आजकल विवाहों के उत्सव का माहौल है हर तरफ!ना चाहते हुए भी जाना पड़ रहा है बहुत सी जगह तो!किन्तु इस बार हर जाने पर एक विचार जो मन में कुलबुलाने लगता है,या यूँ कहे कि कुलबुलाता रहता है!
मै सोच रहा हूँ कि जब भी हम किसी के ऐसे उत्सव(बड़े या छोटे) में शामिल होते है,तो क्या हम हर बार उस उत्सव के सफल होने कि कामना करते है?
कई बार हमें किसी के मरणोपरांत उनके परिवार से मिलने जाते है,तो क्या हम दिल से एक बार भी स्वर्गीय आत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थना करते है?
किसी विवाहोत्सव में शामिल को होने पर क्या हम उस विवाह समारोह के शांतिपूर्ण सफल होने ओर उन दोनों का जीवन सुखपूर्वक व्यतीत होने की प्रार्थना करते है!
किसी रोगी या दुखी से मिलते है या सोचते है तो क्या उसके रोग और कष्टों के निवारण की प्रार्थना हम परमात्मा से करते है?
किसी दरिद्र को देखने पर या उसे कुछ देते समय उसकी दरिद्रता समाप्त करने की प्रार्थना हम परमात्मा से करते है?
क्या हम दिल से किसी परिचित अथवा अपरिचित के दुःख या सुख में भागीदार बनते है...???
आज बस यही......
जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,
मै सोच रहा हूँ कि जब भी हम किसी के ऐसे उत्सव(बड़े या छोटे) में शामिल होते है,तो क्या हम हर बार उस उत्सव के सफल होने कि कामना करते है?
कई बार हमें किसी के मरणोपरांत उनके परिवार से मिलने जाते है,तो क्या हम दिल से एक बार भी स्वर्गीय आत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थना करते है?
किसी विवाहोत्सव में शामिल को होने पर क्या हम उस विवाह समारोह के शांतिपूर्ण सफल होने ओर उन दोनों का जीवन सुखपूर्वक व्यतीत होने की प्रार्थना करते है!
किसी रोगी या दुखी से मिलते है या सोचते है तो क्या उसके रोग और कष्टों के निवारण की प्रार्थना हम परमात्मा से करते है?
किसी दरिद्र को देखने पर या उसे कुछ देते समय उसकी दरिद्रता समाप्त करने की प्रार्थना हम परमात्मा से करते है?
क्या हम दिल से किसी परिचित अथवा अपरिचित के दुःख या सुख में भागीदार बनते है...???
आज बस यही......
जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,