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मंगलवार, 30 नवंबर 2010

जूझते है हम....और जुझारू वो है???...(कुंवर जी)

जिनको हमने अपना नेता बनाया
वो ही दुश्मन हुए हमारे,
हम उनको और
वो कुर्सी को पूजते रहे,
अब उनकी तिजोरिया है
कि भरती ही जा रही है,
और हम वैसे ही पहले की तरह
दो वक़्त की रोटी को ही जूझते रहे!
जूझते है हम
जिन्दंगी से जिन्दगी भर
और जुझारू वो है
बस हम तो
इस पहेली को ही
बूझते रहे!

जय हिन्द,जय श्रीराम
कुंवर जी,

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