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शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011

क्या तुम भी उन्हें कुछ कह नहीं पाते हो?

मुझे पता है
परिवर्तन संसार का नियम है,
फिर क्यूँ
न मै बदल सका न तुम बदले,
न हम बदले न हमारे नज़रिए बदले,
आज भी
जाती है तुझ तक मेरी नज़र
कुछ सवाल लेकर,
आज भी
कुछ भी बताती नहीं उनको तुम्हारी नज़र,
आज भी
बिना जवाब के लौटी मेरी नज़र
पूछती है मुझसे
जब
पता था ही तुम्हे
कि कुछ बताया नहीं जाएगा
तो भेजा ही क्यों था हमें वहा?

आज भी
मै कुछ कह नहीं पाता हूँ इनको !
क्या
तुम्हारी नज़र भी पूछती है तुमसे
कि क्यों हमें कुछ बताने नहीं दिया तुमने?
और
क्या तुम भी उन्हें कुछ कह नहीं पाते हो?

जय हिंद,जय श्रीराम
कुँवर जी,
 

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