससी एक्ट को पहले से बहुत ज्यादा कठोर बनाते है, युनिवर्सिटी स्तर पर इस एक्ट को और अधिक कठोर बनाते है, इसी  गैर दलित जनता इस एक्ट को मोदी एक्ट कहने लगी है कहने लगी है की मोदी जी का कांग्रेसीकरण हो गया है! बड़े बड़े यु ट्यूबर , लेखक, व्यंग्यकार इस पर  लिख बोल रहे है! इसके पक्ष में भी विपक्ष में भी वीडियो बन रहे है!

अब आप लोग  ही बताए ये बात कितनी सही है ? लेकिन ये बात सही है कि गैर दलितों में मोदी के प्रति नाराजगी तो है!


जय श्रीराम 

जय हिन्द !

कुँवर जी!

शनिवार, 30 जुलाई 2022

'तुम' कह रहे हो ......... मै कैसे कहूं...?

 'तुम' कह रहे हो ......... मै कैसे कहूं...?

टपका दो ये आंसूं,
जो आँखों में
अटक गया है!
टपक जाएगा,
पहला तो नहीं टपकेगा!

तुम कह रहे हो
मत पछताओ,
जो हो गया
सो हो गया,
पहली बार तो नहीं हुआ है!

अरे जब
है 'मै' और 'तुम'
तो
'हमारे' और 'तुम्हारे'
तो होंगे ही!
तुमने तो कह दिया!

मै कैसे कहूं...?

कैसे कहूं कि
कल तक 'हमारो' में हमारा था मै!
आज
"हमारो" में "तुम"
हो के आया हूँ,

'अपनों' में 'तुम' हो कर

अब
रोऊँ मै किसके आगे?

उनके आगे
जो हमारे कभी बताये ही नहीं गए,
या फिर
उन अपनों के आगे
जो अपने ही दिखाई नहीं दिए!

"अपनापन" कहीं गिर ना जाए"

'तुम्हारो' की नज़र में
इसीलिए
नहीं टपकता
ये आँखों में अटका आंसू!

रविवार, 5 अप्रैल 2020

कोरोना के बाद बिना कोई मशीन छुए हाजिरी कैसे लगवाए?

कोरोना महामारी  ने विश्व के आगे अनेको चुनौतियों के पहाड़ खड़े कर दिए है! वर्तमान में तो जीवन ठप्प हो ही गया है, जब कोरोना का असर काम होगा/ख़त्म होगा, उसके बाद भी बहुत दिनों तक कोरोना की गूंज वातावरण में रहेगी ही! अभी कार्यलयो में जो हाजिरी  सिस्टम या अटेन्डेंस सिस्टम चला हुआ था ऊँगली या अंगूठे की पहचान द्वारा उस से लोग स्वाभाविक ही घबराएंगे! क्या पता जिसने मुझ से पहले पांच किया था उसकी अंगुली/अंगूठा बिलकुल साफ़ था या नहीं? जीवाणु/विषाणु रहित था या नहीं?

भले ही हम किसी को कहे या न कहे, लेकिन ये दर हमारे मन में अवश्य बना ही रहेगा  और ये एक हद तक सही भी है! जब केवल सुरक्षा ही बचाव है, ऐसे वातावरण में हमें सावधानी अवश्य ही रखनी चाहिए!

आजकल बाजार इतना प्रतिस्पर्धी व् हर समस्या का हल प्रस्तुत करने का इतना उत्सुक हो गया है कि हर समस्या का हल उसके पहले ही प्रस्तुत कर देता है! इस अंगुली/अंगूठा पंच सिस्टम से बचाने के लिए भी एक हल बाजार ने दे दिया है!
 अब आप इस लिंक में दिए गए वीडियो को ही देखिए!
इसमें दिखाया गया है कि  कैसे हम बिना किसी मशीन को छुए कैसे अपनी अटेन्डेंस लगा सकते है/लगवा सकते है! इस से न तो किसी भी प्रकार के संक्रमण फैलने का खतरा ना किसी भी प्रकार के भय  या वहम में रहने का डर!बेफिक्र होकर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाइये!
यहाँ पर आपको ऐसी मशीने व् इन से सम्बंधित हर प्रकार की समस्या का समाधान आसानी से उपलब्ध होगा!


गुरुवार, 2 अप्रैल 2020

श्री राम जन्मोत्सव की हार्दिक बधाई व् शुभकामनाये

जय श्री राम
 आप सभी को श्री राम जन्मोत्सव की हार्दिक बधाई व् शुभकामनाये!
मंगल भवन अमंगलहारी श्री राम का

शनिवार, 8 जून 2019

क्या कभी......(कुँवर जी)

जब किसी राह पर सब कुछ तपाती हुई इस धूँप से परेशान होते होंगे तो जरूर नजर किसी पेड़ को तलाश करती होगी! जैसे ही कही कोई छोटा मोटा  जैसा भी पेड़ दिखा नहीं कि सुस्ताने के लिए मन करता ही होगा! कही बहुत ज्यादा जल्दी ना हो तो कुछ देर पेड़ के नीचे रुक जाते भी होंगे , किसी शीघ्रता के कारण यदि ना भी रुके तो भी मन में उस छाँव का मोह तो उपजता ही होगा, काश; कुछ देर रुक पाते यहाँ!यदि रुक जाए तो अवश्य ही बहुत शान्ती मिलती होगी, मन से इस पेड़ को लगाने वाले के लिए बहुत आशीष भी निकलते होंगे!

क्या कभी ऐसा पेड़ लगाने की बात भी मन में आती है?

जय हिन्द, जय श्रीराम!
कुँवर जी !

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