शनिवार, 30 जुलाई 2022

'तुम' कह रहे हो ......... मै कैसे कहूं...?

 'तुम' कह रहे हो ......... मै कैसे कहूं...?

टपका दो ये आंसूं,
जो आँखों में
अटक गया है!
टपक जाएगा,
पहला तो नहीं टपकेगा!

तुम कह रहे हो
मत पछताओ,
जो हो गया
सो हो गया,
पहली बार तो नहीं हुआ है!

अरे जब
है 'मै' और 'तुम'
तो
'हमारे' और 'तुम्हारे'
तो होंगे ही!
तुमने तो कह दिया!

मै कैसे कहूं...?

कैसे कहूं कि
कल तक 'हमारो' में हमारा था मै!
आज
"हमारो" में "तुम"
हो के आया हूँ,

'अपनों' में 'तुम' हो कर

अब
रोऊँ मै किसके आगे?

उनके आगे
जो हमारे कभी बताये ही नहीं गए,
या फिर
उन अपनों के आगे
जो अपने ही दिखाई नहीं दिए!

"अपनापन" कहीं गिर ना जाए"

'तुम्हारो' की नज़र में
इसीलिए
नहीं टपकता
ये आँखों में अटका आंसू!

रविवार, 5 अप्रैल 2020

कोरोना के बाद बिना कोई मशीन छुए हाजिरी कैसे लगवाए?

कोरोना महामारी  ने विश्व के आगे अनेको चुनौतियों के पहाड़ खड़े कर दिए है! वर्तमान में तो जीवन ठप्प हो ही गया है, जब कोरोना का असर काम होगा/ख़त्म होगा, उसके बाद भी बहुत दिनों तक कोरोना की गूंज वातावरण में रहेगी ही! अभी कार्यलयो में जो हाजिरी  सिस्टम या अटेन्डेंस सिस्टम चला हुआ था ऊँगली या अंगूठे की पहचान द्वारा उस से लोग स्वाभाविक ही घबराएंगे! क्या पता जिसने मुझ से पहले पांच किया था उसकी अंगुली/अंगूठा बिलकुल साफ़ था या नहीं? जीवाणु/विषाणु रहित था या नहीं?

भले ही हम किसी को कहे या न कहे, लेकिन ये दर हमारे मन में अवश्य बना ही रहेगा  और ये एक हद तक सही भी है! जब केवल सुरक्षा ही बचाव है, ऐसे वातावरण में हमें सावधानी अवश्य ही रखनी चाहिए!

आजकल बाजार इतना प्रतिस्पर्धी व् हर समस्या का हल प्रस्तुत करने का इतना उत्सुक हो गया है कि हर समस्या का हल उसके पहले ही प्रस्तुत कर देता है! इस अंगुली/अंगूठा पंच सिस्टम से बचाने के लिए भी एक हल बाजार ने दे दिया है!
 अब आप इस लिंक में दिए गए वीडियो को ही देखिए!
इसमें दिखाया गया है कि  कैसे हम बिना किसी मशीन को छुए कैसे अपनी अटेन्डेंस लगा सकते है/लगवा सकते है! इस से न तो किसी भी प्रकार के संक्रमण फैलने का खतरा ना किसी भी प्रकार के भय  या वहम में रहने का डर!बेफिक्र होकर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाइये!
यहाँ पर आपको ऐसी मशीने व् इन से सम्बंधित हर प्रकार की समस्या का समाधान आसानी से उपलब्ध होगा!


गुरुवार, 2 अप्रैल 2020

श्री राम जन्मोत्सव की हार्दिक बधाई व् शुभकामनाये

जय श्री राम
 आप सभी को श्री राम जन्मोत्सव की हार्दिक बधाई व् शुभकामनाये!
मंगल भवन अमंगलहारी श्री राम का

शनिवार, 8 जून 2019

क्या कभी......(कुँवर जी)

जब किसी राह पर सब कुछ तपाती हुई इस धूँप से परेशान होते होंगे तो जरूर नजर किसी पेड़ को तलाश करती होगी! जैसे ही कही कोई छोटा मोटा  जैसा भी पेड़ दिखा नहीं कि सुस्ताने के लिए मन करता ही होगा! कही बहुत ज्यादा जल्दी ना हो तो कुछ देर पेड़ के नीचे रुक जाते भी होंगे , किसी शीघ्रता के कारण यदि ना भी रुके तो भी मन में उस छाँव का मोह तो उपजता ही होगा, काश; कुछ देर रुक पाते यहाँ!यदि रुक जाए तो अवश्य ही बहुत शान्ती मिलती होगी, मन से इस पेड़ को लगाने वाले के लिए बहुत आशीष भी निकलते होंगे!

क्या कभी ऐसा पेड़ लगाने की बात भी मन में आती है?

जय हिन्द, जय श्रीराम!
कुँवर जी !

बुधवार, 20 मार्च 2019

प्रोपगेंडा फैलाने की प्रयोगशाला टीवी विज्ञापन के प्रयोग और उसके असर (कुँवर जी)

सिनेमा और टीवी व विज्ञापन की ताकत को वामपंथी कसाई ईसाई पापीये कंगले खूब समझते है, और विज्ञापन जगत में अच्छी पकड़ भी इन्होंने बनाई है। अपने प्रोपगेंडा को जनमानस के मानस में उतारने के लिए इनका बखूबी प्रयोग भी ये करते है। सबसे ताजा उदाहरण आपको #सिर्फ_एक्सेल वाला ध्यान होगा। आजकल एक हॉटस्टार के ऑनलाइन वीडियो सीरीज़ का विज्ञापन आता है, बदलाव की बयार बहाने वाला।

उसमे दिखाया जा रहा है कि अपने यहाँ बाप और बेटा दोस्त नही हो सकते, लेकिन चलो बदलते है, और बाप बेटा साथ दोस्त बन कर दिखते है। आगे दिखाया जाता है कि छोटे शहरों में बड़े बिजनस की शुरुआत अपने यहाँ नही होती, लेकिन बदलते है, और एक छोटे शहर में कार का डिजाइन तैयार होता दिखता है। ऐसे कुछ क्रान्तिकारी बदलाव के बीच दिखाया जाता है कि एक कपल डाँस पार्टी में दो लड़के गले मे बाहें डाले खड़े है, स्लोगन बोला जाता है कि अपने यहाँ ऐसे प्यार की कोई जगह नहीं, लेकिन बदलते है, और दोनों लड़के और अधिक लिपट जाते है और सभी उनको नॉर्मली ले रहे होते है।

आप समझ गए होंगे, कैसे विज्ञापन जगत और ये सिनेमा, बल्कि आजकल का ऑनलाइन शार्ट फ़िल्म जगत कैसे समाज को खोखला कर रहे है। ये विज्ञापन टीवी सीरियल में, मैच के बीच मे किसी भी समय चल जाता है, जब पूरा परिवार टीवी देख रहा होता है, बच्चे भी। बड़े तो चलो बच भी जाए इस विज्ञापन के अस्त्र से, लेकिन ये बच्चो के भोले मन गंद का बीज तो बो ही जाएगा। एक बहुत गन्दी बात, जो सदा ही धिक्कारने के, दुत्कारने के लायक ही रहेगी, उसे बच्चे देख कर ऐसा तो चलता है वाली फिलिंग लेने लग जाएँगे। उफ्फ, कितना बुरा माहौल बनाया जा रहा है।

चूँकि इन सब गन्दी हरकतों को केवल इस्लाम ईसाई और वामपंथी जैसे गलीज पंथों में ही मान्यता है तो उनको इन से कोई दिक्कत नही होगी, लेकिन एक सनातनी परिवार के लिए तो ये एक गम्भीर समस्या ही है। आजकल सनातनी परम्परा की और झुकाव केवल बीजेपी का ही है, अन्य किसी पार्टी का नही है, और इन वामी कामी झामी सभी को इस पार्टी की आम जन में बढ़ती लोकप्रियता गम्भीर समस्या बनी हुई है। आम जन में बीजेपी के और इसकी नीति के प्रति विक्षोभ पैदा करने के लिए पुनः आम विज्ञापन का अस्त्र चलाया गया है।

डेली हंट न्यूज़ पोर्टल है शायद कोई, उसका विज्ञापन देखा। उसमे आदमी को तोता बना दिखाया गया है, और प्रेरणा दी गयी है कि हमे सचेत रहना चाहिए, अपने विवेक का प्रयोग करना चाहिए, किसी के कुछ भी कहने को ऐसे ही नही मान लेना चाहिए। आपको लगेगा इसमे भला गलत है ही क्या? लेकिन इनकी चाल ही ऐसी होती है कि एकदम तो बहुत अच्छी, बल्कि बहुत जरूरी भी लगती है। अब इसमें दिखाया गया है कि किसी ने कह दिया कि GST ने सब बहुत सरल कर दिया है, तोता बना आदमी ये बात मान लेता है, आगे भी बोलता है कि जीएसटी ने तो सब एकदम सरल कर दिया है। फिर आता है एक तत्वज्ञानी, वो बोलता है ऐसे ही किसी के तोते मत बनो कि जीएसटी ने सब सरल कर दिया। देखो डेली हंट और जागरूक बनो। किसी का तोता मत बनो। अब ये विज्ञापन केवल डेली हंट का ही था क्या? जरूरी नही के अपने पक्ष में ही कुछ दिखाओ बोलो, विरोधी के विपक्ष का माहौल बना दो।

कुछ आया समझ मे, सीबीआई को सरकार का तोता कहने का भी एक दौर बड़ा मशहुर हुआ था, आपको ध्यान तो होगा ही।

जय हिन्द जय श्रीराम,
कुँवर जी।।

सोमवार, 1 जनवरी 2018

एक अद्भुत अनोखी फिल्म Curious case of Benzamin Button......(कुँवर जी)

Curious case of Benzamin Button......
एकदम अलग तरह की फिल्म लगी मुझे।विश्व युद्ध का समय दिखाया गया है।
शुरुआती दृश्य मे एक घड़ी का निर्माण दिखाया गया है जो उल्टी चलती है।सभी इसे मजाक मानते है लेकिन घड़ी निर्माता जब इस उल्टी घड़ी बनाने का कारण बताता है तो सभी भावुक होकर इसे स्विकार कर लेते है।वो चाहता है कि काश बीते हुए दिन वापस आ जाये।जो युद्ध मे मर गये है, अपने परिवार से बिछुड़ गये है वो वापस आ जाये।ये घड़ी इसी उम्मीद को दिखा रही थी कि काश समय वापस हो ले।
फिल्म का नायक जिस दिन पैदा होता है उसी दिन विश्व युद्ध के विराम की घोषणा हुई है। सभी बहुत खुश है। इधर Button परिवार भी बहुत खुश है कि आज ही के इतिहासिक दिन औलाद पैदा हो रही है। सभी बहुत नर्वस लेकिन सम्भावित खुशी के लिये रोमांचित भी है।जैसे ही लड़का जन्म लेता है, तभी बाहर से बहुत दूर से भागता हुआ नवजात का पिता लड़के की माँ के पास आता है वो बहुत ही मार्मिक दृश्य है।लड़का जन्म ले चुका है लेकिन किसी भी घरवाले के चेहरे पर खुशी के भाव नही है। जन्मोत्सव पर मरघट का सा मंजर है।नायक का पिता अपनी पत्नी के पास जाता है, वो मरणासन्न है।वो अपने पति को कहती है कि लड़के का ख्याल रखना.... और अन्तिम यात्रा को निकल जाती है। तब नायक का पिता नवजात नायक को देख कर घबरा जाता है। ऐसा लगता है कोई राक्षस हो छोटा सा।एक छोटी सी झलक नायक की तब मिलती है। नायक का पिता अपनी पत्नी की मौत और इस राक्षस जैसे बेटे को देख कर अन्दर से बुरी तरह टूट जाता है और उस नवजात शिशु को एक तौलिये मे लपेट कर बेहताशा दौड़ता जाता है और बहुत दूर एक सुनसान सी जगह मे एक ओल्ड हाउस के मुख्य द्वार के सामने उसे छोड़ आता है। थोड़े से पैसो के साथ।
उसी ओल्ड हाउस मे नायक की परवरिश होती है। नायक सामान्य लड़का नही है। वो बहुत बूढ़ा दिखाई देता है। बहुत ज्यादा बूढ़ा। उसके बचने की किसी को भी उम्मीद नही है फिर भी ओल्ड हाउस चलाने वाली लेडी उसे बहुत प्यार से पालती है।
सभी नायक को बहुत अजीब मानते है, दिखता भी है। उम्र मे बहुत छोटा लेकिन शरीर से बहुत बूढ़ा दिखाई जो देता है। 5-7 साल का होने पर भी वो चल नही पाता। उसके सर पर थोड़े बहुत सफेद बाल है, शरीर और चेहरे पर झुर्रिया है।70-80 साल का लगता है।वो अपने आप का और बाकी दुनिया का गहराई से विश्लेशण करता रहता  है।
एक हुले लुइया की महफिल का दृश्य भी आता है, कटाक्ष है करारा।लेडी उसे एक पादरी के पास लेकर जाती है, कि वो येशू से इसके लिये प्रार्थना करे और ये चल पड़े बिना बैसाखी के। पादरी हुले लुइया करता है जोर जोर से, बेंजामिन को मानसिक हौसला मिलता है और वो दो तीन कदम चल पड़ता है। सभी हुले लुइया हुले लुइया करने लग जाते है, लेकिन वो पादरी जो सबके लिये यीशु से प्रार्थना करता था लोगो के दुख दूर करवाता था, अपनी मृत्यु के लिये उसे प्रार्थना करने का समय भी नही मिलता।वही उसी समय मँच पर ही वो मर जाता है।

आगे सब उम्र मे बड़े होते जाते है लेकिन बेंजामिन उम्र मे बढ़ता तो है लेकिन शरीर से जवान होता जाता है। यही फिल्म की विशेषता है सब बूढ़े होते जाते है नायक जवान होता जाता है। आगे नायक को बस स्त्री भोग करता ज्यादा दिखाया गया है लेकिन वो ये सब देख रहा है कि उसके आस पास के लोग बूढ़े हो रहे है और मर रहे है और जवान होता जा रहा है। जब वो छोटा था तब भी लोग उसकी उम्र का विश्वास नही कर पाते थे अब वो बूढ़ा होता जा रहा तब भी लोग उसकी उम्र का विश्वास नही कर पाते है। अंत मे वो बच्चा हो जाता है और नवजात शिशु की तरह हो कर मर जाता है।
ये पूरी ऐसे आगे बढ़ती है कि फिल्म एक बूढ़ी औरत जो कि मरने वाली है हॉस्पिटल मे बैड पर पड़ी है को उसकी लड़की बेंजामिन की डायरी पढ़ कर सुनाती है। जैसे जैसे फिल्म आगे बढ़ती है बेंजामिन से उनका क्या रिश्ता रहा था पता चलता है।ये फिल्म देख कर ही पता करना आप लोग।
ब्रैंड पिट का अभिनय बाँधे रखता है और बूढ़े पिट का अभिनय बहुत ही जबर्दस्त।
ऐसा तो मुझे लगा था खैर। आप भी देखे और बताए कुछ ज्यादा तो नही कह दिया मैने।
संक्षिप्त मे फिल्म ऐसी है कि
एक बच्चा पैदा होता है जो फिजिकली और मेंटली बूढा होता है  जैसे जैसे उम्र बढ़ती है वह फिजिकली और मेंटली age में घटता जाता है ।
 तो बुढापे मेंऔर जवानी में जो उसकी wife होती है वह बुढ़ापे में उसे बच्चे की तरह मरते देखती है
 मतलब एक अकेला बन्दा जो अपनी age reiwind मे जीता है।जब देखोगे तो लगेगा कि इतनी छोटी छोटी detail कैसे दिखाई गयी है।
मतलब इसके बच्चे तो होते है 30 या 35 साल के और ये 16 साल के टीनेजर की तरह नासमझ रहकर उनसे डरता सा है जैसे...
और यह फ़िल्म रुकती नही। physical age और मेन्टल age का inverse चलता है इसमें ।

अन्ग्रेजी मे तो नही देखा मैने इसको। इस फिल्म को हिन्दी मे आप यहाँ देख सकते है।

जय हिन्द, जय श्री राम
कुँवर जी।।

रविवार, 31 दिसंबर 2017

अब अबोध बालको और उनके कुटिल अभिभावको को साँस खुल कर आ रही है।.... (कुँवर जी)

अभी अभी #25_दिसम्बर बोले तो #क्रिसमस का त्योहार गया है जो हमारे सेक्युलर इण्डिया मे पुरे जोश के साथ मनाया गया था, बाकायदा ऐसी खबरे राष्ट्रिय अखबारो,न्यूज चैनलो पर आईं थी भई, मै अपनी ओर से नही कह रहा हुँ। पटाखे शटाखे खूब चले होन्गे, दिवाली के जैसे बैन थोड़े ही था उन पर तो खूब बोले तो खूब। हर-हर सैंटा घर-घर सैंटा सा हो गया होगा ऐसा सा ही दिखा रहे थे राष्ट्रिय न्यूज चैनल तो।

देश हित मे ऐसी खबरे खैर जरुरी भी है जिस से देश का #सेक्युलरपना बचा रहे #वेटिकन की नजरो मे भी आया रहे छाया रहे। पापी पेट का सवाल है भई हे हे हे हे.... दुकाने भी चलती रहे चलनी भी चाहिये सभी को अधिकार है खुल कर जीने का।यही तो हमारे संविधान की विशेषता है।

खैर आइये आगे बढ़ते है मतलब थोड़ा पीछे हटते है, पापी पेट का ख्याल करने वालो ने पर्यावरण का ख्याल भी किया थोड़े दिन पहले। दिवाली के समय धुँध मे धुआँ खोज निकाला था।फोग को स्मॉग नाम दे दिये थे।बोत ही किरान्तिकारी खोज।पुरे देश मे सँसार मे इसकी भूरी भूरी प्रशंश हुई।#निर्णालय ने भी सहमती दी और प्रकृती को बचाने के लिये कठोर निर्णय लिया और हिन्दुओ के एक त्यौहार #दिवाली जिसे लोग पटाखे आदि चला कर मनाते है पर पटाखो पर #बैन लगा दिया।


चलिये बरत्मान मे आ जाते है।पोस्ट मे जो चित्र है गुरुग्राम से पाँच मिनट पहले के है,मल्लब साढ़े 8 से अधिक का समय हो चला है लेकिन सूर्य देवता का कही अता-पता नही है। धुँध का वर्चस्व है लगता है सूरज जी भी कही धुँध मे धुआँ होने से डर तो नही गये। स्मॉग उनकी रसायनिक प्रक्रिया को बाधित कर सकता है, उनका जीवन खतरे मे आ सकता है।वो क्या है ना उनको भी अपने पर्यावरण की चिन्ता है भई, आखिर खुद जल कर रोशनी कर रहे है।और फिर #सेक्युलर भी तो है,सेक्युलर को तो जलते रहना ही चाहिये हे हे हे हे.....
खैर छोड़िये आइये आगे ही बढ़ते है।

लेकिन लेकिन लेकिन वो धरती के पर्यावरण हितैषी, प्रकृती प्रेमी अभी दिखाई नही दे रहे। इस धुँध मे इनको धुआँ नही दिख रहा है, कोई #प्रदूषण_दिल्ली_एनसीआर मे रहा ही नही या वो केवल दिवाली पर ही होता है? स्मॉग की स्मेल्ल नही आ रही या नाक खराब हो गया है?
कोई मल्लब कोई भी हेलिकॉप्टर से पानी की बारिश करवाने की बात नही कर रहा है।
वो अबोध बालक जो दीवाली से पहले निर्णालय मे खड़े हो गये थे मास्क पहन कर उनको भी खुल कर साँस आ रही है अब। उनके कुटिल अभिभावको को भी।

खैर छोड़िये इस देश मे ऐसा ही चलता रहा है, ऐसे ही चलता रहेगा।क्या हुआ जो सरकार बदल गई, हम तो नही बदले है ना, हमारे पेट तो नही बदले है ना। पेट आज भी पापी ही है हे हे हे हे।

जय हिन्द,जय श्री राम।
कुँवर जी।।

शनिवार, 1 अक्टूबर 2016

छद्यम सेक्युलरजिम अर्थात समाज से छद्यम व्यवहार!....(कुँवर जी)

आजकल देश में बड़ा  माहौल बना हुआ है! सनातन संस्कृति और परम्पराओ को लेकर कोई भी कभी भी कुछ भी टिपण्णी कर देता है और कमाल की बात ये है कि हर गलत टिपण्णी को भी पर्याप्त समर्थन मिल जाता है!आजकल तो माननीय न्यायलय भी  है, लेकिन न्यायलय भी ऐसा दखल केवल सनातन हिन्दू परम्पराओ,रीती रिवाजो में ही देता है! अन्य सम्प्रदायो-मजहबो में उन्हें भी कुछ अनुचितदिखाई नहीं देता,भले ही छोटे छोटे बच्चो को भी भयंकर यातना देने वाली खतना जैसी प्रथा वह मौजूद हो!तब कोई मानवाधिकार आयोग अथवा तो बाल शोषण को लेकर बना कोई आयोग अथवा NGO भी सामने नहीं आते!ईद पर जो कत्लेआम होता है उसका एक उदाहरण ईद से अगले ही दिन आई बरसात के बाद के फोटो जो सामने आये थे बांग्लादेश के, उनसे मिलता है!पर कहीं कोई आवाज  खिलाफ,जबकि हिन्दुओ के जल-दूध आदि मूर्ति को चढाने को लेकर भी कोई भी टिपण्णी  है, ऐसा न करने की सलाह देता दिख जाता है!

घूँघट को कोसने वाले सब नारीवादी व्यक्ति-संघटन और  भी, बुर्के पर मौन हो जाती है!तीन तलाक़ के लिए उनके पास बोलने को तीन शब्द भी नहीं मिलते!हिन्दू परम्परा में विवाह एक बहुत ही महत्वपूर्ण परम्परा है! व्यक्तिगत दोनों दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण और नितांत आवश्यक है, कुछ स्वयम घोषित क्रान्तिकारी इस प् भी प्रश्नचिन्ह लगाते है!लिव-इन रिलेशनशिप को  है!अरेंज मैरिज जो कि समाज के लिहाज से और नारी की सुरक्षा और सम्मान की दृष्टि से सुन्दर व्यवस्था है; इसको ही गलत बताने लग जाते है!

आज  नवरात्रो का शुभारम्भ है! पहले ३ नवरात्रे मान शक्ति की आराधना के बताए जाते है!कितने ही हिन्दू जन ही इन दिनों में माँस आदि खाने की बात सार्वजनिक मंचो पर  दिखाई देंगे!माँ शक्ति, माँ दुर्गा को गलत सिद्ध करते दिखेंगे!ऐसा कर के वो पता नहीं क्या सिद्ध करना चाहते है!अचंभित करने वाली  है कि नारीवादी व्यक्ति-सघठन और नारिया भी ऐसा करने  में आगे दिखती है!इनमे अधिकतम कम्युनिस्ट वाम दाल से  होते है  इसमें कोई दो राय नहीं है!लेकिन बहुत  को हिन्दू बताने वाले भी मिलेंगे!जिनकी सुन्दर और सनाज के के लिए हितकर हिन्दू आस्थाओ-परम्पराओ में भी श्रद्धा नहीं वो कैसा हिन्दू भला?

 ऐसे विचारक स्वयं को धर्मनिरपेक्ष बताते है और सेक्युलर कहलवाते है!लेकिन असल में ये छद्यम सेक्युलरजिम है अर्थात समाज से छद्यम व्यवहार है!सभी को सामान मानने और किसी को भी कुछ न मानने में अंतर होता है !

जय हिन्द, जय श्री राम,
कुँवर जी!

गुरुवार, 21 अप्रैल 2016

स्वयं घोषित और स्वयं प्रचारित शुद्रो और इनके हितैषियों से संवाद का एक प्रयास।

आजकल हमारे देश में दलहित भावना बहुत फल फूल रही है।वर्तमान प्रोमोशनल हाई प्रोफाइल शुद्र खूब प्रचार कर रहे है अपना।उन्ही से संवाद का एक प्रयास है।हालांकि उन्हें संवाद नहीं विवाद ही पसन्द आते है फिर भी प्रयास है।जो संवाद पसन्द हिन्दू है वो तो समझेगा ही ऐसा मेरा विश्वास है।                  
आजकल ये हाई प्रोफाइल प्रोमोशनल शुद्र ऐसा माहौल बनाते है जैसे बस अभी अभी इन लोगो के जन्म के बाद ही शुद्रो का, नारियो का उत्थान होना शुरू हुआ है।ये लालिये पैदा हो गए तो बच गए शुद्र और नारी नहीं तो हिन्दू धर्म ने तो ताड़ ही दिया होता और पता नहीं कब तक ताड़ते रहते इनको। हालाँकि ताड़ने को भी ये अपने हिसाब से समझेंगे।जिन्हें अपने सनातन इतिहास पर विश्वास ही नहीं वो खुद को शुद्र-नारी हितैषी दिखाने के लिए उसी का सहारा भी बड़ी बेशर्मी से लेते रहते है। कई युगों, हजारो-लाखो सालो की दो चार घटना को अधूरी और अपने हिसाब से घड़ कर प्रस्तुत करते हुए जरा भी नहीं लजाते। खैर लाज का इन्हें क्या पता होगा छोड़ो वो तो।

लेकिन जब उसी सनातन इतिहास के वर्तमान में खाटू श्याम के भी मन्दिर होने की बात आती है तो वो मुँह फेर लेते है। नारी को इतना सम्मान दिए जाने की बात आती है कि उसे पूज कर ही लोग देवतुल्य हो जाते है तो वो स्वयं क्या रही होगी, तो वर्तमान लालिये बहरे हो जाते है।

चलो ज्यादा पुरानी बात नहीं करते दो ढाई हजार साल की बात करते है। एक चक्रवर्ती  सम्राट एक चमार के चरणों में अपना सर रख देता है उसे अपने से ऊँचे स्थान पर बैठा कर सम्मान देता है।गुरु बनाता है। लालिये बोलेंगे हमे तो नहीं पता। तो बच्चों पढ़ो, जानो इतिहास को अपने। राजा भर्तृहरि और गोरख नाथ के बारे में रिसर्च करो। कितने ही वर्तमान प्रोमोशनल शुद्र रिसर्च कर रहे है उनको बोलो।शुद्र को कुछ ज्ञान की बात भी बताओ या उन्हें अनपढ़ रखने और रोटी-बेटी चिल्लाने की प्रेरणा ही देने का षडयंत्र तुम्हारा ध्येय है।


जय हिन्द,जय श्री राम।
कुँवर जी।

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016

ले आए आरक्षण.....(कुँवर जी)


जब से ये आंदोलन नामक अंधड़ हरियाणा से गुजरा है अलग ही मानसिक स्थिति हो गई। कितने ही दोस्त इस अंधड़ में उड़ से गए, हम भी शायद उनके लिए किसी गाड़ी सा जल गए हो पता नहीही।
हमारी जिन्दगी बहुत ज्यादा बड़ी तो नहीं लेकिन कई पल ऐसे आते है जो कई जिन्दगी का बोझ सा दे जाते है। हमारे मजबूत चौड़े कन्धे उन कुछ पल का बोझ उठाने में अक्षम होते है। हम लाचार से घुटने टेक देते है उन पलो के।
एक शिक्षक जो इस लुटेरे आंदोलन का हिस्सा नहीं था, उसका समर्थक भी नहीं था, उस अंधी आग के कारण का समर्थक भी नहीं था, वो शिक्षक कई दिन के घोषित अवकाश के बाद कैसे अपने विद्यालय में गया होगा। कैसे उसने अपनी कक्षा में प्रवेश किया होगा और कैसे किसी विद्यार्थी से आँखे मिलाई होगी।

जो शिक्षक इस दंगे के समर्थक है या किसी भी बहाने से उन दंगाईयो के बचाव के भी समर्थक है उन पर थू ही है। वो तो बेशर्मी से अपने कुकर्म का घमण्ड दिखाते फिरेंगे उनका कोई जिक्र ही नही है।

लेकिन जो इसके समर्थक नहीं थे रोना तो उनका है। एक कहावत है कि "समझणिये की मर हो सै" बहुत सही है। वो तो हर उसकी आँखों में जो उसको देख रहा होगा कितने सवाल देखेगा। कोई आँख पूछ रही होगी "कितनी गाड़िया जला कर आए गुरु जी" कोई पूछ रही होगी "कितनी दुकाने लूटी" तो कोई आँख हँस रही होगी ये कहते हुए कि "मास्टर जी; ले आए आरक्षण"।
मन रो रहा है। पता नहीं कैसी कैसी कल्पनाएँ मन में आ रही है।

जय हिन्द,जय भारत।
कुँवर जी।

मंगलवार, 2 दिसंबर 2014

जिन्दगी तुझे ही तो ढूँढ रहे थे.....(कुँवर जी)

अनजानों में कही छिपा होता है 
जाना-पहचाना सा कोई
कभी रास्ते बदल जाते है
तब जान पड़ता है
कभी राहे वो ही रहती है
नजरिये नहीं बदलते
और लोग बदल जाते है।

फिर कही दूर किसी मोड़ पर
पलटते है हम
ना जाने क्या सोच कर
साँस समेट कर धड़कन रोक कर
और 

और पीछे से जिन्दगी छेड़ती है हमे
कहती है कि मै यहाँ तेरी राह तक रही
तू किसकी राह देखे।
मन के चोर को मन में छिपा 
आँखों मिचका कर 
कहते हम भी फिर
अरे तुझे ही तो ढूँढ रहे थे।
चलो चलते है।

जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुँवर जी ,

गुरुवार, 23 अक्टूबर 2014

सभी के लिए शुभकारी और अमंगलहारी हो दीपावली।

आस्था, उल्लास, आनन्द और समरसता के इस पावन पर्व पर सभी को परमपिता परमात्मा शान्त चित्त दे, सुखी जीवन दे, समृद्ध व्यवहार दे, अध्यात्मिक वातावरण दे, इश्वर प्रीति-गुरु भग्ति दे, सद्ज्ञान दे।
निरोगी काया निर्मल मन हो,
सात्विक आहार और
 थोडा दान के लिए भी धन हो।
सृष्टि-हित और समाज-हित के अनुसार ही स्वयं-हित करते रहने की समझ हो।

कुछ ऐसी सी ही असीम और अनंत शुभेच्छाओ और प्रार्थनाओ को पूरी करने वाली हम सब की दीवाली हो।

कुँवर जी,
जय हिन्द, जय श्री राम।

मंगलवार, 15 जुलाई 2014

मौन..... (कुँवर जी)

मौन.....
.
.
.
जिह्वा तालु को सटी है,
और अंतर में फिर भी शोर है,
क्या वहा मुझ से अलग कोई और है…
.
.
ये कैसा मौन है, ये कौन मौन है…?


जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुँवर जी

गुरुवार, 15 मई 2014

नतीजे...(कुँवर जी)

यही रात अंतिम यही रात भारी...

चलो नतीजो के आने से पहले सो लिया जाये!

मंगलवार, 21 जनवरी 2014

धोखा उसकी रगो में बहता है क्या करे....

धोखा उसकी रगो में बहता है क्या करे,
वो करता है फिर सहता है क्या करे!

मशगूल है उसकी आदतो में बाँध तोड़ना,
औरो के चक्कर में फिर खुद बहता है क्या करे!


जय हिन्द,
जय श्रीराम!

शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2013

मुझे अनुभव रेत के महलो का है.....(कुँवर जी)







मेरे शब्दकोष में कितने शब्दों के  अर्थ बदल गए,
अरमानो के सूरज कितने चढ़ शिखर पर ढल गए,
फौलादी इरादे वक़्त की तपन से मोम के जैसे पिघल गये,
सपनो तक जाने वाले रस्ते भौर होते ही मुझको छल गये,
इसी लिए तो आजकल बाते कम किया करता हूँ मै,
जिह्वा दब जाती है शब्दों के बोझ तले तो दो पल को सोचा करता हूँ  मै,

पहले हर हरकत एक जूनून हो जाती थी,
करना है तो बस करना है ऐसी धुन हो जाती थी,
क्या फ़िक्र थी कि ओरो की नजर ये बाते गुण या अवगुण हो जाती थी,
गुम था भविष्य,वर्तमान के लिए तो ये ही शगुन हो जाती थी,
आज शगुन को भी दो घडी टटोला करता हूँ मै,
तुमको लगा तो ठीक लगा के बाते करते सोचा करता हूँ  मै,


मुझे अनुभव रेत के महलो का है सो डरता हूँ हर आहट  से,
कितनी चतुराई क्यों न दिखाऊ हार जाता हूँ इस समय के  इक पल नटखट से,
फिर वो खड़ा मुस्कुराता है बेफिक्र और बेखबर हो मेरी हर झल्लाहट से,
सब भूलने का हौसला भी यूँ तो देता,उलझा कर तभी नयी  खटपट में,
बस यही से फिर जीने का दम भर जाता हूँ मै!

जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुँवर जी,



शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

फिर आतंकियों ने सेना पर हमला बोल दिया.....(लघु कथा )...(कुँवर जी)

मिश्रा जी ने चाय को ऐसे पिया जैसे किसी काढ़े का घूँट भर रहे हो!उनकी बहन घर पर आई हुयी थी,उन्होंने पूछा क्या हुआ चाय में चीनी की जगह नमक डाल दिया है क्या?
मिश्रा जी मुखमंडल पर दार्शनिक सी आभा को दिखाते हुए से बोले,"आज का अखबार तो देखो... फिर आतंकियों ने सेना पर हमला बोल दिया, कितने जवान शहीद हो गए!बोलते-बोलते वो सच में ही भावुक हो गए!फिर किसी की माँग सूनी हो गयी होगी,कितनी राखी कलाइयों को तरस जायेगी!कितनी माँ बस राह ताकती रह जायेगी!"
अखबार को अपने मन की तरह मसोस कर एक तरफ फेंक कर ऐसे ही बडबडाते हुए वो अपने कमरे की और चल पड़े,घडी की और नजर पड़ी तो ...." ओहो, आज फिर लेट हो जाऊँगा,अपनी पत्नी को लगभग धमकाते हुए वो बाथरूम की और दौड़े,"तुम्हे भी समय का पता नहीं चलता क्या?बताना तो चाहिए!आज तो वैसे भी एटीएम होकर जाना था,पांच-दस मिनट वहाँ भी लग जायेंगे!"
पत्नी बेचारी अपनी ननन्द की वजह से अपने सारे गुबार अपने ही अन्दर रखते हुए बोली,"नहाना बाद में, पहले अपने जीजा जी से बात तो कर लो.... क्या पता आज भी आये न आये!" पलट कर होंठ पीटती सी रसोई की और चली गयी!
मिश्रा जी की बहन को लगा की शायद वो ये कहती गयी है कि" रोज इसे लेने के लिए आने कि कह देते है....और आ रहे है नहीं!
उधर मिश्रा जी फोन काट कर बोले,"आज फिर बिना नहाये ही जाना पड़ेगा,खाना जैसा भी,जितना भी बना हो पैक कर दो!मैंने बोल दिया है जीजा जी को आज तो वो आ ही जायेंगे सो एटीएम तो जाना ही पड़ेगा!"
मिश्रा जी की बहन सोफे के एक कोने में फडफड़ाते  हुए अखबार को एक तक देखे जा रही थी,जैसे उसमे वो खुद को तलाश रही हो!

जय हिन्द,जय श्री राम,
कुँवर जी,   

मंगलवार, 10 सितंबर 2013

इन्सानियत से होता कोसो दूर इन्सान !....(कुँवर जी)

हालातो के हाथो
में खुद को सौंप
दुआ,बददुआ और
किस्मत को भूल,
एक दुसरे को मारने को मजबूर इन्सान !

दया,धर्म और धैर्य
सब गए रसातल में
पथरीली आँखों के
वहशीपन में ये दो पाया
इन्सानियत से होता कोसो दूर इन्सान !

अहम्,स्वार्थ,
और राजनीति के षड्यंत्र,
इनसे आँखे मूंदे,
खुद से ही लड़ता हुआ
भला चल पायेगा कितनी दूर  इन्सान !




जय हिन्द, जय श्रीराम,
कुँवर जी,

शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

कैसे आज तीज के झूले झूलूँ मै....

कैसे आज तीज के झूले झूलूँ मै....
दो सर आज भी झूल रहे है उनकी संगीनों पर...
कैसे भूलूँ मै!


झूलों की रस्सी में सांप दिखाई देते है,
हर आँखों में सीमा के संताप दिखाई देते है,
भड़क उठेंगे शोले जो जरा सी राख टटोलूं मै,
झूल रहे है दो शीश.....!


आस्तीन में सांप पालना कोई सीखे हमसे आकर,
दावत देते है हत्यारों को हम ससम्मान बुलाकर,
अबके घर में उनके घुसकर उनके शीश काट सारे दाग धोलूँ मै,
झूल रहे है दो शीश...!


कैसे आज तीज के झूले झूलूँ मै....
दो सर आज भी झूल रहे है उनकी संगीनों पर...
कैसे भूलूँ मै!


जय हिन्द ,जय श्रीराम,
कुँवर जी,

लिखिए अपनी भाषा में