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सोमवार, 1 जनवरी 2018

एक अद्भुत अनोखी फिल्म Curious case of Benzamin Button......(कुँवर जी)

Curious case of Benzamin Button......
एकदम अलग तरह की फिल्म लगी मुझे।विश्व युद्ध का समय दिखाया गया है।
शुरुआती दृश्य मे एक घड़ी का निर्माण दिखाया गया है जो उल्टी चलती है।सभी इसे मजाक मानते है लेकिन घड़ी निर्माता जब इस उल्टी घड़ी बनाने का कारण बताता है तो सभी भावुक होकर इसे स्विकार कर लेते है।वो चाहता है कि काश बीते हुए दिन वापस आ जाये।जो युद्ध मे मर गये है, अपने परिवार से बिछुड़ गये है वो वापस आ जाये।ये घड़ी इसी उम्मीद को दिखा रही थी कि काश समय वापस हो ले।
फिल्म का नायक जिस दिन पैदा होता है उसी दिन विश्व युद्ध के विराम की घोषणा हुई है। सभी बहुत खुश है। इधर Button परिवार भी बहुत खुश है कि आज ही के इतिहासिक दिन औलाद पैदा हो रही है। सभी बहुत नर्वस लेकिन सम्भावित खुशी के लिये रोमांचित भी है।जैसे ही लड़का जन्म लेता है, तभी बाहर से बहुत दूर से भागता हुआ नवजात का पिता लड़के की माँ के पास आता है वो बहुत ही मार्मिक दृश्य है।लड़का जन्म ले चुका है लेकिन किसी भी घरवाले के चेहरे पर खुशी के भाव नही है। जन्मोत्सव पर मरघट का सा मंजर है।नायक का पिता अपनी पत्नी के पास जाता है, वो मरणासन्न है।वो अपने पति को कहती है कि लड़के का ख्याल रखना.... और अन्तिम यात्रा को निकल जाती है। तब नायक का पिता नवजात नायक को देख कर घबरा जाता है। ऐसा लगता है कोई राक्षस हो छोटा सा।एक छोटी सी झलक नायक की तब मिलती है। नायक का पिता अपनी पत्नी की मौत और इस राक्षस जैसे बेटे को देख कर अन्दर से बुरी तरह टूट जाता है और उस नवजात शिशु को एक तौलिये मे लपेट कर बेहताशा दौड़ता जाता है और बहुत दूर एक सुनसान सी जगह मे एक ओल्ड हाउस के मुख्य द्वार के सामने उसे छोड़ आता है। थोड़े से पैसो के साथ।
उसी ओल्ड हाउस मे नायक की परवरिश होती है। नायक सामान्य लड़का नही है। वो बहुत बूढ़ा दिखाई देता है। बहुत ज्यादा बूढ़ा। उसके बचने की किसी को भी उम्मीद नही है फिर भी ओल्ड हाउस चलाने वाली लेडी उसे बहुत प्यार से पालती है।
सभी नायक को बहुत अजीब मानते है, दिखता भी है। उम्र मे बहुत छोटा लेकिन शरीर से बहुत बूढ़ा दिखाई जो देता है। 5-7 साल का होने पर भी वो चल नही पाता। उसके सर पर थोड़े बहुत सफेद बाल है, शरीर और चेहरे पर झुर्रिया है।70-80 साल का लगता है।वो अपने आप का और बाकी दुनिया का गहराई से विश्लेशण करता रहता  है।
एक हुले लुइया की महफिल का दृश्य भी आता है, कटाक्ष है करारा।लेडी उसे एक पादरी के पास लेकर जाती है, कि वो येशू से इसके लिये प्रार्थना करे और ये चल पड़े बिना बैसाखी के। पादरी हुले लुइया करता है जोर जोर से, बेंजामिन को मानसिक हौसला मिलता है और वो दो तीन कदम चल पड़ता है। सभी हुले लुइया हुले लुइया करने लग जाते है, लेकिन वो पादरी जो सबके लिये यीशु से प्रार्थना करता था लोगो के दुख दूर करवाता था, अपनी मृत्यु के लिये उसे प्रार्थना करने का समय भी नही मिलता।वही उसी समय मँच पर ही वो मर जाता है।

आगे सब उम्र मे बड़े होते जाते है लेकिन बेंजामिन उम्र मे बढ़ता तो है लेकिन शरीर से जवान होता जाता है। यही फिल्म की विशेषता है सब बूढ़े होते जाते है नायक जवान होता जाता है। आगे नायक को बस स्त्री भोग करता ज्यादा दिखाया गया है लेकिन वो ये सब देख रहा है कि उसके आस पास के लोग बूढ़े हो रहे है और मर रहे है और जवान होता जा रहा है। जब वो छोटा था तब भी लोग उसकी उम्र का विश्वास नही कर पाते थे अब वो बूढ़ा होता जा रहा तब भी लोग उसकी उम्र का विश्वास नही कर पाते है। अंत मे वो बच्चा हो जाता है और नवजात शिशु की तरह हो कर मर जाता है।
ये पूरी ऐसे आगे बढ़ती है कि फिल्म एक बूढ़ी औरत जो कि मरने वाली है हॉस्पिटल मे बैड पर पड़ी है को उसकी लड़की बेंजामिन की डायरी पढ़ कर सुनाती है। जैसे जैसे फिल्म आगे बढ़ती है बेंजामिन से उनका क्या रिश्ता रहा था पता चलता है।ये फिल्म देख कर ही पता करना आप लोग।
ब्रैंड पिट का अभिनय बाँधे रखता है और बूढ़े पिट का अभिनय बहुत ही जबर्दस्त।
ऐसा तो मुझे लगा था खैर। आप भी देखे और बताए कुछ ज्यादा तो नही कह दिया मैने।
संक्षिप्त मे फिल्म ऐसी है कि
एक बच्चा पैदा होता है जो फिजिकली और मेंटली बूढा होता है  जैसे जैसे उम्र बढ़ती है वह फिजिकली और मेंटली age में घटता जाता है ।
 तो बुढापे मेंऔर जवानी में जो उसकी wife होती है वह बुढ़ापे में उसे बच्चे की तरह मरते देखती है
 मतलब एक अकेला बन्दा जो अपनी age reiwind मे जीता है।जब देखोगे तो लगेगा कि इतनी छोटी छोटी detail कैसे दिखाई गयी है।
मतलब इसके बच्चे तो होते है 30 या 35 साल के और ये 16 साल के टीनेजर की तरह नासमझ रहकर उनसे डरता सा है जैसे...
और यह फ़िल्म रुकती नही। physical age और मेन्टल age का inverse चलता है इसमें ।

अन्ग्रेजी मे तो नही देखा मैने इसको। इस फिल्म को हिन्दी मे आप यहाँ देख सकते है।

जय हिन्द, जय श्री राम
कुँवर जी।।

रविवार, 31 दिसंबर 2017

अब अबोध बालको और उनके कुटिल अभिभावको को साँस खुल कर आ रही है।.... (कुँवर जी)

अभी अभी #25_दिसम्बर बोले तो #क्रिसमस का त्योहार गया है जो हमारे सेक्युलर इण्डिया मे पुरे जोश के साथ मनाया गया था, बाकायदा ऐसी खबरे राष्ट्रिय अखबारो,न्यूज चैनलो पर आईं थी भई, मै अपनी ओर से नही कह रहा हुँ। पटाखे शटाखे खूब चले होन्गे, दिवाली के जैसे बैन थोड़े ही था उन पर तो खूब बोले तो खूब। हर-हर सैंटा घर-घर सैंटा सा हो गया होगा ऐसा सा ही दिखा रहे थे राष्ट्रिय न्यूज चैनल तो।

देश हित मे ऐसी खबरे खैर जरुरी भी है जिस से देश का #सेक्युलरपना बचा रहे #वेटिकन की नजरो मे भी आया रहे छाया रहे। पापी पेट का सवाल है भई हे हे हे हे.... दुकाने भी चलती रहे चलनी भी चाहिये सभी को अधिकार है खुल कर जीने का।यही तो हमारे संविधान की विशेषता है।

खैर आइये आगे बढ़ते है मतलब थोड़ा पीछे हटते है, पापी पेट का ख्याल करने वालो ने पर्यावरण का ख्याल भी किया थोड़े दिन पहले। दिवाली के समय धुँध मे धुआँ खोज निकाला था।फोग को स्मॉग नाम दे दिये थे।बोत ही किरान्तिकारी खोज।पुरे देश मे सँसार मे इसकी भूरी भूरी प्रशंश हुई।#निर्णालय ने भी सहमती दी और प्रकृती को बचाने के लिये कठोर निर्णय लिया और हिन्दुओ के एक त्यौहार #दिवाली जिसे लोग पटाखे आदि चला कर मनाते है पर पटाखो पर #बैन लगा दिया।


चलिये बरत्मान मे आ जाते है।पोस्ट मे जो चित्र है गुरुग्राम से पाँच मिनट पहले के है,मल्लब साढ़े 8 से अधिक का समय हो चला है लेकिन सूर्य देवता का कही अता-पता नही है। धुँध का वर्चस्व है लगता है सूरज जी भी कही धुँध मे धुआँ होने से डर तो नही गये। स्मॉग उनकी रसायनिक प्रक्रिया को बाधित कर सकता है, उनका जीवन खतरे मे आ सकता है।वो क्या है ना उनको भी अपने पर्यावरण की चिन्ता है भई, आखिर खुद जल कर रोशनी कर रहे है।और फिर #सेक्युलर भी तो है,सेक्युलर को तो जलते रहना ही चाहिये हे हे हे हे.....
खैर छोड़िये आइये आगे ही बढ़ते है।

लेकिन लेकिन लेकिन वो धरती के पर्यावरण हितैषी, प्रकृती प्रेमी अभी दिखाई नही दे रहे। इस धुँध मे इनको धुआँ नही दिख रहा है, कोई #प्रदूषण_दिल्ली_एनसीआर मे रहा ही नही या वो केवल दिवाली पर ही होता है? स्मॉग की स्मेल्ल नही आ रही या नाक खराब हो गया है?
कोई मल्लब कोई भी हेलिकॉप्टर से पानी की बारिश करवाने की बात नही कर रहा है।
वो अबोध बालक जो दीवाली से पहले निर्णालय मे खड़े हो गये थे मास्क पहन कर उनको भी खुल कर साँस आ रही है अब। उनके कुटिल अभिभावको को भी।

खैर छोड़िये इस देश मे ऐसा ही चलता रहा है, ऐसे ही चलता रहेगा।क्या हुआ जो सरकार बदल गई, हम तो नही बदले है ना, हमारे पेट तो नही बदले है ना। पेट आज भी पापी ही है हे हे हे हे।

जय हिन्द,जय श्री राम।
कुँवर जी।।

शनिवार, 1 अक्टूबर 2016

छद्यम सेक्युलरजिम अर्थात समाज से छद्यम व्यवहार!....(कुँवर जी)

आजकल देश में बड़ा  माहौल बना हुआ है! सनातन संस्कृति और परम्पराओ को लेकर कोई भी कभी भी कुछ भी टिपण्णी कर देता है और कमाल की बात ये है कि हर गलत टिपण्णी को भी पर्याप्त समर्थन मिल जाता है!आजकल तो माननीय न्यायलय भी  है, लेकिन न्यायलय भी ऐसा दखल केवल सनातन हिन्दू परम्पराओ,रीती रिवाजो में ही देता है! अन्य सम्प्रदायो-मजहबो में उन्हें भी कुछ अनुचितदिखाई नहीं देता,भले ही छोटे छोटे बच्चो को भी भयंकर यातना देने वाली खतना जैसी प्रथा वह मौजूद हो!तब कोई मानवाधिकार आयोग अथवा तो बाल शोषण को लेकर बना कोई आयोग अथवा NGO भी सामने नहीं आते!ईद पर जो कत्लेआम होता है उसका एक उदाहरण ईद से अगले ही दिन आई बरसात के बाद के फोटो जो सामने आये थे बांग्लादेश के, उनसे मिलता है!पर कहीं कोई आवाज  खिलाफ,जबकि हिन्दुओ के जल-दूध आदि मूर्ति को चढाने को लेकर भी कोई भी टिपण्णी  है, ऐसा न करने की सलाह देता दिख जाता है!

घूँघट को कोसने वाले सब नारीवादी व्यक्ति-संघटन और  भी, बुर्के पर मौन हो जाती है!तीन तलाक़ के लिए उनके पास बोलने को तीन शब्द भी नहीं मिलते!हिन्दू परम्परा में विवाह एक बहुत ही महत्वपूर्ण परम्परा है! व्यक्तिगत दोनों दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण और नितांत आवश्यक है, कुछ स्वयम घोषित क्रान्तिकारी इस प् भी प्रश्नचिन्ह लगाते है!लिव-इन रिलेशनशिप को  है!अरेंज मैरिज जो कि समाज के लिहाज से और नारी की सुरक्षा और सम्मान की दृष्टि से सुन्दर व्यवस्था है; इसको ही गलत बताने लग जाते है!

आज  नवरात्रो का शुभारम्भ है! पहले ३ नवरात्रे मान शक्ति की आराधना के बताए जाते है!कितने ही हिन्दू जन ही इन दिनों में माँस आदि खाने की बात सार्वजनिक मंचो पर  दिखाई देंगे!माँ शक्ति, माँ दुर्गा को गलत सिद्ध करते दिखेंगे!ऐसा कर के वो पता नहीं क्या सिद्ध करना चाहते है!अचंभित करने वाली  है कि नारीवादी व्यक्ति-सघठन और नारिया भी ऐसा करने  में आगे दिखती है!इनमे अधिकतम कम्युनिस्ट वाम दाल से  होते है  इसमें कोई दो राय नहीं है!लेकिन बहुत  को हिन्दू बताने वाले भी मिलेंगे!जिनकी सुन्दर और सनाज के के लिए हितकर हिन्दू आस्थाओ-परम्पराओ में भी श्रद्धा नहीं वो कैसा हिन्दू भला?

 ऐसे विचारक स्वयं को धर्मनिरपेक्ष बताते है और सेक्युलर कहलवाते है!लेकिन असल में ये छद्यम सेक्युलरजिम है अर्थात समाज से छद्यम व्यवहार है!सभी को सामान मानने और किसी को भी कुछ न मानने में अंतर होता है !

जय हिन्द, जय श्री राम,
कुँवर जी!

मंगलवार, 2 दिसंबर 2014

जिन्दगी तुझे ही तो ढूँढ रहे थे.....(कुँवर जी)

अनजानों में कही छिपा होता है 
जाना-पहचाना सा कोई
कभी रास्ते बदल जाते है
तब जान पड़ता है
कभी राहे वो ही रहती है
नजरिये नहीं बदलते
और लोग बदल जाते है।

फिर कही दूर किसी मोड़ पर
पलटते है हम
ना जाने क्या सोच कर
साँस समेट कर धड़कन रोक कर
और 

और पीछे से जिन्दगी छेड़ती है हमे
कहती है कि मै यहाँ तेरी राह तक रही
तू किसकी राह देखे।
मन के चोर को मन में छिपा 
आँखों मिचका कर 
कहते हम भी फिर
अरे तुझे ही तो ढूँढ रहे थे।
चलो चलते है।

जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुँवर जी ,

मंगलवार, 15 जुलाई 2014

मौन..... (कुँवर जी)

मौन.....
.
.
.
जिह्वा तालु को सटी है,
और अंतर में फिर भी शोर है,
क्या वहा मुझ से अलग कोई और है…
.
.
ये कैसा मौन है, ये कौन मौन है…?


जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुँवर जी

शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

फिर आतंकियों ने सेना पर हमला बोल दिया.....(लघु कथा )...(कुँवर जी)

मिश्रा जी ने चाय को ऐसे पिया जैसे किसी काढ़े का घूँट भर रहे हो!उनकी बहन घर पर आई हुयी थी,उन्होंने पूछा क्या हुआ चाय में चीनी की जगह नमक डाल दिया है क्या?
मिश्रा जी मुखमंडल पर दार्शनिक सी आभा को दिखाते हुए से बोले,"आज का अखबार तो देखो... फिर आतंकियों ने सेना पर हमला बोल दिया, कितने जवान शहीद हो गए!बोलते-बोलते वो सच में ही भावुक हो गए!फिर किसी की माँग सूनी हो गयी होगी,कितनी राखी कलाइयों को तरस जायेगी!कितनी माँ बस राह ताकती रह जायेगी!"
अखबार को अपने मन की तरह मसोस कर एक तरफ फेंक कर ऐसे ही बडबडाते हुए वो अपने कमरे की और चल पड़े,घडी की और नजर पड़ी तो ...." ओहो, आज फिर लेट हो जाऊँगा,अपनी पत्नी को लगभग धमकाते हुए वो बाथरूम की और दौड़े,"तुम्हे भी समय का पता नहीं चलता क्या?बताना तो चाहिए!आज तो वैसे भी एटीएम होकर जाना था,पांच-दस मिनट वहाँ भी लग जायेंगे!"
पत्नी बेचारी अपनी ननन्द की वजह से अपने सारे गुबार अपने ही अन्दर रखते हुए बोली,"नहाना बाद में, पहले अपने जीजा जी से बात तो कर लो.... क्या पता आज भी आये न आये!" पलट कर होंठ पीटती सी रसोई की और चली गयी!
मिश्रा जी की बहन को लगा की शायद वो ये कहती गयी है कि" रोज इसे लेने के लिए आने कि कह देते है....और आ रहे है नहीं!
उधर मिश्रा जी फोन काट कर बोले,"आज फिर बिना नहाये ही जाना पड़ेगा,खाना जैसा भी,जितना भी बना हो पैक कर दो!मैंने बोल दिया है जीजा जी को आज तो वो आ ही जायेंगे सो एटीएम तो जाना ही पड़ेगा!"
मिश्रा जी की बहन सोफे के एक कोने में फडफड़ाते  हुए अखबार को एक तक देखे जा रही थी,जैसे उसमे वो खुद को तलाश रही हो!

जय हिन्द,जय श्री राम,
कुँवर जी,   

शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

क्या पता कौन-कहाँ घात लगाए बैठा हो!...(कुँवर जी)

दिन में भी मध्यरात्रि  सा सन्नाटा पसरा था!सूरज जैसे कोई नाराजगी दिखा रहा हो!हवा भी खीजी सी पड़ी थी,तपी हुयी चीखती-चिल्लाती बस वही जहाँ-कहाँ  धुल उडाती सी जलाती फिर रही थी!ऐसे में कबूतर का एक परिवार जिसमे दो व्यस्क और दो बच्चे थे,उड़ने का साहस दिखा रहे थे!
जीने की चाह भी मरने को मजबूर कर देती है!बैठे रहते तो भूख-प्यास से मरते और उड़ रहे है तो गर्मी-लू से मरने का अंदेशा, पर उड़ेंगे तो शायद  कही कुछ मिल जाएगा खाने-पीने को बस यही आस झेल रही थी गरम हवा को भी!
आखिर उनकी हिम्मत और मेहनत ने एक छत पर कुछ आस दिखाई!एक कोने में एक टोकरी किसी लकड़ी के सहारे कुछ ऐसे खड़ी की हुई  थी कि उसके निचे रखे हुए पानी के बर्तन पर धुप न पड़े और उसका पानी गर्म न हो!उसे देख कबूतरों की जान में जान आ गयी!और अधिक वेग से वे वह तक पहुंचे!वह पहुँच कर देखते है कि कुछ चावल भी वहा पड़े हुए है
कोटि-कोटि आशीष उनके तन-मन से फूटने लगे उस चावल और पानी को रखने वाले के प्रति !व्यस्क कबूतर ने मन में विचार किया कि थोडा पानी पी  और कुछ चावल खा लूँ  और थोडा सुस्ता लूं,फिर थोड़ी जान आ जाएगी इस लू में फिर से उड़ने की!तब अपने अन्य साथियों को भी यही बुला लाऊंगा!

चारो जीव परमात्मा और उस दाना-पानी को रखने वाले का धन्यवाद करते हुए अपनी भूख-प्यास को शांत करने लगे!वो  सोच रहे थे कि  धर्म अभी भी जिन्दा है, सबका हित चाहने वाले है अभी भी!हम जैसे निरीह बेजुबानो की परवाह करने वाले है धरा पर!

तभी  जैसे कोई  भूचाल सा आया हो,  जिस लकड़ी के सहारे वो टोकरी खड़ी थी…… अचानक ...... झटके से सरकी , वयस्क कबूतर तो उस हलचल को भांप गए थे!जब तक टोकरी गिरती तब तक दोनों बहार थे!पर दोनों बच्चो को अभी इतना अनुभव नहीं था .... सो जब तक उनकी समझ में कुछ आता तब तक वो  घुप्प अँधेरे में आँखे फाड़ रहे थे, बेचैनी में टोकरी से सर टकरा रहे थे!

जिस लकड़ी के सहारे वो टोकरी खड़ी  थी उसके निचले सिरे से एक बहुत महीन सा धागा बंधा हुआ था,जिसे वहाँ  से थोड़ी दूर कोने में अजित और सलिल पकड़े बैठे थे!दोनों पांचवी कक्षा में पढ़ते थे,गर्मियों की छुटियाँ चल रही थी!खली दिमाग शैतान का घर!दोनों को शरारत सूझी और कोई पंछी पकड़ने की चाह ने ये पूरा ताम-झाम जमवा दिया!दोनों ख़ुशी से किलकारियां मारते हुए, उछालते हुए आए!दोनों बहार बचे कबूतर फर्र्र से उड़ कर दूर जा बैठे और अपने दोनों नन्हे मुन्नों को देखने की आस लिए बैचनी से इधर-उधर चक्कर काटने लगे!अब उन्हें कोई लूं-गर्मी अथवा धूप की सुध नहीं रही थी!
दोनों मन में प्रार्थना कर रहे थे कि अभी बस वो दोनों उस टोकरी से कैसे भी निकल आये बस!फिर तो अपने कुटुम्ब में जाकर सबको यही बताना है कि यहाँ मत आये... यहाँ क्या ऐसी किसी भी जगह जरा सोच-समझ कर ही जाए!क्या पता कौन-कहाँ घात लगाए बैठा हो!

  

जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुँवर जी,

बुधवार, 26 जून 2013

प्रकृति ने की क्रिडा तो उपजी पीड़ा...(कुँवर जी)

जब तक चली तो खूब खेला
मानव प्रकृति संग
और जब
प्रकृति ने की क्रिडा
तो उपजी पीड़ा,
विश्वाश 
कही घायल पड़ा
लोगो से नजरे चुरा
कराह रहा है,
श्रद्धा
किसी पेड़ की टहनी में
अटकी हुई सी
किसी कीचड़ में दबे चीथड़े में
सिमटी हुई सी मौन है!
आस है कि
टकटकी लगाये बैठी है
उसी की और ही
जिसने
ये तांडव मचाया है!


जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुँवर जी

बुधवार, 19 जून 2013

विवादित धारावाहिक "जोधा-अकबर" पर प्रतिक्रिया......(कुँवर जी )

 जी टीवी पर दिखाए जाने वाले विवादित धारावाहिक "जोधा-अकबर" पर अपनी प्रतिक्रिया जी टीवी तक सीधी पहुंचाए!
 पता  लगते रहना चाहिए कि  वो क्या दिखा रहे है उसका इस देश पर, समाज पर, इतिहास पर  और उनकी साख पर क्या प्रभाव पड़  रहा है!


प्रतिक्रिया देने के लिए यहाँ क्लिक करे!

जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुँवर  जी

सोमवार, 15 अक्टूबर 2012

प्रतिक्रिया......(कुँवर जी)

अभी अनामिका जी को यहाँ पढ़ा तो   
सच में बोलती ही बंद हो गयी!कई दिन बाद स्वतः ही कुछ मौन से फूटा!आज वो ही आपके समक्ष!आज हम सब बुत से बन गए है!कोई प्रतिक्रिया कर ही नहीं रहे है है किसी भी कुरीति के विरोध में!बस आज यही....


देशवासियों तुम मूक ही रहना....
जब खुद की बारी आएगी..
तब आत्मा तक चिल्लाएगी,
सब चीख-ओ-पुकार तुम्हारी
सुन कर भी अनसुनी हो जायेगी,
तब तक
देशवासियों तुम मूक ही रहना....
 

तड़पती-तरसती आँखे तुम्हारी
जैसे अब तुम मूक हो,
तब सब को मूक देख पछताएगी!

बिना पछताए कहा 
हमारे बात समझ में आएगी!
तो 
तब तक
देशवासियों तुम मूक ही रहना...!


जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुँवर जी,

लिखिए अपनी भाषा में